Pulse Crops : चना, मटर और मसूर में फली छेदक और सेमी लूपर कीटों की रोकथाम के लिए एनपीबी विषाणु से ग्रसित 250 सूंडि़यों का रस 200 से 300 लिटर पानी में मिला कर 0.5 फीसदी गुड़ के साथ छिड़काव करना चाहिए.
फूल आने पर अगर कीटों का प्रकोप दिखाई दे तो वेसिलस थूरिजजिएसिंस (वीटी) की कार्स्टकी प्रजाति 1.0 किलोग्राम या अजादीरैक्टिन 0.03 फीसदी डब्ल्यूएसपी 2.5-3.0 किलोग्राम या मैलाथियान 50 फीसदी ईसी की 2.0 लिटर मात्रा का 500-600 लिटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें.
गेहूं के रोग से बचाव : सिंचित व असिंचित दोनों तरह के गेहूं में कई तरह के रोग लगते हैं. ऐसे समय में किसानों को जिस पौधे की बाली में रोग लगा हो, उसे पौलीथिन में डाल कर धारदार चाकू या हंसिया से काट लेना चाहिए और उसे जमीन में गाड़ देना चाहिए. इस से फायदा यह होगा कि उस के कीट दूसरे पौधे में रोग नहीं फैला पाएंगे.
इस के अलावा कीट नियंत्रण का दूसरा तरीका है, जिस के जरीए किसान रोग लगे पौधों को हटा सकते हैं. इस प्रक्रिया में जिस पौधे में रोग लगा हो, उसे जड़ से उखाड़ कर जला देना चाहिए.
यहां इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि रोग लगे पौधों को भूल कर भी उसी खेत में न डालें. इस विधि को रोगिंग भी कहते हैं.
कुछ इलाके ऐसे होते हैं, जहां दीमक का प्रकोप तेजी से होता है. अगर खेत में नमी न हो, तब दीमक अपना असर दिखा देते हैं और देखते ही देखते फसल सूखने लगती है. इस से फसल को बचाने के लिए सिंचाई के पानी के साथ क्लोरोपाइरीफास 20 फीसदी ईसी 2.5 लिटर प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें.
गेहूं और जौ की फसल में माहू कीट का प्रकोप होने पर मिथाइल ओ डेमेटान 25 ईसी या डाईमेथोएट 30 ईसी की एक लिटर मात्रा या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 125 मिलीलिटर प्रति हेक्टेयर की दर से 600-750 लिटर पानी में घोल कर छिड़काव करें.
किसान भाई इस मौसम में अपनी फसल के लिए बताए गए तरीकों पर अगर काम करेंगे तो उन्हें इस का फायदा जरूर मिलेगा. फसल बोने से ले कर उस के कटने और रखरखाव तक में लगातार पैनी नजर रखनी चाहिए. फसल में ज्यादा उत्पादन तभी होगा, जब समयसमय पर उस की देखरेख की जाए. रोग लगने पर कीटनाशक दवा का छिड़काव करें.Pulse Crops





