Thresher : हमारे देश में गेहूंधान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और जब फसल पक कर तैयार हो जाती है तो उस की कटाई के बाद समय से उस की गहाई करना भी बहुत जरूरी होता है क्योंकि अधिक दिनों तक खेत में कटी हुई फसल को नहीं छोड़ सकते, बरसातआंधी का भी डर होता है जिस से नुकसान होने का डर होता है.
आजकल ऐसे अनेक कृषि यंत्र मौजूद हैं जो कटाई के साथसाथ फसल से अनाज भी निकालते हैं. इन्हें कंबाइन हार्वेस्टर के नाम से जाना जाता है. परंतु इन बड़ी मशीनों की पहुंच हर इलाके में नहीं है, जबकि छोटी कटाई मशीन व गहाई मशीनों की पहुंच हर खेत पर होती है.
फसल की गहाई करने वाले इन यंत्रों को थ्रेशर (Thresher) के नाम से जाना जाता है. आज सामान्य थ्रेशर के मुकाबले आधुनिक बहुफसली थ्रेशर आ चुके हैं जिन्हें हम मल्टीक्रौप थ्रेशर के नाम से जानते हैं. इस तरह के थ्रेशर में थोड़ा बदलाव कर के उन से अनेक तरह की फसलों की गहाई कर सकते हैं. इन मशीनों से फसल गहाई का काम बहुत ही कम समय में बड़ी आसानी से होता है और अनाज भी साफसुथरा निकलता है. इसे सीधा मंडी में भी भेजा जा सकता है.
गहाई के लिए थ्रेशर :
गेहूं, धान, सरसों, सूरजमुखी जैसी खाद्यान्न फसलों की गहाई के लिए आजकल अनेक तरह के सामान्य थ्रेशर व मल्टीक्रौप थ्रेशर मौजूद हैं.
कुछ किसान तो ऐसे यंत्रों को खरीद कर रखते हैं जो समय पर काम आते हैं, पर जिन के पास इस तरह के यंत्र नहीं हैं वे भी ऐसे ही किसानों के यंत्रों से अपनी फसल की गहाई कराते हैं. फसल से अनाज निकालने यानी गहाई के लिए आमतौर पर आजकल नकद रुपयों के बजाय तय मात्रा में अनाज दिया जाता है जिस से फसल निकलवाने वाले किसान को आसानी रहती है. उसे नकद रकम नहीं देनी पड़ती.
इन थ्रेशरों को आमतौर ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर चलाया जाता है. एक जगह से दूसरी जगह ले जाना और भी आसान है. इन थ्रेशरों को 35 हौर्सपावर या अधिक शक्ति के ट्रैक्टरों के साथ इस्तेमाल किया जाता है.
यंत्र में बने पतनाले में फसल के पूले लगाए जाते हैं जो मशीन के अंदर लगे ब्लैडों में कट कर छोटेछोटे टुकड़ों में हो कर भूसा के रूप में उड़ कर दूर गिरता जाता है और अनाज नीचे लगे छन्ने में छनता हुआ साफसुथरा नीचे इकट्ठा होता जाता है. इसे एक जगह इकट्ठा करते जाते हैं.
एक बात थ्रेशर (Thresher) पर काम वाले को जरूर ध्यान रखनी चाहिए. थ्रेशर में गठरी (पूले) लगाते समय सावधानी जरूर रखें क्योंकि थ्रेशर मशीन फसल में पूलों को तेजी से अंदर की तरफ खींचती है इसलिए फसल के पूले लगाते समय हाथों से सही दूरी पर ही दबाव बनाते हुए पूले अंदर डालें वरना लापरवाही होने पर मशीन के अंदर हाथ जाने का डर होता है.





