पपीते (Papaya) की खेती बहुत ही लाभदायक साबित हो रही है. इसी कारण बड़ी संख्या में किसान पपीते की खेती करने के लिए आगे आ रहे हैं. इस की खेती का तरीका काफी सरल है. इस के बीज सहज मिल जाते हैं. इस की खेती के लिए ठीकठाक मिट्टी, सूरज की भरपूर रोशनी और पानी की जरूरत होती है. अगर ये सब ठीकठाक मात्रा में मिल जाए तो 6-7 महीने में फल फलने लगते हैं.
पपीते की खास प्रजातियां
पपीते की बहुत सारी प्रजातियां हैं, जिन में उम्दा प्रजाति के पपीते इस तरह हैं:
वाशिंगटन: इस प्रजाति के पपीते के फल गोल गूदेदार और मीठे होते हैं. एक पपीते का वजन एक किलो तक होता है.
कुर्ग हनिड्यू: इस के फूल उभयलिंगी होते हैं. फल लंबे आकार का और मीठा होता है. इस की खुशबू अच्छी होती है और बीज भी कम होते हैं.
रांची: पश्चिम बंगाल में इस प्रजाति के पपीते की खेती बड़े पैमाने पर होती है. इस के फल डिंबाकार होते हैं. ?फल मध्यम आकार के होते हैं. और गूदा नारंगी होता है.
इन के अलावा बाजार में सलेक्शन-1 और दूधसागर नामक प्रजाति के पपीते भी उपलब्ध हैं. बाजार में हाईब्रिड पपीते भी पाए जाते हैं. इन में ज्यादातर उभयलिंगी होते हैं. उभयलिंगी होने कारण फल ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं. हाईब्रिड प्रजातियां ये हैं:
रेड लेडी: इस का गूदा नारंगी रंग का होता है. एक फल का वजन डेढ़ से 2 किलोग्राम तक होता है. आकार कुछकुछ डिंबाकार होता है. एक पेड़ में काफी मात्रा में फल लगते हैं.
सिंटा: यह रेड लेडी जैसा ही होता है. फल का गूदा नारंगी और आकार डिंबाकार होता है. पके फल का वजन भी 2 किलोग्राम तक होता है. इस की फसल काफी अच्छी होती है.
मधु: इस का गूदा लाल होता है. फल का वजन एक से 2 किलोग्राम तक होता है. यह प्रजाति पके फल के लिए ही जानी जाती?है.
उन्नत बीज, अच्छी पैदावार
जहां तक बीज का सवाल है, तो पपीते का बीज नर, मादा, या उभयलिंगी कुछ भी हो सकता?है. पौधा एक मीटर का हो जाने पर इस में फूल खिलते हैं. पहले नर पेड़ों में फूल खिलते?हैं. नर पेड़ के फूल की पहचान है इस का लंबा डंठल और बहुत सारी छोटी कलियां. मादा पेड़ के फूल आकार में कुछ बड़े होते?हैं और पेड़ के तने के ज्यादा करीब होते हैं. हर 10-15 बीज में एक बीज नर होता है. नर पेड़ों को अलग कर देना चाहिए.
एक बीघा जमीन में 60-70 ग्राम बीज लगते हैं. बीज बोने से पहले बीज उपचार जरूरी है. एक किलोग्राम बीज में 2 ग्राम मैनकोजेब मिला कर अच्छी तरह हिला कर उपचार किया जाता है. बारिश के मौसम में बीज लग जाने पर उस स्थान को पौलिथीन की शीट से ढक देना चाहिए. 2-3 हफ्ते में बीज फूटने शुरू हो जाएंगे.
कब और कैसे दें खाद
अच्छी फसल के लिए अच्छी खाद खेती का नियम है. पपीते के लिए 10-15 किलोग्राम सूखे गोबर की खाद या वर्मी खाद, एक किलोग्राम हड्डी के चूरे से तैयार खाद, ढाई सौ ग्राम नीम का बुरादा, डेढ़ सौ ग्राम म्युरेट और पोटाश मिला कर मिट्टी तैयार करनी होती है. इस मिट्टी में पौध लगाने के बाद उस के डंठल के आसपास मिट्टी को थोड़ा ऊंचा कर देना चाहिए. एक बीघा में 4 सौ पेड़ लगाए जा सकते हैं. बड़े होने के बाद 5-6 महीने में पेड़ के लिंग का पता चल जाता है.
पौध लग जाने के बाद हर 2 महीने में 5 किलोग्राम गोबर की खाद या वर्मी खाद, सौ ग्राम यूरिया, ढाई सौ ग्राम सुपर फास्फेट, डेढ़ सौ ग्राम म्युरेट आफ फास्फेट देना होता है. इस के बाद क्यारी के बीच की मिट्टी को पेड़ के आसपास ऊंचा कर देना चाहिए.
कितना मिलेगा फल उत्पादन
पेड़ लगाने के 4-5 महीने में फल लगने शुरू हो जाते हैं. एक साथ बहुत सारे फल लगने पर पेड़ पर से कुछ फल अलग कर देने चाहिए, ताकि फलों को अच्छा पोषण मिले. फल लगने के 3-4 महीने बाद कुछ कच्चे फल बाजार में बेचे जा सकते हैं. पके फल के लिए साल भर इंतजार करना होता है. जहां तक कच्चे पपीते का सवाल है, तो 6 महीने से ले कर एक साल तक हर पेड़ से 50 किलोग्राम कच्चा पपीता मिल जाता है. इस के बाद अगले डेढ़ साल तक 20 टन कच्चा पपीता मिलता है और इस का दोतिहाई भाग पका पपीता मिलता है.
बाजार भेजने से पहले करें ये काम
पका पपीता अगर दूर के बाजार में भेजना है, तो पूरी तरह पकने से थोड़ा पहले तोड़ लेना चाहिए. बाजार तक पहुंचतेपहुंचते यह पूरी तरह से पक कर तैयार हो जाएगा. अधपके फल को तोड़ लेने के बाद 2 लीटर पानी में एक चाय का चम्मच पोटैशियम परमैगनेट मिला कर इस मिश्रण में एकएक कर के सभी पपीतों को 2 मिनट के लिए डुबा कर छाया में सुखा लें. इस के बाद आकार के हिसाब से छांट कर सूखे कागज में अच्छी तरह लपेट कर पुआल या कागज की कतरनों में रख कर पेटी या टोकरी तैयार करनी चाहिए.
इतनी तैयारी कर के बाजार में पपीता पहुंचाने पर उस की गुणवत्ता बरकरार रहती है, इस से अच्छी कीमत भी मिलती है.





