Connected Cow Collar. देश में सभी डेयरी किसानों के लिए अपने पशुओं को स्वस्थ रखना बहुत महत्वपूर्ण है. अक्सर गायों में बीमारी के शुरुआती लक्षण नहीं दिखते, जिससे इलाज में देर होती है और दूध उत्पादन और किसानों की कमाई दोनों प्रभावित होते हैं. ऐसे में Connected Cow Collar नाम की एक आधुनिक तकनीक किसानों के लिए मददगार साबित हो सकती है.

क्या होता है ये Connected Cow Collar?

Connected Cow Collar एक स्मार्ट कॉलर है जिसे गायों के गले में पहनाया जाता है. इसे 2022 में आशीष सोनकुसरे, शैलेंद्र नारवडे और विधि गौर की टीम ने बनाया था. यह उपकरण गायों की गतिविधियों पर नज़र रखता है और महत्वपूर्ण जानकारी किसानों तक डिजिटल रूप से पहुँचाता है. जिससे पशुओं की पल-पल की जानकारी किसानों को मिलती रहती है. पशुपालन की यह नई तकनीक कारगार है.

यह कैसे काम करता है?

इस कॉलर में लगे सेंसर गाय की गतिविधि, शरीर के तापमान और व्यवहार संबंधी जानकारी इकट्ठा करते रहते हैं. यह सभी जानकारी सिस्टम में डाली जाती है जो डेटा का विश्लेषण करता है. सिस्टम यह पता लगाने की कोशिश करता है कि गाय के स्वास्थ्य में कुछ गड़बड़ तो नहीं हो रही है. अगर सिस्टम को लगता है कि गाय बीमार पड़ सकती है, तो यह तुरंत किसान के मोबाइल पर एक संदेश भेजता है.

ब्रीडिंग और लोकेशन की जानकारी भी देता है

यह स्मार्ट कॉलर सिर्फ स्वास्थ्य की निगरानी तक ही सीमित नहीं है. बल्कि यह ये भी बताता है कि आपके पशु के लिए प्रजनन का सही समय क्या है, जिससे किसानों को अपने पशुओं का बेहतर ध्यान रखने में मदद मिलती है. इसके अलावा, जीपीएस तकनीक की मदद से आप अपनी गाय की लोकेशन भी पता कर सकते हैं, जिससे अगर आपका पशु खो जाए या भटक जाए, तो आप उसे आसानी से ढूंढ सकते हैं.

पूरी डिटेल मोबाइल ऐप पर रहती है सुरक्षित

Connected Cow App की मदद से हर पशु का एक डिजिटल रिकॉर्ड बनाया जाता है. इसमें स्वास्थ्य की जानकारी, गतिविधियों का इतिहास और अन्य ज़रूरी जानकारी सुरक्षित रहती है. इससे किसानों को अपने पशुओं पर नज़र रखने और उनका प्रबंधन पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो जाता है.

इस सुविधा का उठा रहे है लाखो किसान लाभ

स्टार्टअप के अनुसार, अब तक लगभग 22 लाख किसान इस तकनीक से जुड़ चुके हैं. यह आंकड़ा दिखाता है कि आधुनिक डिजिटल समाधान धीरे-धीरे भारतीय पशुपालन क्षेत्र में अपनी मजबूत जगह बना रहे हैं.

किसानों को क्या मिलेगा फायदा?

बीमारी के शुरुआती संकेत समय पर मिलने से इलाज में देरी नहीं होती. पशुओं की नियमित स्वास्थ्य निगरानी आसान होती है. ब्रीडिंग का सही समय जानने में मदद मिलती है. जीपीएस ट्रैकिंग से पशु की लोकेशन का पता चलता रहता है. डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए पशुओं का बेहतर प्रबंधन संभव होता है.

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