Marodia Disease: बदलते मौसम और जलवायु के कारण अक्सर किसानों को फसल में नई-नई बीमारियों और कीटों से रूबरू होना पड़ता है. जिन कीट बीमारियों के बारे में किसान को जानकारी होती है उनसे तो वे समय रहते निपट लेते हैं, पर फसल की कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनका ज्यादातर किसानों को पता नहीं होता, जिससे वे उनका इलाज नहीं कर पाते और जब तक उन्हें कीट या बीमारी का पता चलता है, तब तक बहुत देर हो जाती है और खड़ी फसल बरबाद हो जाती है. ऐसी ही एक खास बीमारी है मरोडि़या (Marodia Disease), जो खेत में एक पौधे में भी लग जाए, तो पूरा खेत चौपट कर सकती है. आइए, जानते हैं इस खतरनाक बीमारी के बारे में और क्या है इस बीमारी का तोड़.

क्या है मरोडि़या (Marodia Disease)

कृषि माहिरों की मानें तो मरोडि़या (Marodia Disease) एक खतरनाक बीमारी है. यह जैमिनी वायरस है. यह वायरस न तो जीवित होता है और न ही मृत. अगर किसी पौधे में इस वायरस का प्रकोप हो जाए, तो यह पौधे से संपर्क होते ही जीवित हो जाता है. पौधे में इस बीमारी के लक्षण दिखने में 30 से 40 दिन लग जाते हैं.

सफेद मक्खी का खास रोल

इस वायरस को फैलाने में सफेद मक्खी का खास रोल होता है. सफेद मक्खी जब वायरस वाले पौधे का रस चूसकर दूसरे पौधे पर जाकर रस चूसती या अपना तरल छोड़ती है, तो सफेद मक्खी के डंक से यह वायरस स्वस्थ पौधे में भी चला जाता है. इस तरह से एक सफेद मक्खी भी पूरे खेत में इस खतरनाक वायरस को पहुंचा सकती है. यह सफेद मक्खी बहुत छोटा सा कीट है. मक्खियों का समूह हजारों की तादाद में अंडे देता है और इसका प्रकोप बढ़ता जाता है.

कैसे पहचानें

इस बीमारी से पौधों की पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं और उनका हरापन खत्म होने लगता है. यह वायरस पौधे से कार्बोहाइड्रेट कम करता है. यह बीमारी कपास की फसल पर ज्यादा हमला करती है.

क्या है समाधान

इस खतरनाक मरोडि़या बीमारी (Marodia disease) के समाधान के लिए वायरोसन एक एंटीबैक्टीरियल उत्पाद है. यह प्राकृतिक उत्पादकों से बनाया गया है, जो वायरस और बैक्टीरिया इन्फेक्शन को रोकने के काम आता है. इस बीमारी से बचाव के लिए वायरोसन बहुत ही कारगर है.

कैसे करें इस्तेमाल

वायरोसन का 1 पैकेट, जिसमें 10 ग्राम पाउडर की मात्रा होती है, का 15 लीटर पानी में घोल बना लें व फसल पर छिड़कें. पहला छिड़काव पौधे बनने के कुछ समय बाद करें, जिससे इस खतरनाक बीमारी का डर न रहे. अगर पौधों पर इस वायरस दवा का पहला छिड़काव नहीं किया है और अब फसल की पत्तियां सिकुड़ने लगी हों तो तुरंत ही वायरोस एंटीबैक्टीरियल दवा का इस्तेमाल करें. इसे किसी भी फसल के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, चाहे सब्जी की फसल ही क्यों न हो. यह देशी तरीके से बनाया गया है, जो बहुत ही कारगर है.

बेहतर नतीजों के लिए करें ये काम

बेहतर नतीजों के लिए इसमें लस्सी (छाछ) व गौमूत्र भी मिलाना चाहिए, क्योंकि गौमूत्र में नाइट्रोजन होता है और वह और तेजी से काम करता है.

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