Sheep Farming: खेती-किसानी के साथ भेड़ – बकरी पालन करना खेती को कहीं अधिक लाभकारी बनाता है. इसमें भी भेड़ पालन करना बकरी पालन से अधिक लाभकारी साबित हो रहा है. जानिए कैसे?
मुनाफेदार भेड़ पालन
भेड़ पालन (Sheep Farming) किसान के लिए एटीएम है. आप सभी को यह जानना होगा कि बकरी पालन की तुलना में भेड़ पालन में भेड़ों की चराई करना आसान है. बकरी की तुलना में भेड़ वजन में जल्दी तैयार होती है एवं भेड़ पालन मे भेड़ को बकरी की उपेक्षा कम संसाधन में भी पालकर बढ़िया वजन लिया जा सकता है. भेड़ का मेमना 3 महीने में जो वजन लेता है वह बकरी का बच्चा 5 से 6 महीने में ले पाता है इसलिए भेड़ पालन, बकरी पालन की तुलना में अधिक फायदेमंद है. यह जानकारी डॉ. अरुण कुमार तोमर, निदेशक, अविकानगर संस्थान ने दी.
उन्होंने किसानों को अच्छी नस्ल के पशुओं के लिए वैज्ञानिक पालन अपनाने के लिए कहा ताकि अच्छी पैदावार प्राप्त हो सकें, साथ में टीकाकरण, बदलते मौसम अनुसार पशुओं को सूखा और हरा चारा, दाना खिलाना एवं उचित आवास व्यवस्था का ध्यान रखने को भी कहा.
भेड़ और ऊंट दोनों ही लाभकारी
डॉ. अनिल कुमार पुनिया, निदेशक, राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान संस्थान बीकानेर का कहना है कि, मिलकर कार्य करने से पशुपालकों को कहीं अधिक फायदा होगा. किसान एक साथ दोनों पशुओं भेड़ एवं ऊंट पालन कर सकता है.
किसान वैज्ञानिक संगोष्ठी का हुआ आयोजन
विगत दिनों भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर के मरुक्षेत्रीय केंद्र बीकानेर का 53वां स्थापना दिवस किसान वैज्ञानिक संगोष्ठी के साथ मनाया गया, जिसमें मुख्य अतिथि डॉ. अनिल कुमार पुनिया, निदेशक, राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान संस्थान बीकानेर, कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार तोमर, निदेशक, अविकानगर संस्थान, विशिष्ट अतिथि सीएओ इंद्रभूषण कुमार एवं प्रभारी केंद्र निर्मला सैनी रहे.
संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार ने अपने संस्थान के साथ सभी केंद्र द्वारा पिछले वर्ष किए गए कार्यों के बारे में बताया एवं भविष्य मे भेड़पालन के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए किसानों को प्रशिक्षण के साथ जागरूकता पैदा करने का आग्रह किया.
एमओयू किया साइन
स्थापना दिवस के अवसर पर उर्मूल सीमांत समिति बज्जू एवं अविकानगर संस्थान के केंद्र के बीच ऊन की गुणवत्ता एवं उत्पाद विषय पर एमओयू साइन किया. केंद्र के 2 पब्लिकेशन ‘कृषक सफलता की कहानी’ एवं ‘प्रसार पत्र’ के फोल्डर का भी विमोचन कार्यक्रम के अतिथियों द्वारा किया गया.
उपरोक्त कार्यक्रम में 80 से अधिक किसान लुकरणसर, कोटडी, गोलरी व गाढ़वाला से अनुसूचित जाति उपयोजना में सम्मिलित हुए और अपने विचार एवं समस्या पर विस्तार से संवाद वैज्ञानिकों और किसानों के बीच हुआ.





