ककोरा एक जंगली फल है. जंगलों के साथसाथ खेत की मेंड़ों पर पहली बारिश होने के साथ ही यह पैदा होने लगता है. यह कहां और किस के खेत में पैदा होगा, यह नहीं कहा जा सकता. जंगलों में भी जहां झाडि़यां ज्यादा होती हैं, वहां यह आसानी से पैदा हो जाता है. इस की एक खूबी और भी है, जितनी अच्छी बारिश होगी, उतनी ही ककोरा की पैदावार भी अच्छी होगी. फल तोड़ लेने के बाद ककोरा की बेल से फिर से फल आने लगते हैं.

भारत के ज्यादातर हिस्सों में मिलने वाली इस सब्जी को केकरोल, काकरोल और दूसरे कई नामों से जाना जाता है. इस में कैलोरी कम होती है. इस वजह से यह फल वजन घटाने वालों के लिए  काफी बेहतर है. फाइबर से भरपूर ककोरा पाचन तंत्र को सही रखता है. इस फल में अनेक पौष्टिक तत्त्व होते हैं.

कैंसर की रोकथाम में मददगार : इस फल में मौजूद ल्यूटेन जैसे केरोटोनाइड्स, विभिन्न नेत्र रोग, दिल की बीमारी और यहां तक कि कैंसर की रोकथाम में यह मददगार है.

सर्दीखांसी में राहत दिलाए : इस में एंटीएलर्जिक तत्त्व होते हैं, जो सर्दीखांसी से राहत देने और इसे रोकने में मददगार साबित होते हैं.

सेहत सुधारने में सहायक : ककोरा में मौजूद फाइटोकैमिकल्स सेहत को सुधारने में मदद करते हैं. एंटीऔक्सीडैंट से भरपूर इस सब्जी से शरीर को साफ रखने में मदद मिलती है.

वजन घटाने वालों के लिए अच्छी : प्रोटीन और आयरन से भरपूर ककोरा में कम मात्रा में कैलोरी होती है. 100 ग्राम ककोरा में केवल 17 फीसदी कैलोरी होती है. इस वजह से यह वजन घटाने वालों के लिए बेहतर विकल्प है. यह फल ब्लड शुगर को कम करने और डायबिटीज को नियंत्रित करने में सहायक है.

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