Agricultural News: आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) 121 वर्ष पुराना अग्रणी कृषि संस्थान है, जो हरित क्रांति का केंद्र रहा है तथा कृषि अनुसंधान, शिक्षा और प्रसार का अग्रदूत है. आईएआरआई देश के करोड़ों लोगों की खाद्य, पोषण एवं आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने में निरंतर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. संस्थान का यह शानदार सफर वर्ष 1923 में प्रारंभ हुआ और एक शताब्दी से अधिक समय से किसानों के सपनो को साकार करने में अपनी गौरवशाली परंपरा को बनाए हुए है. Agricultural News

पूसा का मिट्टी जांच यंत्र

आईसीएआर-आईएआरआई द्वारा विकसित पूसा एसटीआरएफ मीटर एक ऐसा मिट्टी जांच यंत्र है, जो कम लागत और इस्तेमाल करने में सरल और मिट्टी जांच के सटीक नतीजों के लिए जाना जाता है. यह अकेला यंत्र मिट्टी के अनेक सूक्ष्म पोषक तत्त्वों सहित मृदा के 14 खास मानकों की जांच करता है. खेत की मिट्टी जांच यंत्र से प्राप्त नतीजों की संतुति के अनुसार खाद उर्वरक और बीज कितना कब देना है, इसकी जानकारी मिलती है, जिससे सही खेती कर अच्छा लाभ लिया जा सकता है. Agricultural News

अवशेष प्रबंधन के लिए पूसा डीकंपोजर

संस्थान द्वारा विकसित पूसा डीकंपोजर पराली प्रबंधन और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए एक अचूक समाधान है. जो पर्यावरण के अनुकूल, किफायती, प्रभावी सूक्ष्मजीवी समाधान है. फसल कटाई के बाद खासकर पराली प्रबंधन या फसल अवशेषों के लिए इसे संस्थान द्वारा विकसित किया गया है. यह कम समय में पराली अवशेष को जैविक खाद में बदलने का काम करता है, जिससे अगले फसल की बोआई भी समय से की जा सकती है और पैदावार भी अधिक मिलती है.

पूसा डीकंपोजर अब पाउडर के रूप में भी उपलब्ध

जी हां, अब पूसा डी कंपोजर पेस्ट के अलावा रेडी टू यूस पाउडर के रूप में भी विकसित किया गया है, जो पानी में आसानी से घुल जाता है और जिसे स्प्रेयर यंत्र द्वारा फसल अवशेष वाले खेत में छिड़काव किया जा सकता है.
किसानों के लिए कम खर्च और कम समय में पराली प्रबंधन का काम करता है और फसल अवशेषों को जैविक खाद बनाने का काम करता है.

इस के अलावा अनेक समाधान दिए संस्थान ने

फसलों में कीट एवं रोग निगरानी, प्रसिजन एक्वाकल्चर तथा पशुधन स्वास्थ निगरानी के लिए सेंसर आधारित मृदा एवं फसल स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली, रोबोटिक्स, आईओटी सक्षम तकनीकियों तथा बहु प्लेटफार्म रिमोट सेटिंग उपकरण विकसित किए हैं. Agricultural News

इसके अलावा सौर ऊर्जा से चलने वाली स्वचालित बेसिन सिंचाई प्रणाली में 30 फीसदी तक पानी की बचत, जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली.

इसके अलावा अनेक कीट रोगों की पहचान के लिए अनेक तकनीक विकसित की हैं.

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