Good Seeds: फसलों के उत्पादन में उम्दा बीजों की काफी बड़ी भूमिका होती है. इतना ही नहीं उम्दा बीजों के इस्तेमाल से पैदावार को 20 से 30 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है. ज्यादातर किसान सस्ते के चक्कर में फंस कर घटिया किस्म के बीजों का इस्तेमाल कर लेते हैं, जिस से फसलों की घटिया पैदावार देख कर उन के सामने सिर पीटने के अलावा और कोई चारा नहीं होता है.
कितने प्रकार के होते हैं बीज
किसानों को बीजों के बारे में पूरी जानकारी रखना जरूरी है. कृषि वैज्ञानिक वेदनारायण सिंह बताते हैं कि बीज मुख्य रूप से 3 तरह के होते हैं.
प्रजनक बीज
प्रजनक बीज पीले रंग का होता है और इसे पौधा प्रजनक की निगरानी में तैयार किया जाता है. इस बीज के प्रमाणीकरण की जगह मानिटरिंग की जाती है. इस बीज का उत्पादन केंद्रक बीज से होता है और केंद्रक बीज भी पौधा प्रजनक की देखरेख में बनाया जाता है. इस से बीज का आनुवांशिक सौ फीसदी शुद्ध होता है. प्रजनक बीज का इस्तेमाल आधार बीज बनाने के लिए किया जाता है.
आधार बीज
आधार बीज का रंग सफेद होता है और यह प्रजनक बीज से ही पैदा किया जाता है. इस का उत्पादन राष्ट्रीय बीज निगम, राज्य बीमा निगम, सरकारी कृषि प्रक्षेत्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के प्रक्षेत्रों में किया जाता है. इस तरह के बीज का प्रमाणीकरण संस्था द्वारा किया जाता है, पर इस की शुद्धता प्रजनक बीज से कम होती है.
प्रमाणिक बीज
आधार बीज का इस्तेमाल प्रमाणिक बीज बनाने के लिए किया जाता है. प्रमाणिक बीज का रंग नीला होता है और यह उन्नत किस्म का बीज होता है. इस का प्रमाणीकरण राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था करती है. इस का उत्पादन राज्य बीज निगमों, सरकारी कृषि प्रक्षेत्र व किसानों के प्रक्षेत्र में किया जाता है. इस बीज का ही इस्तेमाल किसान फसल उत्पादन के लिए करते हैं.
भरोसेमंद जगह से खरीदें बीज
उम्दा किस्म के बीजों के उत्पादन के लिए किसानों को कुछ बातों का खयाल रखना जरूरी है. किसान हमेशा सरकारी बीज एजेंसियों से ही बीज खरीदें और जैविक खाद का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें.
बीज उपचार करें
बीज की बोआई करने से पहले उसे केमिकल से अच्छी तरह उपचारित करें और बीज फसल को उगाने के दौरान बीज प्रमाणीकरण संस्था के बताए हुए सुझावों पर पूरी तरह अमल करें. बीज फसल की कटाई ठीक समय पर करें और बीजों को अच्छी तरह से धूप में सुखा कर 2 फीसदी बीएचसी धूल से उपचारित कर के साफ और सूखे बक्से या बोरे में ही रखें.
कैसे करें बीज रोपाई
किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि गेहूं के बीज उपजाने के लिए खेत की जुताई कर के बीजों को 5 से 6 सेंटीमीटर गहराई में रोपना चाहिए. लाइन से लाइन के बीच की दूरी 25 सेंटीमीटर होनी चाहिए. प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम बीज की रोपाई होने से बीज स्वस्थ होते हैं. बीजों को सीडड्रिल या हाथहल से ही बोना बेहतर होता है.
बीजों की अच्छी पैदावार के लिए प्रति हेक्टेयर 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 से 60 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश डालनी चाहिए. कृषि वैज्ञानिकों या जानकारों की सलाह ले कर उन की देखरेख में ही खाद और केमिकल का इस्तेमाल करना चाहिए.
सिंचाई को ले कर खास एहतियात बरतने की दरकार होती है. बीजों की बोआई के 20 से 25 दिनों के बाद पहली सिंचाई करनी चाहिए. कल्ले फूटने के बाद दूसरी और गांठ बनने के आखिरी समय में तीसरी सिंचाई की जाती है. फूल आने पर या बोआई के 90-95 दिनों के बाद आखिरी बार सिंचाई की जरूरत होती है.
दलहनी फसलों के बीजों को कीटनाशक दवाओं व राइजोबियम से उपचारित किया जाता है. चने और मसूर के बीज उत्पादन के लिए सब से अच्छा समय अक्तूबर और नवंबर होता है. दलहनी फसल में 25 से 30 दिनों के भीतर निराईगुड़ाई करनी चाहिए.
भंडारण से पहले चने और मसूर के बीजों को अच्छी तरह सुखा लें, ताकि उन में नमी की मात्रा 9 फीसदी से ज्यादा न रहे.





