छत्तीसगढ़ में बस्तर के 'मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर', कोंडागांव द्वारा विकसित काली मिर्च को उत्पादन, गुणवत्ता और सभी मापदंडों पर देश की सर्वश्रेष्ठ काली मिर्च के रूप में भारत सरकार के शीर्ष मसाला अनुसंधान संस्थान में दर्ज किया गया है.

उल्लेखनीय है कि केरल और देश के अन्य भागों में काली मिर्च के एक पेड़ से अधिकतम औसत उत्पादन 5 किलोग्राम रहा है, जबकि कोंडागांव की मां दंतेश्वरी काली मिर्च-16 में यह औसत उत्पादन मात्रा 8-10 किलोग्राम पाई गई है. उत्पादन की मात्रा के साथसाथ गुणवत्ता में भी यह काली मिर्च अन्य काली मिर्च से बेहतर है.

उल्लेखनीय है कि स्पाइस बोर्ड औफ इंडिया, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान ( ICAR- IISR) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा 'मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर, कोंडागांव के लगातार दौरे और प्रत्यक्ष निरीक्षण के बाद, भारत सरकार के 'स्पाइस बोर्ड औफ इंडिया' के आधिकारिक प्रकाशन "स्पाइस इंडिया" पत्रिका के नवीनतम अंक में प्रकाशित हुआ है.

Black Pepperयह लेख मुख्य रूप से कोंडागांव के 'मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर' द्वारा विकसित काली मिर्च की नई किस्म 'मां दंतेश्वरी काली मिर्च- 16' यानी एमडीबीपी-16 पर केंद्रित है.

जानकारी के लिए बता दें कि कृषि क्षेत्र में नवाचारों के लिए अलग पहचान बनाने वाले और 5 बार देश के सर्वश्रेष्ठ किसान का अवार्ड प्राप्त करने वाले बस्तर के किसान डा. राजाराम त्रिपाठी विगत 2 दशकों से गरम और सूखी जलवायु क्षेत्रों के लिए काली मिर्च की प्रजाति विकसित करने में लगे हुए थे, जिन्हें साल 2016 में सफलता मिली. आज इस किसान के द्वारा विकसित की गई काली मिर्च की प्रजाति मां दंतेश्वरी काली मिर्च-16 केवल बस्तर के किसानों में ही नहीं, बल्कि देश के अन्य सभी भागों में भी सफलतापूर्वक उगाई जा रही है. इस काली मिर्च की क्वालिटी के सामने बाकी सभी देशीविदेशी वैरायटी उन्नीस साबित हुई हैं. काली मिर्च के साथ ही हर्बल चाय, सफेद मूसली, स्टीविया, इंसुलिन पौधा, आस्ट्रेलियन टीक लकड़ी, काला नमक धान, हलदी और अनेक हर्बल उत्पादों ने भी देशविदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है.

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