Kisan Aandolan 2026: जमीन, बिजली, फसल के दाम, खरीद व्यवस्था और कर्ज राहत जैसे सवालों पर किसानों की बेचैनी फिर सामने आई है. ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से एक नया किसान आंदोलन उभरकर सामने आया है, जिसने एक बार फिर देशभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
भुवनेश्वर में किसान मार्च के दौरान राकेश टिकैत को रोके जाने की घटना ने आंदोलन को स्थानीय मुद्दे से राष्ट्रीय बहस में बदल दिया है. ओडिशा से शुरू हुई यह आवाज़ उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित देश के अन्य राज्यों तक पहुंच चुकी है, हरियाणा के कुरुक्षेत्र में ऑल इंडिया किसान मजदूर मोर्चा की राष्ट्रीय बैठक हुई. क्या चर्चा हुई जानने के लिए पढ़ें यह ख़बर –
किसानों की राष्ट्रीय बैठक में क्या हुआ
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में ऑल इंडिया किसान मजदूर मोर्चा की राष्ट्रीय बैठक ने आने वाले समय के किसान और मजदूर आंदोलनों की दिशा तय कर दी है. अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने साझा मुद्दों पर एकजुट रणनीति बनाई.
MSP की कानूनी गारंटी पर राष्ट्रीय रणनीति
बैठक का मुख्य केंद्र MSP की कानूनी गारंटी रहा. संगठनों ने कहा कि, न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून का रूप दिए बिना किसानों को बाजार में सुरक्षा नहीं मिल सकती. इसी मुद्दे पर देशभर में जागरूकता अभियान चलाने का फैसला हुआ.
एजेंडा क्या हैं
MSP (Kisan Aandolan 2026) के अलावा मनरेगा सुरक्षा, बिजली संशोधन, बीज कानून और नए श्रम कानूनों को भी किसानों और मजदूरों के हितों से जोड़ा गया. इन मुद्दों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना गया.
राज्यों में जनजागरण अभियान
राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में चरणबद्ध सम्मेलन करने की योजना बनाई गई है. इसका उद्देश्य गांव-गांव तक इन मुद्दों को पहुंचाना और जनसमर्थन तैयार करना है.
बैठक में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि किसान और मजदूरों की लड़ाई अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साझा ग्रामीण आर्थिक संघर्ष है. यदि यह रणनीति जमीनी स्तर पर मजबूत हुई, तो आने वाले समय में यह आंदोलन राष्ट्रीय कृषि नीति की बहस को प्रभावित कर सकता है.





