Straw Reaper : स्ट्रा रीपर फसल अवशेष का बनाए भूसा

Straw Reaper: खेतीबारी में स्ट्रा रीपर (Straw Reaper) एक ऐसा कृषि यंत्र है जो एक ही बार में खेत में खड़े फसल अवशेष (गेहूं या धान की पराली) को काट कर उस का भूसा बनाने का काम करता है. ये वही फसल अवशेष होते हैं, जिन्हें गेहूंधान जैसी तैयार फसल को कंबाइन हार्वैस्टर से काटा जाता है और बाद में बचे हुए गेहूंधान के डंठलों को इस स्ट्रा रीपर से एक घुमावदार ब्लेड से काटा जाता है. घूमती हुई रील उन्हें औगर की ओर धकेलती है. डंठलों को औगर और गाइड ड्रम द्वारा मशीन में पहुंचाया जाता है, जो थ्रैशिंग सिलैंडर तक पहुंचते हैं. वहां डंठलों की छोटेछोटे टुकड़ों में कटिंग हो जाती है. उस का भूसा बन जाता है और ठीक पीछे लगा डबल ब्लोअर भूसे के धूल के कणों को साफ करते हुए ड्रम में ले जाता है.

योद्धा स्ट्रा रीपर (Straw Reaper)

इस यंत्र को चलाने के लिए कम से कम 50 हौर्सपावर की जरूरत होती है. इस योद्धा स्ट्रा रीपर की बास्केट में 35 ब्लेड और थ्रैशिंग के लिए 272 ब्लेड लगे होते हैं.

स्ट्रा रीपर (Straw Reaper) की खासीयतें

* ईंधन की कम खपत होती है.

* स्पेयर पार्ट्स हर जगह आसानी से मिल जाते हैं.

* हैवी ड्यूटी रियर हुक.

* हैवी ड्यूटी गियर बौक्स.

यंत्र लंबे समय तक सुरक्षित रहे, इस के लिए उच्च गुणवत्ता वाले पीयू पेंट का इस्तेमाल किया जाता है.

यंत्र की अन्य खूबियों के लिए या किसी दूसरी जानकारी के लिए आप उन के फोन नंबर 91-1628 284188 या मोबाइल नंबर 7087222588 पर बात कर सकते हैं.

Agricultural Machinery : खेत तैयार करने का खास यंत्र एग्रोमैक डिस्क हैरो

Agricultural Machinery : आज के आधुनिक युग में कृषि यंत्र बेहद उपयोगी हो गए हैं और खेती में अनेक कामों के लिए अनेक कृषि यंत्र बाजार में उपलब्ध हैं. यहां हम खेत जुताई करने वाले एक ऐसे कृषि यंत्र के बारे में बात करने जा रहे हैं जो खेत की जुताई करने के साथसाथ खेत तैयार करने में भी खास भूमिका निभाता है. खेतों की जुताई करने के लिए सब से मुफीद कृषि यंत्र है डिस्क हैरो. डिस्क हैरो अलगअलग साइज में आते हैं, जिन्हें किसान अपनी सुविधानुसार खरीद सकते हैं.

एग्रोमैक 14 डिस्क वाला (हैरो एग्रोमैक-ष्ठ॥-१४)

इस में बोरौन स्टील डिस्क के साथ एक मजबूत मुख्य फ्रेम होता है. इस मौडल में डिस्क की संख्या 14 होती है. 7 डिस्क आगे और 7 डिस्क पीछे लगी होती हैं.

डिस्क व्यास 24 इंच और मोटाई 4 मिलीमीटर की होती है. सामने वाली डिस्क में नोकदार और पीछे वाली में प्लेन डिस्क लगी होती है.

Agricultural Machineryइस यंत्र की लंबाई 7 फुट, चौड़ाई 70 इंच, ऊंचाई 24 इंच होती है. डिस्क के बीच की दूरी 9 इंच होती है और यह 6 इंच की गहराई तक जुताई करता है.

इस यंत्र का अनुमानित वजन लगभग 600 किलोग्राम तक होता है और इस यंत्र को चलने के लिए कम से कम 40 हौर्सपावर के ट्रैक्टर की जरूरत होती है.

एग्रोमैक 14 डिस्क हैरो की दूसरी खासीयतें

फ्रंट डिस्क में जुताई के बीच में आने वाले किसी भी अवशिष्ट खरपतवार को काटने के लिए खांचे बने होते हैं. यह यंत्र ट्रैक्टर की हौर्सपावर के अनुसार विभिन्न आकारों के साथ बनाया गया है.

यंत्र मैं स्क्रैपर दिए गए हैं, ताकि उन में अटके हुए फसल अवशेषों को स्वचालित रूप से हटाया जा सके. इस से ट्रैक्टर पर लोड नियंत्रण में रहता है और ईंधन की बचत होती है.

यह यंत्र खाद के बेहतर मिश्रण के साथ ठूंठ और खरपतवारों की बेहतर कटाई और मिश्रण बनाने का काम करता है और मिट्टी के ढेलों को एकदम बारीक कुचल देता है.

इस यंत्र की अधिक जानकारी के लिए सम्यक एग्रो इंप्लीमैंट्स के फोन नंबर +91-8837667267 पर बात कर सकते हैं.

Machines : मल्टीक्रौप थ्रैसर गहाई से करें कमाई

Machines : फसलों की गहाई में आज थ्रैसर की खास अहमियत है. जो काम आम तरीके से करने में काफी समय लगता था, वही काम अब मशीनों ने आसान कर दिया है. आज बाजार में कई प्रकार के मल्टीक्रौप थ्रैसर मौजूद हैं, जिन के पुर्जों में हलका सा बदलाव कर के या चलाते समय उन को इस्तेमाल करने की तकनीक को थोड़ा हेरफेर कर के कई अलगअलग फसलों की गहाई आसानी से की जा सकती है. मक्का, सोयाबीन, ज्वार, बाजरा, सरसों, मूंग, चना, उड़द वगैरह फसलों की गहाई अच्छी क्वालिटी वाले थ्रैसर से की जा सकती है.

अगर हम अच्छी मशीन इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो हमें अपने अनाज में टूटफूट ज्यादा मिलेगी या साथसुथरा अनाज नहीं मिलेगा, इसलिए अनाज में टूटफूट से बचाव के लिए गहाई मशीन यानी थ्रैसर मशीन का सही चयन करना जरूरी है. कुछ मशीन निर्माता कुछ खास फसलों के लिए खास थ्रैसर भी बनाते हैं.

आज तमाम कंपनियां थ्रैसर बना रही हैं, जिन में साइको एग्रोटेक कंपनी योद्धा के नाम से थ्रैसर बना रही है. इस के अलावा अमर मक्का थ्रैसर, ग्रिल एग्रो आदि अनेक कंपनियां मक्का थ्रैसर व मल्टी क्रौस थ्रैसर बना रही हैं.

कुछ कृषि यंत्र निर्माता अलगअलग अनाज के लिए खास थ्रैसर भी बनाते हैं. चूंकि ऐसे थ्रैसर किसी खास फसल के लिए ही बनाए जाते हैं, तो जाहिर है कि उन से बेहतर नतीजे मिलेंगे.

आइए जानते हैं मक्का थ्रैसर में बारे में, जिसे खासतौर पर मक्के की गहाई के लिए बनाया गया है.

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प्रकाश मक्का थ्रैसर

इस थ्रैसर के बाबत हमारी बात अनिल कुमार गर्ग से हुई जिन्होंने बताया, ‘हम किसानों के लिए कई कृषि यंत्र तैयार कर रहे हैं. आज के समय में ज्यादातर किसान हमारे द्वारा बनाए गए कृषि यंत्रों का ही इस्तेमाल कर रहे हैं. यह थ्रैसर हम ने खासतौर से मक्के की गहाई के लिए बनाया है. इसे 45 हार्सपावर के किसी भी ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर चलाया जा सकता है. इसे 35 हार्सपावर के ट्रैक्टर के साथ भी चला सकते हैं, लेकिन तब अनाज की गहाई की कूवत कम हो सकती है. 1-2 साल में ही कमाई कर के यह थ्रैसर अपनी कीमत वसूल कर देता है.

‘हमारे इस थ्रैसर की मांग उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे तमाम राज्यों में है. कोई भी किसान इस थ्रैसर के बारे में जानने के लिए मोबाइल नंबर 9897591803 पर फोन कर सकता है.’

गणेश राज थ्रैसर

गणेश एग्रो कंपनी के पास  गेहूं, मक्का, ज्वार, जीरा, धनिया, सरसों, चना, सौंफ, अरंड, सोयाबीन, ग्वार व चावल आदि की गहाई के लिए कई मौडल मौजूद हैं.

कंपनी का कहना है कि उस के पास हैवी चैसिस व हैवी फ्लाई व्हील के साथ थ्रैसर मौजूद हैं. दानेदाने की शुद्धता की गारंटी है. आप गणेश एग्रो कंपनी में टौल फ्री नंबर 18001200313 पर या 912764273442, 267446 पर फोन कर के अधिक जानकारी ले सकते हैं.

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अमर मल्टी क्रौप थ्रैसर

35 से 40 हौर्स पावर और अधिक कूवत वाले ट्रैक्टर से चलने वाले थ्रैसर इस कंपनी में भी मौजूद हैं. प्रोडक्ट क्वालिटी के लिए इस कंपनी को साल 1993 में राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है.

कंपनी में कई प्रकार के थ्रैसर मौजूद हैं, जिन की कीमत 20 हजार रुपए से ले कर सवा लाख रुपए तक है. ये थ्रैसर 5 हौर्स पावर मोटर से ले कर 80 हौर्स पावर तक के ट्रैक्टर के साथ चलाए जा सकते हैं.

इस कंपनी के जगदेव सिंह का कहना है कि उन के मल्टी क्रौप थ्रैसर से धान को छोड़ कर सभी फसलों की गहाई की जा सकती है. थ्रैसर के साथ बुकलेट दी जाती है, जिस में पूरी जानकारी होती है कि किस अनाज के लिए थ्रैसर से किस तरह से काम लेना है. थ्रैसर में क्याक्या बदलाव करना है, यह जानकारी भी दी होती है.

ज्यादा जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 098726579 , 09872018040 पर बात की जा सकती है.

Machinery : ऐसी मशीनरी विकसित हो जिस से कृषि लागत हो कम  

Machinery: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के फार्म मशीनरी व पावर इंजीनियरिंग विभाग द्वारा संचालित तकनीकी कार्यक्रम की वर्ष 2024-25 की समीक्षा और वर्ष 2025-26 की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की जबकि अनुसंधान निदेशक डा. राजबीर गर्ग ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की.

कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने अपने संबोधन में कहा कि वैज्ञानिकों को ऐसे मशीनरी/उपकरण विकसित करने चाहिए जिस से किसानों की कृषि लागत को कम किया जा सके. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का अनुसंधान तंत्र किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य कर रहा है, ताकि प्रदेश व देश की कृषि समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सके. साथ ही, आधुनिक तकनीकों के माध्यम से नवीनतम टैक्नोलौजी पर आधारित कृषि उपकरण की तैयारी पर जोर दिया, ताकि खेतीबारी के कार्यों को आसान बनाया जा सके.

उन्होंने आगे कृषि उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने पर भी जोर दिया. कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने कहा कि टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, कृषि दक्षता में सुधार करना और मशीनरी एवं विद्युत संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है.

अनुसंधान निदेशक डा. राजबीर गर्ग ने क्षेत्रीय कृषि समस्याओं, अनुसंधान प्रयासों, तकनीकी नवाचारों और किसानों की आवश्यकताओं पर केंद्रित समाधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक ऐसी तकनीकों का विकास करें जो स्थानीय किसानों की आवश्यकताओं को स्टीक रूप से पूरा कर सके. साथ ही, विकसित की गई तकनीक का मैदानी स्तर पर प्रभावी प्रदर्शन किया जाना चाहिए, ताकि उन की प्रायोगिक उपयोगिता प्रमाणित हो सके. उन्होंने आगे लघु व सीमांत किसानों की आवश्यकताओं को मद्देनजर रखते हुए इंटर कल्चर औपरेशन के लिए बैटरी चालित, बहुउपयोगी छोटे कृषि यंत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई.

डा. राजबीर गर्ग ने फसल अवशेष प्रबंधन को ले कर पराली जलाने की समस्या को दूर करने के लिए यांत्रिक समाधानों जैसे हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम आदि के प्रभाव उन की उपयोगिता के संदर्भ में किसानों को जागरूकता किया.

इस बैठक के दौरान वैज्ञानिकों द्वारा वर्ष 2024-2025 में किए गए अनुसंधान कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई. इस कार्यक्रम के समापन अवसर पर कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. एसके पाहुजा ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया. इस अवसर पर सभी महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, अनुभाग प्रमुख और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ उपस्थित रहे.

Raised Bed Planter :उन्नत तकनीक से मक्के की बोवनी

Raised Bed Planter : जबलपुर के किसानों के लिए एक खुशखबरी है. रेज्ड बेड प्लांटर मशीन द्वारा मक्के की बोवनी में अत्यधिक बारिश के बावजूद भी किसी भी प्रकार की हानि नहीं हुई है. आज यह उन्नत तकनीक मक्का, दलहन और तिलहन फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है. इस मशीन के द्वारा मिट्टी की मेड़ बनाई जाती है और उस पर बोवनी की जाती है. इस में एक विशेष व्यवस्था होती है जिस से अत्यधिक बारिश होने पर नालियों से बारिश का पानी बाहर निकल जाता है और फसल को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचता है.

इस के विपरीत, यदि कम बारिश भी होती है तो बारिश का पानी सीधे पौधों की जड़ों में पहुंच जाता है, जिस से पौधे को सीधे पानी मिलता है. कृषि अभियांत्रिकी अधिकारी एनएल मेहरा ने बताया कि यह पद्धति मक्का, दलहन, और तिलहन फसलों के लिए बहुत ही फायदेमंद है. इस से फसलों की उत्पादकता बढ़ती है और किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है.

पनागर विकासखंड के नरेंद्रपुर के निवासी प्रगतिशील किसान बीडी अरजरिया ने अपने खेतों में इस पद्धति को अपनाया है और उन्हें बहुत ही अच्छे परिणाम मिले हैं. आसपास के किसानों ने उन की सफलता को देख कर इस पद्धति को अपनाने की प्रेरणा ली है. रेज्ड बेड प्लांटर मशीन द्वारा मक्के की बोवनी एक उन्नत तकनीक है जो किसानों के लिए बहुत ही फायदेमंद है. इस से फसलों की उत्पादकता बढ़ती है, आय में बढ़ोतरी होती है और किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा करने में भी मदद मिलती है. जबलपुर के किसानों के लिए अपनी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और अपनी आय में इजाफा करने का यह एक अच्छा मौका है.

Sugarcane Planter : शुगरकेन प्लांटर से करें गन्ना बीज की बोआई

Sugarcane Planter : आज अगर आप को खेती में सफलता लेनी है तो कृषि यंत्रों का इस्तेमाल करना जरूरी है. कृषि यंत्र न केवल खेती की लागत कम करते हैं, बल्कि समय की भी बचत करते हैं और उपज में भी बढ़त मिलती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में अनेक कृषि यंत्र निर्माता हैं जो खेती में काम आने वाले अनेक तरह के कृषि यंत्र बनाते हैं. हाल ही में फार्म एन फूड के प्रतिनिधि ने अनेक कृषि यंत्र निर्माताओं से मुलाकात की और उनके बात कर जाना कि खेती में कृषि यंत्रों का कितना योगदान है. इसी संदर्भ में गन्ना बोआई यंत्र के बारे में मोगा इंजीनियरिंग वर्क्स की फैक्टरी में अमनदीप सिंह से बात हुई. उन्होंने अनेक जानकारी अपने कृषि यंत्रों के बारे में दी जो निश्चित ही किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी.

मोगा शुगरकेन प्लांटर

इस कंपनी से अमनदीप सिंह ने बताया कि वह खेती में काम आने वाले अनेक प्रकार के यंत्र बनाते हैं. जिन में गन्ना बोआई के लिए शुगरकेन प्लांटर, आलू बोआई के लिए पोटेटो प्लांटर. गेहूं, धान, मक्का जैसी फसल गहाई के लिए थ्रैशर और खेत जुताई के लिए रोटावेटर खास हैं. उन्होंने आगे बताया कि हमारी मशीनों की पहुंच देश के अनेक किसानों व राज्यों तक है.

मोगा इंजीनियरिंग वर्क्स मेरठ उत्तर प्रदेश में है और मेरठ और उस के आसपास गन्ना अधिक मात्रा में उगाया जाता है, जिस के कारण भी उन के शुगरकेन प्लांटर की अच्छी डिमांड है.

मोगा शुगरकेन प्लांटर

गन्ना बोआई करने वाले यंत्र के बारे में अमनदीप सिंह ने बताया कि गन्ना बोआई के शुगरकेन प्लांटर के 2 मौडल बनाते हैं. एक मौडल ट्रैंच तकनीक से गन्ना बोआई करता है तो दूसरा मौडल लाइन में गन्ने की बोआई करने वाला रो वाला मौडल है.

मोगा सुगरकेन सिंगल ट्रैंच मौडल:

इस मौडल में एक लाइन में 2 गन्ने एक साथ बोए जाते हैं, जिन्हें लाइनों के बीच 12 इंच, 15 इंच और 18 इंच की दूरी पर लगा सकते हैं. बीच की दूरी को किसान अपनी जरूरत के अनुसार बढ़ाघटा सकते हैं और इस यंत्र को कम से कम 42 हौर्स पावर के ट्रैक्टर के साथ चलाया जाता है. इस यंत्र की कीमत 1 लाख, 75 हजार रुपए है. इस यंत्र से एक दिन (10 घंटे) में 15 बीघा गन्ना बोआई कर सकते हैं.

डबल ट्रैंच मौडल :

इन का दूसरा मौडल डबल ट्रैंच मौडल है जो सिंगल ट्रैंच मौडल से दोगुना काम करता है. गन्ने की दोगुनी बोआई करता है, इस मशीन को 60 हौर्स पावर के ट्रैक्टर के साथ चलाया जाता है और इस यंत्र की कीमत लगभग 2 लाख, 40 हजार रुपए है.

डबल ट्रैंच मौडल से एक दिन में 25 से 30 बीघा बोआई (10 घंटे में) कर सकते हैं.

एक साथ 6 काम

दोनों ही मौडल एक साथ 6 काम करते हैं.

# खेत में गन्ना डालने के लिए जगह बनाने का काम.

# बोआई के लिए गन्ने की कटिंग करने का काम.

# गन्ना बीज लगाने का काम.

# खाद साथ में ही डालने का काम.

# बोआई के दौरान ही गन्ने पर स्प्रे (बीज उपचार) करने का काम.

# गन्ना बोआई के बाद उसे मिट्टी से ढकने का काम.

इन कृषि यंत्रों में टायर भी लगे हैं, इसलिए इसे एक जगह से दूसरी जगह लाना ले जाना आसान है.

Sugarcane Planter

लाइन में बोआई करने वाला शुगरकेन प्लांटर

उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर ज्यादातर लाइन में ही गन्ने की बोआई की जाती है. उन के लिए यह उम्दा शुगरकेन प्लांटर है. यह प्लांटर 27 से 30 इंच की दूरी पर लाइन में गन्ना बीज की बोआई करता है. 2 लाइन में बोआई करने वाले शुगरकेन प्लांटर को 45 हौर्स पावर के ट्रैक्टर के साथ और 3 लाइन में बोआई करने वाले प्लांटर के लिए 50 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर उपयुक्त है.

2 लाइन वाले प्लांटर की कीमत लगभग 1 लाख, 82 हजार रुपए है वहीं 3 लाइन में बोआई करने वाले प्लांटर की कीमत 1 लाख, 98 हजार रुपए है.

अमनदीप सिंह ने यह भी बताया कि हमारी मशीन में वैसे तो कोई समस्या आती नहीं है, अगर कभी कोई समस्या आती भी है तो हम 500 किलोमीटर तक के दायरे फ्री सर्विस देते हैं.

इन यंत्रों के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं तो आप कृषि यंत्र निर्माता अमनदीप सिंह के मोबाइल नंबर 8285325047 पर बात कर सकते हैं.

Agricultural Machines : कृषि मशीनों का करें इस्तेमाल

Agricultural Machine: गाजर बिजाई के लिए मजदूरों की कमी से परेशान किसानों के लिए खुशखबरी है कि अब उन्हें गाजरमूली और दूसरी सब्जियों की बिजाई के लिए अधिक समय और पैसा नहीं खर्च करना पड़ेगा. इस के लिए तमाम कृषि यंत्र बाजार में मौजूद हैं. हरियाणा के अमन विश्वकर्मा इंजीनियरिंग वर्क्स के मालिक महावीर प्रसाद जांगड़ा ने खेती में इस्तेमाल की जाने वाली तमाम मशीनें बनाई हैं, जिन में गाजर बोने के लिए गाजर बिजाई मशीन भी शामिल है.

बैड प्लांटर व मल्टीक्रौप बिजाई मशीन

यह मशीन बोआई के साथसाथ मेंड़ भी बनाती है. इस मशीन से गाजर के अलावा मूली, पालक, धनिया, हरा प्याज, मूंग, अरहर, जीरा, गेहूं, लोबिया, भिंडी, मटर, मक्का, चना, कपास, टिंडा, तुरई, फ्रांसबीन, सोयाबीन, टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी, सरसों, राई और शलगम जैसी तमाम फसलें बोई जा सकती हैं.

मशीन से करें गाजर की धुलाई

खेत से निकालने के बाद गाजरों की धुलाई का काम भी काफी मशक्कत वाला होता है, जिस के लिए मजदूरों के साथसाथ ज्यादा पानी की जरूरत भी होती है. जिन किसानों के खेत किसी नहर आदि के किनारे होते हैं, उन्हें गाजर की धुलाई में आसानी हो जाती है. इस के लिए वे लोग नहर के किनारे मोटर पंप के जरीए पानी उठा कर गाजरों की धुलाई कर लेते हैं. लेकिन सभी को यह फायदा नहीं मिल पाता. महावीर जांगड़ा ने जड़ वाली सब्जियों की धुलाई करने के लिए भी मशीन बनाई है. इस धुलाई मशीन से गाजर, अदरक व हलदी जैसी फसलों की धुलाई आसानी से की जाती है. इस मशीन से कम पानी में ज्यादा गाजरों की धुलाई की जा सकती है. इस मशीन को ट्रैक्टर से जोड़ कर आसानी से इधरउधर ले जाया जा सकता है.

लोगों में इंजीनियर के नाम से चर्चित महावीर प्रसाद जांगड़ा को राह ग्रुप बेस्ट इंजीनियर का अवार्ड मिल चुका है. कृषि विभाग, हरियाणा सरकार व दूसरी सामाजिक संस्थाओं की ओर से वे कई बार सम्मानित हो चुके हैं.

इस मशीन के बारे में यदि आप ज्यादा जानना चाहते हैं, तो अमन विश्वकर्मा इंजीनियरिंग वर्क्स के फोन नंबरों 09896822103, 09813048612, 01693-248612 व 09813900312 पर बात कर सकते हैं.

आईसीएआर-सीआईएई द्वारा विकसित प्लास्टिक मल्च लेयर-कम-प्लांटर

भोपाल : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 जून, 2025 को आईसीएआर केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (सीआईएई), भोपाल का दौरा किया.

जहां केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों, छात्रों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कृषि के विकास में संस्थान के योगदान की सराहना की और किसान हितैषी प्रौद्योगिकियों के तीव्र विकास और विकसित प्रौद्योगिकियों को किसानों, विशेषकर छोटे किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया.

उन्होंने कृषि में छोटे इंजन द्वारा संचालित या वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से संचालित मशीनरी विकसित करने और सैंसर आधारित प्रणालियों के अलावा अन्य प्रणालियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि सभी वर्गों के किसानों का विकास हो सके.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश के विभिन्न स्थानों पर किसान मेले आयोजित करने और सभी हितधारकों के साथ विचारविमर्श सत्र आयोजित करने की इच्छा जाहिर की, ताकि आने वाले समय में देश में मशीनीकरण की रूपरेखा तैयार की जा सके. इस के अलावा उन्होंने खाद्य सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य और प्रयोगशाला से भूमि तक प्रौद्योगिकियों के प्रभावी हस्तांतरण के महत्व पर भी जोर दिया.

इस कार्यक्रम में सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं आईसीएआर के महानिदेशक डा.एमएल जाट, उप महानिदेशक (इंजीनियरिंग) डा. एसएन झा, उप महानिदेशक (विस्तार) डा. एके नायक, आईसीएआर-सीआईएई के निदेशक डा. सीआर मेहता और आईसीएआर-आईआईएसएस, भोपाल के निदेशक डा. एम मोहंती उपस्थित थे.

आईसीएआर-सीआईएई द्वारा विकसित ट्रैक्टर चालित प्लास्टिक मल्च लेयर-कम-प्लांटर

ऊंची क्यारियों का निर्माण, ड्रिप लेटरल, प्लास्टिक मल्च बिछाना और मल्च के नीचे बीज बोने का कार्य मैन्युअल रूप से करना कठिन, अधिक समय और ज्यादा मेहनत का काम होता है, जिस में तकरीबन 29 दिन प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है. इन सभी कार्यों को एक साथ करने के लिए ट्रैक्टर चालित प्लास्टिक मल्च लेयर-कम-प्लांटर विकसित किया गया है.

इस यंत्र में ट्रैक्टर की हाइड्रोलिक प्रणाली का उपयोग कर के हाइड्रोलिक मोटर (385 न्यूटन मीटर) और चेन-स्प्रोकेट ट्रांसमिशन सिस्टम के माध्यम से एक्सेंट्रिक स्लाइडर क्रैंक मैकेनिज्म संचालित किया जाता है, वहीं बीज मापने की इकाई में वैक्यूम ट्रैक्टर के पीटीओ से चलने वाले एस्पिरेटर ब्लोअर द्वारा तैयार किया जाता है.

एक्सेंट्रिक स्लाइडर क्रैंक मैकेनिज्म ड्राइविंग डिस्क की घूमने वाली गति को कनेक्टिंग रौड के माध्यम से स्लाइडर क्रैंक में ऊर्ध्वाधर गति में बदल देता है और पंच प्लांटिंग मैकेनिज्म के “D” प्रोफाइल को मिट्टी में खोलता है.

प्न्यूमैटिक बीज मापने वाली प्लेट और एक्सेंट्रिक स्लाइडर क्रैंक मैकेनिज्म को इस प्रकार समकालिक किया गया है कि मापने वाली प्लेट द्वारा उठाया गया बीज बंद “प्लांटिंग जॉ” में डाला जाता है, जो बीज को पकड़े रखता है और स्लाइडर क्रैंक के माध्यम से प्लास्टिक मल्च में प्रवेश करने के बाद उसे छोड़ता है.

इस यंत्र की प्रभावी कार्य क्षमता 0.2 हेक्टेयर प्रति घंटा और कार्य कुशलता 74 फीसदी है, जो 1.7 किलोमीटर प्रति घंटा की गति और 1 मीटर कार्य चौड़ाई पर आधारित है. इस यंत्र की कुल लागत 3 लाख रुपए और संचालन लागत 1500 रुपए प्रति घंटा है. इस का पेबैक पीरियड 1.9 साल (444 घंटे) और ब्रेक-ईवन पौइंट 70 घंटे हर साल है.

इस यंत्र में कतार से कतार की दूरी 0.5 से 0.9 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी 0.2 से 0.6 मीटर को यांत्रिक रूप से समायोजित करने की सुविधा है. यह यंत्र मौजूदा ड्रिप लेटरल-कम-प्लास्टिक मल्च लेयर मशीन की तुलना में 26 दिन प्रति हेक्टेयर (89 फीसदी) और 6600 प्रति हेक्टेयर (43 फीसदी) लागत की बचत करता है.

यह यंत्र प्लास्टिक मल्च में उच्च मूल्य वाली फसलें जैसे खरबूजा, ककड़ी, स्वीट कौर्न, बेबी कौर्न, हरी मटर, भिंडी, फलियां आदि लगाने के लिए सब से बेहतर है.

Agricultural Machinery : छोटी जोत वाले किसानों के लिए कृषि यंत्र

Agricultural Machinery : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान 5 जून, 2025 को ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के तहत पंजाब के किसानों से मिले. जहां उन्होंने खेतों में जा कर फसल और उत्पादन का जायजा लिया. साथ ही, पटियाला के अमरगढ़ का दौरा कर कृषि यंत्रों के कारखाने में विभिन्न कृषि मशीनों, यंत्रों और उपकरणों का अवलोकन भी किया.

इस मौके पर पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. एमएल जाट, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डा. सतबीर सिंह गोसाल, डा. बसंत गर्ग, सचिव, पंजाब कृषि विभाग, वैज्ञानिक व अधिकारी कार्यक्रम में शामिल रहे.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब के किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि एक वैभवशाली भारत, एक गौरवशाली भारत, एक संपन्न भारत, एक समृद्ध भारत, एक शक्तिशाली भारत, यही हमारी परिकल्पना है और कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है.

वर्तमान में चौथी तिमाही में देश ने 7.5 फीसदी की विकास दर हासिल की है, जिस में 5.4 फीसदी योगदान कृषि क्षेत्र का है. आज अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की 18 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी है. आज भी देश की 50 फीसदी आबादी की आजीविका का स्रोत्र कृषि ही है.

उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में हम जो प्रमुख काम करना चाहते हैं, उस में 145 करोड़ के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, खाद्य सुरक्षा के साथसाथ पोषण से भरपूर आहार उपलब्ध कराना, खेती को किसानों के लिए फायदेमंद बनाना और भारत को विश्व में फूड बास्केट के रूप में स्थापित करना शामिल है.

उन्होंने कहा कि मैं पंजाब की धरती को बारंबार नमन करता हूं. देश के अन्न भंडार भरने में पंजाब के किसानों का बहुत योगदान है. एक समय था जब हम अमेरिका का निम्न गुणवत्ता वाला गेहूं खाने के लिए मजबूर थे, लेकिन आज स्थिति में ऐसा सुधार आया है कि हम अच्छे गुणवत्ता वाले गेहूंचावल का उत्पादन भी कर रहे हैं और विदेशों में भी इस का निर्यात कर रहे हैं. आज भारत के बासमती चावल की विदेशों में अत्यधिक मांग है. लेकिन हमें और आगे बढ़ना है. इसलिए हमारा लक्ष्य है समृद्ध किसान और विकसित खेती.

Agricultural Machinery

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा कि उत्पादन बढ़ाने और उत्पादन की लागत कम करने जैसे दो काम हमें एक साथ ले कर चलने होंगे. उत्पादन बढ़ाने के लिए अच्छे बीज जरूरी हैं, जिस के लिए उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों को बदलती जलवायु के अनुसार अधिक तापमान सहनशीलता वाले बीज विकसित करने का निर्देश दिया.

उन्होंने कहा कि शोध आधारित जलवायु अनुकूल खेती की दिशा में हमें आगे बढ़ना होगा. खेती के लिए अब आधुनिकतम तकनीकों और पद्धतियों को अपनाना होगा. इस से उत्पादन भी बढ़ेगा और श्रम लागत भी घटेगी. साथ ही, कटाई के साथसाथ रोपाई भी अब मशीनों से हो सकती है. अब बहुउद्देशीय हार्वेस्टर (फसल कटाई मशीन) उपलब्ध है, जिस से किसानों को लागत और श्रम की बचत में काफी लाभ हो रहा है.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि के माहौल को बदलना है तो हमें ठोस कदम उठाने होंगे. साथ ही, समस्याओं का समाधान निकालना होगा. हमारे नवाचारों से निर्मित मशीनें आज देश के साथसाथ विदेशों के लिए भी कारगर सिद्ध हो रही है. उन्होंने बताया कि हाल ही में, मैं ब्राजील यात्रा पर गया था. वहां भी आधुनिक यंत्रों का कृषि में इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन भारत और विदेश की खेती की स्थितियों में काफी अंतर है. हमारे देश के किसानों के खेत का क्षेत्रफल दुनिया के अन्य किसानों के खेतों के क्षेत्रफल की तुलना में काफी कम है.

इसलिए हमें दुनिया को कृषि यंत्र निर्यात करने की दिशा में भी काम करना होगा. जिस के लिए राज्य सरकारों को भी मिल कर काम करना होगा. हमें विदेशों की जरूरत के अनुसार निर्यात के लिए कृषि यंत्र बनाने चाहिए और साथ ही अपने देश के छोटी जोत वाले किसानों के लिए भी कृषि यंत्र बनाने पर जोर देना होगा. साथ ही, यह ध्यान रखना होगा कि इन यंत्रों की कीमत भी ऐसी होनी चाहिए जिसे हमारे किसान बिना आर्थिक दबाव के खरीद सकें.

इस के साथ ही, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सब्सिडी पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि सब्सिडी उन्हें ही मिलनी चाहिए जो असल में उस के हकदार हैं. साथ ही, उन्होंने कहा कि मशीनीकरण को ले कर विस्तार से चर्चा की जाएगी. उद्योग जगत के लोगों से भी मिल कर इसे नई दिशा देने का काम किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि वैश्विक स्पर्धा करने लायक कृषि यंत्रों का अब हमारे अपने देश में निर्माण हो रहा है. खेती की हर समस्या का समाधान किसान भाइयोंबहनों से बातचीत के बाद ही तय किया जाएगा, ताकि भारत आगे बढ़ सके और हम दुनिया को नई दिशा दिखा सकें.

Happy Seeder : बहुउपयोगी हैप्पी सीडर यंत्र – खेती में लागत करे कम

हैप्पी सीडर (Happy Seeder) मशीन एक बहुउपयोगी कृषि यंत्र है, जो फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों का प्रबंधन करते हुए बिना खेत को जोते, अगली फसल बोने में मदद करता है. इस कृषि यंत्र के इस्तेमाल से खेती में लागत कम लगती है, फसल उत्पादन बढ़ता है और समय के साथसाथ पर्यावरण भी ठीक रहता है. अनेक कृषि यंत्र निर्माता इस तरह के कृषि यंत्र बना रहे हैं.

खांडेवाला हैप्पी सीडर :

इस हैप्पी सीडर (Happy Seeder) का उपयोग खासकर गेहूं और सोयाबीन जैसे विभिन्न प्रकार के बीजों की बोआई के लिए किया जाता है. यह धान, गन्ना, कपास, केला, मक्का आदि की जड़ों और ठूंठ को हटाने के लिए भी उपयोगी है.

इस हैप्पी सीडर (Happy Seeder) को पराली और फसल अवशेषों को बिना जलाए जाने वाले खेत में बोने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह खेत की तैयारी के पारंपरिक तरीकों को कम करता है, जिस से खेती में लगने वाली लागत कमी आती है.

पराली का समाधान करता है :

हैप्पी सीडर (Happy Seeder) मशीन फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों (नरवाई) को प्रबंधित करने में मदद करती है और उन्हें मिट्टी में मिलाने या मल्च के रूप में उपयोग करने में मदद करती है.

लागत में कमी लाता है यह यंत्र :

यह खेत की तैयारी के पारंपरिक तरीकों को कम करता है, जिस से बोआई की लागत कम हो जाती है
और यह खेत की मिट्टी में नमी बनाए रखता है, जिस से सिंचाई की जरूरत कम हो जाती है.

यह खरपतवारों पर नियंत्रण करने का काम करता है और खेत की मिट्टी के कटाव को रोकता है. श्रम और समय की बचत कर फसल उत्पादन में वृद्धि करता है.

पर्यावरण के अनुकूल :

यह फसल अवशेषों को जलाने से बचाता है, जिस से वायु प्रदूषण कम होता है.