भाकृअनुप- भाकृअनुसं (एनआईआरएफ) : कृषि विज्ञान में उत्कृष्टता के शिखर पर

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, जिसे पूसा संस्थान और हरित क्रांति के अग्रदूत के रूप में जाना जाता है, वर्ष 2023 के लिए राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) द्वारा कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की श्रेणी के अंतर्गत की गई रैंकिंग में सर्वोच्च शिखर पर पहुंच गया है. नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) के 8वें संस्करण की घोषणा 5 जून, 2023 को भारत सरकार के विदेश और शिक्षा राज्य मंत्री डा. राजकुमार रंजन सिंह द्वारा की गई थी.

एनआईआरएफ ने लगभग 8,686 उच्च शिक्षा संस्थानों की रैंकिंग जारी की, जिन्होनें रैंकिंग कवायद में भाग लिया. पूर्व में 4 श्रेणियां और 7 विषय क्षेत्र थे. कृषि और संबद्ध क्षेत्र को पहली बार एक विषय क्षेत्र के रूप में जोड़ा गया है.

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार में उत्कृष्टता के लिए अपनी प्रतिबद्धता को जारी रखा है. संस्थान पहले से ही एक वैश्विक विश्वविद्यालय के रूप में विकसित होने के मार्ग पर चल पड़ा है. इस ने कृषि, सामुदायिक विज्ञान, बी. टैक (इंजीनियरिंग) और बी. टैक (जैव प्रौद्योगिकी) के 4 विषयों में स्नातक कार्यक्रम शुरू किए हैं. नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप व्यावसायिक शिक्षा पर जोर देने के लिए कई डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू करने की योजना है.

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के संकाय की कड़ी मेहनत और प्रतिभा के अलावा संस्थान के निदेशक और कुलपति डा. अशोक कुमार सिंह की योजना और मार्गदर्शन, और अधिष्ठाता और संयुक्त निदेशक (शिक्षा) डा. अनुपमा सिंह एवं सहअधिष्ठाता डा. अतुल कुमार के समर्पित प्रयासों से संस्थान को रैंकिंग में पहला स्थान प्राप्त करने में सफलता मिली है. संस्थान भाकृअनुप के महानिदेशक एवं सचिव डेयर, डा. हिमांशु पाठक के साथसाथ उपमहानिदेशक (शिक्षा), डा. आरसी अग्रवाल और उपमहानिदेशक (फसल विज्ञान), डा. टीआर शर्मा को उन के प्रेरणा, समर्थन और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करता है.

डा. राजकुमार रंजन सिंह, विदेश और शिक्षा राज्यमंत्री, भारत सरकार ने भाकृअनुसं को पुरस्कार प्रदान किया.

उत्तर प्रदेश में मत्स्य विभाग की योजनाओं के लिए आवेदन शुरू

लखनऊ : मछुआ समाज व बेरोजगार युवाओं के लिए उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग द्वारा तमाम तरह की अनुदान योजनाएं चलाई जा जा रही हैं, जिस के लिए आवेदक को उत्तर प्रदेश के मत्स्य विभाग के पोर्टल से औनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है. मत्स्य विभाग की तरफ से विभागीय योजनाओं के लिए लाभार्थियों के आवेदन की तारीख तय हो गई है. कोई भी व्यक्ति जो विभाग के अनुदान योजनाओं का लाभ लेना चाहता है, वह 30 मई, 2023 से विभागीय पोर्टल वैबसाइट http://fisheries.up.gov.in पर औनलाइन आवेदन कर सकता है.

इन योजनाओं में मिलेगा सहायता अनुदान

विभाग के औनलाइन पोर्टल का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मत्स्य विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री डा. संजय कुमार निषाद द्वारा किया गया.

इस अवसर पर उन्होंने मत्स्य विकास से संबंधित कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत निजी भूमि पर तालाब बनाने, मत्स्य बीज हैचरी बनाने, बायोफ्लाक पौंड, रियरिंग तालाब बनाने, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम, इंसुलेटेड व्हीकल्स, मोटरसाइकिल विद आइसबौक्स, थ्रीव्हीलर विद आइसबौक्स, साइकिल विद आइसबौक्स, जिंदा मछली विक्रय केंद्र, मत्स्य आहार प्लांट, मत्स्य आहार मिल, केज संवर्धन, पेन संवर्धन, सजावटी मछली रियरिंग यूनिट, कियोस्क निर्माण, शीतगृह निर्माण, मनोरंजन मात्स्यिकी, डाइग्नोस्टिक मोबाइल लैब, मत्स्य सेवा केंद्र एवं सामूहिक दुर्घटना बीमा सहित कुल 30 योजनाओं के लिए औनलाइन आवेदन 30 मई से 15 जून, 2023 तक आमंत्रित किया जा सकेगा.

मछलीपालन पर होगा जोर

मंत्री डा. संजय निषाद ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त (अल्ट्रामौडर्न) फिश मार्केट की स्थापना की जा रही है. वर्तमान में जनपद चंदौली में अल्ट्रामौडर्न फिश मंडी निर्माणाधीन है.

उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मात्स्यिकी सैक्टर के संगठित विकास के लिए केंद्र प्रायोजित परियोजना के अंतर्गत जनपद गोरखपुर एवं मथुरा में इंटीग्रेटेड एक्वापार्क बनाए जाने की परियोजना का प्रावधान हैं, जिस की लागत प्रति इकाई सौ करोड़ रुपए है. वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए जनपद गोरखपुर एवं मथुरा में इंटीग्रेटेड एक्वापार्क की स्थापना का प्रस्ताव राज्य स्तरीय अनुश्रवण एवं अनुमोदित समिति द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है.

एक ट्रिलियन इकोनौमी में मत्स्य विभाग का होगा महत्वपूर्ण योगदान

मंत्री डा. संजय निषाद ने बताया कि उत्तर प्रदेश की एक ट्रिलियन इकोनौमी में मत्स्य विभाग का महत्वपूर्ण योगदान होगा. योजना की शुरुआत से ले कर अब तक 18,951.20 लाख रुपए का अनुदान लाभार्थियों को वितरित किया गया है. योजना के तहत 1,794 (क्षेत्रफल 1386.12 हेक्टेयर) निजी भूमि पर तालाबों, 59 (क्षेत्रफल 73.21 हेक्टेयर) खारे भूमि पर तालाबों, 176 (क्षेत्रफल 165.632 हेक्टेयर) रियरिंग यूनिट, 661 बायोफ्लाक, 32 मत्स्य बीज उत्पादन हैचरी, 660 रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम, 19 इंसुलेटेड व्हीकल्स एवं मोबाइल लैब, 143 मोटरसाइकिल विद आइसबौक्स, 50 थ्रीव्हीलर विद आइसबौक्स, 1379 साइकिल विद आइसबौक्स, 34 जिंदा मछली विक्रय केंद्र, 45 मत्स्य आहार मिल, 29 कियोस्क, 1 बैकयार्ड आर्नामेंटल फिश रियरिंग यूनिट, 85 केज सहित कुल 6904 परियोजनाएं पूरी कराई गईं, जिस की कुल परियोजना लागत 33173.0425 लाख रुपए है. 11513 परियोजनाओं का कार्य प्रगति पर है, जिस की कुल परियोजना लागत 32050.517 लाख रुपए है.

मत्स्य विकास मंत्री डा. संजय निषाद ने कहा कि रिवर रैचिंग कार्यक्रम के तहत नदियों में मत्स्य संरक्षण के लिए 188.15 लाख बड़े आकार के मत्स्य बीज (मत्स्य अंगुलिकाएं) गंगा नदी प्रणाली में बहाई जा चुकी है, जिस पर 488.90 लाख रुपए की धनराशि खर्च हुई.

उन्होंने आगे कहा कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के साथ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत 107015.42 लाख रुपए की कार्ययोजना का अनुमोदन राज्य स्तरीय अनुमोदन एवं अनुश्रवण समिति से प्राप्त करते हुए उक्त कार्ययोजना का अनुमोदन राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड को प्रेषित करते हुए भारत सरकार से 44260.63 लाख रुपए का केंद्रांश अवमुक्त किए जाने के लिए अनुरोध किया गया है, जबकि सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत अब तक 102840 मछुआरों/मत्स्यपालकों को आच्छादित किया गया है.

डा. संजय निषाद ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत ग्राम समाज के पट्टे पर आवंटित तालाबों में मत्स्यपालन हेतु निवेश और मत्स्य बीज बैंक की स्थापना हेतु सुविधा प्रदान की जा रही है. परियोजना की इकाई लागत 4 लाख रुपए पर 40 फीसदी 1.60 लाख रुपए का अनुदान दिया जा रहा है.

उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत अब तक 849.78 लाख रुपए का अनुदान 648 लाभार्थियों को दिया गया है, जिस से 612.50 हेक्टेयर जलक्षेत्रों में मत्स्यपालन हेतु निवेश के लिए अनुदान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 में 10.00 करोड़ का बजट प्रावधान कराया गया है, जिस के अंतर्गत 625 हेक्टेयर जलक्षेत्रों में मत्स्यपालन निवेश एवं मत्स्य बीज बैंक की स्थापना के लिए लगभग 700 लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा.

मछली पकड़ने के साजोसामान पर मिलेगा अनुदान

मंत्री डा. संजय निषाद ने बताया कि निषादराज बोट सब्सिडी योजना के अंतर्गत मत्स्यपालकों/मछुआरों को मछली पकड़ने एवं नौकायन हेतु नाव, जाल, लाइफ जैकेट, आइसबौक्स आदि क्रय करने की सुविधा प्रदान करने हेतु आवेदनपत्र लिया जा रहा है. योजना की इकाई लागत 67,000 रुपए पर 40 फीसदी 26,800 रुपए का अनुदान दिया जाएगा. वित्तीय वर्ष 2023-24 में 5.00 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान कराया गया है, जिस के अंतर्गत नाव, जाल आदि खरीदने के लिए 1865 मछुआरों को लाभान्वित किया जाएगा.

ट्रेनिंग के साथ मिलेगी सुरक्षा

मत्स्य मंत्री डा. संजय निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश मत्स्य पालक कल्याण कोष के अंतर्गत मत्स्यपालकों/मछुआरों के आर्थिक/सामाजिक उत्थान एवं स्वरोजगार हेतु मत्स्यपालक/मछुआरा बाहुल्य ग्रामों में अवसंरचनात्मक सुविधाओं का निर्माण, दैवीय आपदाओं से हुई किसी क्षति में वित्तीय सहायता, चिकित्सा सहायता, मछुआ आवास निर्माण सहायता, मत्स्यपालकों एवं मछुआरों के प्रशिक्षण, महिला सशक्तिकरण सहित कुल 6 योजनाएं चलाई जा रही हैं. योजना में वित्तीय वर्ष 2023-24 में 25 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान कराया गया है. योजना के अंतर्गत सामुदायिक भवन निर्माण, मछुआ आवास निर्माण, दैवीय आपदा में चिकित्सा सहायता, प्रशिक्षण एवं महिला सशक्तिकरण के माध्यम से मत्स्यपालकों एवं मछुआरों को लाभान्वित किया जाएगा.

मछुआरों को बिना जमानत के मिलेगा बैंक ऋण

इस अवसर पर मत्स्य विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. रजनीश दुबे ने बताया कि मंत्री डा. संजय कुमार निषाद के दिशानिर्देशन में मत्स्य विकास विभाग द्वारा मत्स्यपालकों एवं मत्स्य गतिविधियों में लगे हुए व्यक्तियों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है. बैंकों के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दिलाई जा रही है, जिस के अंतर्गत 1.60 लाख रुपए तक का बैंक ऋण बिना किसी जमानत के दिया जाता है. अब तक 13,788 मत्स्यपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराया गया है.

कार्यक्रम में मत्स्य विकास विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक प्रशांत शर्मा ने मत्स्य विभाग की उपलब्धियों एवं आगामी योजनाओं के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मत्स्यपालकों और मत्स्य गतिविधियों से जुड़े लोगों को विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए विभाग द्वारा हर संभव काम किया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में मशरूम प्रशिक्षण केंद्र

बस्ती : उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में उद्यान विभाग के औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में स्थित मशरूम प्रशिक्षण इकाई द्वारा साल 2023 के लिए ट्रेनिंग शेड्यूल जारी कर दिया गया है. इस के जरीए बेरोजगार नौजवानों को मशरूम उत्पादन से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक जानकारियां प्रदान की जाएगी. इस केंद्र पर बस्ती जिले के अलावा प्रदेश के किसी भी जनपद के प्रतिभागी ट्रेनिंग में हिस्सा ले सकते हैं.

मशरूम प्रशिक्षण इकाई के प्रभारी विवेक ने बताया कि वर्तमान वर्ष 2023-24 में औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र, बस्ती में मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम की तिथियां निर्धारित की गई हैं.

उन्होंने यह भी बताया है कि मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम 6 जून से 8 जून, 11 सितंबर से 13 सितंबर, 10 अक्तूबर से 12 अक्तूबर, 16 नवंबर से 18 नवंबर एवं 12 दिसंबर से 14 दिसंबर तक तीनदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम होना है.

उन्होंने आगे बताया कि दूरदराज के प्रशिक्षणार्थियों के लिए कृषक छात्रावास में एकसाथ 25 किसानों के ठहरने की निःशुल्क व्यवस्था है. परंतु भोजनबोर्डिंग एवं जलपान की व्यवस्था प्रशिक्षणार्थियों को स्वयं करना होगा.

उन्होंने जानकारी देते हुए यह भी बताया कि प्रत्येक प्रशिक्षण सत्र के लिए प्रति प्रशिक्षणार्थी 50 रुपए पंजीकरण शुल्क भी जमा करना होगा.

इस प्रशिक्षण में शामिल होने वाले लोगों को मशरूम की विभिन्न प्रजातियों को मौसम के अनुसार उगाने के बारे में विस्तृत ट्रेनिंग दी जाएगी. इसी के साथ प्रशिक्षणार्थियों को न केवल मशरूम उत्पाद बनाने व उस के विपणन की भी जानकारी दी जाएगी. इस टेनिंग में अलगअलग तापमान के अनुसार विभिन्न प्रजातियों का चयन कर वर्षभर उत्पादन लेने की तकनीकी भी बताई जाएगी, जिस में बटन मशरूम, दूधिया या पराली मशरूम के उत्पादन के सभी विधियों पर जानकारी दी जाएगी.

मशरूम प्रभारी विवेक ने बताया कि इस केंद्र से बटन, ढिंगरी व दूधिया प्रजाति के मशरूम स्पान तैयार कर शासकीय दर पर उत्पादकों को दिए जाते हैं. ट्रेनिंग से जुड़ी विशेष जानकारी या आवेदन के लिए कार्यालय संयुक्त निदेशक, औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र, बस्ती के टेलीफोन नंबर 05542-246843 या मशरूम प्रभारी विवेक के मोबाइल नंबर 8840536039 पर संपर्क किया जा सकता है.

छात्रहितधारक संवाद आर्थिक निर्भरता का आधार स्तंभ : डा. मीनू श्रीवास्तव

उदयपुर : 29 मई 2023. महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्विद्यालय के संघटक सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय के प्लेसमेंट सेल एंड इनफार्मेशन ब्यूरो द्वारा प्लेसमेंट और फैलोशिप संबंधी उपलब्ध संस्थानों/संस्थाओं के आमुखीकरण के उद्देश्य से छात्रहितधारक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया. स्वागत करते हुए महविद्यालय की अधिष्ठाता डा. मीनू श्रीवास्तव ने कहा कि हितधारक निर्णयों को सूचित करने में मदद करते हैं, जो दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करते हैं. विशेष रूप से, हितधारक छात्रछात्राओं को सशक्त बनाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में लैस करने में मददगार होते हैं.

आयोजन सचिव डा. गायत्री तिवारी प्रोफैसर, मानव विकास एवं पारिवारिक अध्ययन विभाग व इंचार्ज, प्लेसमेंट सेल एंड इनफार्मेशन ब्यूरो ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य. प्रतिभागियों को सामुदायिक सेवा के कामों से संबंधित रोजगार, फैलोशिप और इंटर्नशिप के विषय में आमुखीकरण करना था.

उन्होंने आगे बताया कि बदलते दौर में रोजगार के प्रकार में बहुत सा बदलाव आया है. समय आ गया है कि नई पीढ़ी को सेवा साधक के स्थान पर सेवा प्रदाता के रूप में तैयार किया जाए. सामुदायिक और व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय होने के कारण से ये ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है कि नौजवानों को इस दिशा में सबल किया जाए.

इस अवसर पर 2 सत्रों का_ आयोजन किया गया. पहले सत्र में जतन संस्थान के प्रोग्राम मैनेजर मनीष और दिव्यांशु पाठक और ब्लौक कोआर्डिनेटर, हर्ष शर्मा द्वारा पावरप्वाइंट के माध्यम से स्टूडेंट्स मोबिलाइजेशन इनिशिएटिव फौर लर्निंग थ्रू एक्सपोजर (स्माइल) की जानकारी दी गई, जिस में स्माइल और यूथ अड्डा की आवश्यकता, महत्व, उद्देश्यों के साथ ही कार्यक्रम के दौरान दिए जाने वाले प्लेसमेंट और फैलोशिप के विषय में विस्तार से चर्चा की गई.

दूसरे सत्र में बेसिक हेल्थ सर्विसेज (बीएचएस) की डा. संजना मोहन, न्युट्रिशन प्रोग्राम मैनेजर और न्युट्रिशन डायरैक्टर डा. नूपुर आडी ने बताया कि यह एक गैरलाभकारी संगठन है, जो समुदाय में निहित एक उत्तरदायी, सहानुभूतिपूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य ‘देखभाल का चक्र’ प्रदान करता है. उत्तरदायी प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और पोषण सेवाओं के नेटवर्क के माध्यम से बीएचएस सब से कमजोर समुदायों तक पहुंचता है. बीएचएस मानव संसाधन और प्रौद्योगिकी में नवाचारों के संयोजन का उपयोग करते हुए निवारक, प्रोत्साहक और उपचारात्मक देखभाल की निरंतरता प्रदान करता है.

सत्र में प्रतिभागियों को संस्था द्वारा की जा रही विविध गतिविधियों में वालंटियर की आवश्यकता और जिम्मेदारियां, संभावित भावी रोजगार से अवगत कराया गया.

इस अवसर पर डा. विशाखा सिंह, विभागाध्यक्ष, आहार विज्ञान व पोषण विभाग, डा. सुमित्रा मीणा, डा. कीर्ति खुराना, फिजिशियन, डा. मयंक खुराना, फिजियोथेरेपिस्ट, डा. दशरथ चुंडावत, कम्युनिटी कोआर्डिनेटर, संजय चित्तौड़ा, आद्या झा, इंडिया फैलो की सक्रिय भागीदारी रही.

प्रश्नोत्तरी सत्र में प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया गया. संचालन और संयोजन यंग प्रोफैशनल डा. स्नेहा जैन ने किया.

आयकार्ट और यूबीएफसी साझेदारी : भारत की खाद्य और कृषि मूल्य श्रृंखला में विकास

मुंबई : 26 मई, 2023. खाद्य और कृषि मूल्य श्रृंखला में भारत के पहले इंटीग्रेटेड टैक प्लेटफार्म आयकार्ट और यूबीएफसी (उन्नयन भारत फाइनेंस कारपोरेशन) ने टैक्नोलौजी और फाइनेंस के साथ खाद्य और कृषि मूल्य श्रृंखला को सशक्त बनाने के लिए साझेदारी करने की योजना के बारे में घोषणा की है. दोनों कंपनियों के संबंधित प्रबंधन ने विनियामक अनुमोदन के अधीन आयकार्ट द्वारा यूबीएफसी में बहुमत हिस्सेदारी के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है.

आयकार्ट को बाजार पहुंच की पेशकश करने, कृषि मूल्य श्रृंखला को डिजिटाइज करने और व्यापार ऋण प्रदान करने के लिए जाना जाता है. वहीं यूबीएफसी भी डेरी मूल्य श्रृंखला में काम करता है. जिन के पास पशु हैं, उन उधारकर्ताओं को छोटे लोन प्रदान करता है.

आयकार्ट और यूबीएफसी की संयुक्त ताकत खाद्य और कृषि मूल्य श्रृंखला के लिए एक अधिक न्यायसंगत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद करेगी. बेहतर बाजार पहुंच, उन्नत तकनीक एवं खाद्य और कृषि क्षेत्र में शामिल समुदायों को सरल तरीके से वित्त पोषण प्रदान करेगी.

“यूबीएफसी के साथ साझेदारी करने और समग्र खाद्य और आपूर्ति पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने से खुश हूं,” आयकार्ट के संस्थापक और सीईओ देबर्शी दत्ता ने कहा, “आयकार्ट में हमारा दृष्टिकोण वित्त, प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से कृषि मूल्य श्रृंखला में पारंपरिक व्यवसायों को मजबूत करना है. हम यूबीएफसी के साथ इस साझेदारी को ले कर उत्साहित हैं, जो हमें MSMEs और FPOs को सक्षम करने के लिए हमारे प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा, जो भारत की मजबूत कहानी के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं.”

दोनों कंपनियां साथसाथ मिल कर प्रौद्योगिकी और वित्त के साथ खाद्य और कृषि मूल्य श्रृंखला को सक्षम करने के लिए अपनी विशेषज्ञता का फायदा उठाएंगी, जिस से व्यवसायों के लिए बाजारों तक पहुंच बनाना, उन के संचालन को बढ़ाना, आय में वृद्धि करना और अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने में आसानी होगी.

भविष्य में आयकार्ट के सहयोग से यूबीएफसी के सहसंस्थापक अवनीश त्रिवेदी ने कहा, “यूबीएफसी ने हमेशा छोटे शहरों और शहरों में सूक्ष्म और नैनो व्यवसायों की समस्याओं का समाधान करने के लिए एक फिजिटल मौडल के माध्यम से अधिक गतिशील दृष्टिकोण अपनाने का लक्ष्य रखा है. हम ने पूरे देश में छोटे व्यवसायों की जरूरतों को पूरा करने के लिए समान भौगोलिक क्षेत्रों में संचालन करने वाले आयकार्ट के साथ तालमेल पाया. यह साझेदारी हमें पारस्परिक उद्देश्यों को पूरा करने में मदद करेगी.”

दोनों कंपनियों के बीच यह रणनीतिक अधिग्रहण उन की विकास सीढ़ी को बढ़ाने में मदद करेगा और उन की विशेषज्ञता और सेवाओं के साथ ही उन के खाद्य और कृषि मूल्य श्रृंखला व्यवसाय को बढ़ाने में एकदूसरे की सहायता करेगा.

जलवायु परिवर्तन पर एनएआरएस वैज्ञानिकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला

नई दिल्ली : 22 मई से 26 मई, 2023 तक बायोवर्सिटी इंटरनेशनल-सीआईएआरटी ग्लोबल एलायंस के सहयोग से आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा ‘बदलती जलवायु के तहत कृषि प्रबंधन के लिए फसल सिमुलेशन मौडलिंग’ पर पांचदिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया.

डा. राजवीर सिंह, सहायक महानिदेशक (कृषि, कृषि वानिकी और जलवायु परिवर्तन) ने 22 मई को कार्यक्रम का उद्घाटन किया और उन्होंने कृषि जोखिमों के प्रबंधन के लिए सिमुलेशन मौडलिंग के विज्ञान में क्षमता निर्माण के महत्व पर जोर दिया. विशेष रूप से बढ़ते जलवायु जोखिमों और संबंधित उत्पादकता नुकसान के वर्तमान और भविष्य के समय में जानकारी साझा की.

उन्होंने कृषि उत्पादकता और लाभप्रदता के समग्र सुधार के लिए प्रणाली की समझ की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने भारत के विभिन्न राज्यों से आने वाले प्रतिभागियों पर प्रसन्नता व्यक्त की और भारतीय कृषि से जीएचजी उत्सर्जन पर सिमुलेशन मौडलिंग और जलवायु परिवर्तन प्रभाव, अनुकूलन आकलन और आकलन में वैश्विक मान्यता और राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए पर्यावरण विज्ञान विभाग को बधाई दी.

इस से पहले अपने स्वागत भाषण में प्रो. सूरा नरेश कुमार, प्रमुख, पर्यावरण विज्ञान विभाग, आईएआरआई ने कृषि प्रबंधन और सामाजिक लाभ में प्रौद्योगिकी के उपयोग की आवश्यकता और अवसरों पर जोर दिया.

डा. जय राणा, देश के प्रतिनिधि, ग्लोबल एलायंस ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण-जीईएफ परियोजना “कृषि जैव विविधता को मुख्यधारा में लाना और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को सुनिश्चित करने और भेद्यता को कम करने के लिए कृषि क्षेत्र में उपयोग” के बारे में विवरण दिया.

इसी प्रोजैक्ट के तहत यह वर्कशाप आयोजित की. प्रो. आरएन पडारिया, संयुक्त निदेशक (विस्तार) ने प्रशिक्षण के बाद सहयोगी शिक्षा के बारे में बात की, ताकि किसानों को सलाह दे कर सुधार हो सके.

उन्होंने गांवों में फसल मौडल की सहायता से प्रौद्योगिकी लक्ष्यीकरण का उदाहरण दिया, जिसे गांवों में लागू किया गया था. कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के 25 वैज्ञानिकों ने भाग लिया.

मूल्य संवर्धन विषय पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन

मसाले वाली फसलों की कटाई के उपरांत प्रबंधन एवं मूल्य संवर्धन विषय पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्यान महाविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ में शुरू किया गया.उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डा. बीआर सिंह, कुलसचिव द्वारा की गई.

इस दौरान उन्होंने कहा कि देश के अंदर मसालों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. कोरोना काल के बाद लोगों ने मसालों की तरफ ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया है, क्योंकि आयुर्वेदिक दृष्टि से यह काफी महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए जरूरी है कि इन का मूल्य संवर्धन कर के इन को बाजार में बेचा जाए. इस बात को ध्यान में रखते हुए इस प्रशिक्षण में छात्रों को प्रयोगात्मक रूप से सिखाया जाएगा.

निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट प्रो. आरएस सेंगर ने अपने संबोधन मे कहा कि देश में मसालों की मांग और उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है. इस ने कृषि के क्षेत्र में एक नए स्वरोजगार की संभावनाओं को पैदा किया है. इस के लिए जरूरी है, एक छात्र स्टार्टअप के रूप में मसालों का उत्पादन कर उस की पैकेजिंग करें और मार्केट में कंपनी बना कर खुद ही भेजें, जिस से बिचौलिए उन के बीच में नहीं होंगे और सीधा उत्पाद उपभोक्ता को मिलेगा. उस का सीधा लाभ खुद किसानों और स्टार्टअप कंपनी चलाने वालों को होगा. इस प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को इस क्षेत्र में दक्ष बनाने के लिए कई कंपनियों से रूबरू कराया गया.

उन्होंने यह भी कहा कि छात्रछात्राएं इस तरह के प्रशिक्षणों का उपयोग भविष्य में रोजगार प्राप्त करने के लिए ही नहीं करेंगे, अपितु अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कराएंगे.

डा. बीआर सिंह, कुलसचिव द्वारा कार्यक्रम के अध्यक्षीय संबोधन में कहा गया कि छात्रछात्राएं अपना लक्ष्य निर्धारित करते हुए उसे पूरा करने का संकल्प लें. वहीं डा. बिजेंद्र सिंह, अधिष्ठाता उद्यान महाविद्यालय ने बताया कि 5 दिवसीय प्रशिक्षण में सभी मसाले वाली फसलों में मूल्य संवर्धन की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी.

डा. सत्य प्रकाश कोर्स डायरेक्टर द्वारा बताया गया कि मसाले वाली फसलों के मूल्य संवर्धन का मकसद यह है कि जब फसलों की कटाई होती है, बाजार मूल्य कम होता है, परन्तु मूल्य संवर्धन कर के उन के मूल्य मे 4 से 5 गुना बढ़ोतरी की जा सकती है.

उद्घाटन सत्र के बाद डा. मनोज कुमार सिंह, सहप्राध्यापक उद्यान द्वारा लहसुन की उत्पादन तकनीकी इ. सुरेश चंद्रा, सहप्राध्यापक (पो. हा.) द्वारा लहसुन के मूल्य संवर्धन पर प्रशिक्षण देते हुए विभिन्न उत्पाद तैयार कराए गए.

डा. पूजा, वैज्ञानिक, केवीके द्वारा लहसुन के अचार एवं अन्य उत्पाद भी तैयार कराए गए, वहीं डा. विपिन कुमार, सहप्राध्यापक द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया गया.

डीएपी एवं यूरिया के दाम नहीं बढ़ेंगे

खेती में विभिन्न फसलों के उत्पादन में उर्वरकों का उपयोग तब होता है, जब भूमि में पोषक तत्वों की कमी हो और उस की पूर्ति की आवश्यकता होती हो. उर्वरकों के महंगे होने से फसल उत्पादन की लागत बढ़ जाती है, जिस से किसानों को काफी नुकसान भी होता है. इसलिए सरकार द्वारा उर्वरकों पर भारी सब्सिडी दी जाती है, जिस से किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ न पड़े.

इस वर्ष भी केंद्र सरकार ने किसानों को उचित दामों पर यूरिया और अन्य खादों की पोषक तत्व आधारित सब्सिडी प्रदान करने की मंजूरी दी है.

उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी

जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रबी मौसम 2022-23 (01.01.2023 से 31.03.2023 तक) के लिए उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इस प्रस्ताव में विभिन्न पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर के लिए सब्सिडी (एनबीएस) दरों में संशोधन शामिल है.

इस के अलावा खरीफ मौसम (1 अप्रैल, 2023 से 30 सितंबर, 2023 तक) के लिए फास्फेट और पोटाश उर्वरकों के लिए भी अनुमोदित एनबीएस दरें मंजूर की गई हैं.

किसानों के लिए यह नया फैसला खेती सेक्टर को बढ़ावा देने और किसानों को सहायता प्रदान करने का एक खास कदम है.

38,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी

खरीफ सीजन 2023 के दौरान, केंद्र सरकार ने किसानों के लिए 38,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी देने का फैसला लिया है. इस फैसले के माध्यम से खरीफ सीजन में किसानों को डीएपी और अन्य उर्वरकों की सही मूल्य पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी और उर्वरकों पर सब्सिडी का युक्तीकरण भी होगा. सरकार के इस कदम से किसानों को आर्थिक रूप से बल मिलेगा. इस से किसानों को आर्थिक रूप से सही कीमतों पर फास्फेटिक और पोटाश उर्वरकों के 25 ग्रेड का उपयोग करने की सुविधा मिलेगी.

यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ प्रदान करेगा और उन की खेती को सुरक्षित बनाए रखेगा.

डीएपी खाद की कीमत में परिवर्तन नहीं

आने वाले खरीफ सीजन में यूरिया और डीएपी खाद की कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होगा, क्योंकि सरकार द्वारा पोषक तत्व आधारित सब्सिडी को मंजूरी दी जा चुकी है.

वर्तमान में देश में नीम लेपित यूरिया की एक बोरी कीमत 266.50 रुपए है, जबकि डीएपी की एक बोरी की कीमत 1,350 रुपए है.

इसलिए, किसानों को आगामी खरीफ सीजन (1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2023) के दौरान यूरिया और डीएपी खाद इसी कीमत पर ही मिलेगा. इस से किसानों को आर्थिक रूप से सुविधा मिलेगी.

महिला किसानों के लिए खेती में और्गोनौमिक तकनीकों के जरीए प्रशिक्षण

अखिल भारतीय समन्वित कृषिरत महिला अनुसंधान परियोजनाए, भाकृअप, कृषिरत महिला संस्थान, भुवनेश्वर अनुसंधान निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के तत्वावधान में कृषि क्रियाओं में श्रमसाध्य विकल्पों के लिए क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण 17 मई और 18 मई को गोमाना गांव, ब्लौक छोटी सादडी, जिला प्रतापगढ़, राजस्थान में संपन्न हुआ. गोमाना व मालवदा गांव की कुल 30 महिलाओं को कृषि व घरेलू कार्यों में श्रमसाध्य उपकरणों का प्रशिक्षण दिया गया.

प्रशिक्षण के पहले दिन डा. हेमू राठौड़ ने समय व श्रम से बचने वाले वीमेन फ्रेंडली उपकरणों के बारे में बताया और उन के प्रयोग की जानकारी दी, जिस में दूध दोहने की बालटी व चौकी, सब्जी काटने का यंत्र, बहुपयोगी झोला, मक्की छीलक यंत्र, पौध रोपाई यंत्र, आराम सीट आदि कृषि यंत्र शामिल थे.

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के कृषि यंत्रों का प्रयोग करने के फायदे और काम में लेने के तरीके पर भी विस्तृत जानकारी दी गई.

कार्यक्रम के दूसरे दिन महिलाओं को मूंगफली छीलक यंत्र, अफीम के फल में चीरा डालने का यंत्र व अन्य यंत्रों के प्रयोग के बारे में भी बताया गया.

प्रशिक्षण में विभिन्न कृषि गतिविधियों, उपयोग की जाने वाली विभिन्न मुद्राओं और स्वास्थ्य पर इस के प्रभाव पर भी ध्यान केंद्रित किया गया.

प्रशिक्षण में महिलाओं के समूह को मानवीय तरीके से खेतों पर काम करने और मशीनों के संचालन के दौरान स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में बताया गया.

प्रशिक्षुओं को मूंगफली का डेकार्टिकेटर (छीलक यंत्र) पसंद आया. आधे घंटे में ललिता देवी और अन्य महिलाओं ने 35 किलोग्राम मूंगफली को छील लिया.

कार्यक्रम के दौरान डा. हेमू राठौड़ ने स्वच्छ जल की उपयोगिता एवं जल को पीने योग्य बनाने के लिए अलगअलग तरीकों के बारे में जानकारी दी.

चारू नागर ने उन्हें अपने आहार में बाजरा व अन्य मोटे अनाज को शामिल करने के महत्व के बारे में बताया और कहा कि इन्हें सुपरफूड क्यों कहा जाता है. उन्होंने महिलाओं को व्यक्तिगत स्वास्थ्य व स्वच्छता के बारे में भी बताया और कृषि क्षेत्र के किसानों को संबंधित खतरों के बारे में जागरूक किया गया.

सत्र के अंत में आयोजित समारोह में मौजूद अधिकारियों में मुख्य अतिथि कपिल देव, जिला प्रबंधक आजीविका, संजय दखानी, जिला प्रबंधक आजीविका, दीपक जैन, ब्लौक परियोजना प्रबंधन, एवं निर्मला माली, क्लस्टर प्रभारी, अंबावली उपस्थित थे.

मुख्य अतिथि कपिल देव ने कार्यक्रम का अवलोकन करते हुए महिलाओं को उन्नत तकनीकों व उपकरणों के उपयोग में उन के लाभों से सभी महिलाओ को अवगत किया. वहीं संजय दखानी ने महिलाओं के कृषि कार्यों में मेहनत पर प्रकाश डाला एवं उन को समझाया कि इन तकनीकों को अपनाने से समय व श्रम की बचत की जा सकती है. वहां उपस्थित महिलाओं को मुख्य अतिथि कपिल देव व दीपक द्वारा किट वितरित किए गए. महिलाओं में उत्साह का वातावरण रहा और सभी ने कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. वहां उपस्थित सभी लोगों ने उपकरणों को इस्तेमाल करने की बात कही. चारू नागर यंग प्रोफैशनल ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया.

चावल के विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए डा. एके सिंह सम्मानित

 

डा. अशोक कुमार सिंह, निदेशक और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के कुलपति को प्रगतिशील किसान संघ, संगरूर द्वारा 14 मई, 2023 को चावल के विकास के माध्यम से बासमती के गुणवत्ता उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने में उन के उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया.

कई महत्वपूर्ण किस्में हुईं लोकप्रिय

इस अवसर पर बोलते हुए डा. एके सिंह ने कहा कि पूसा संस्थान द्वारा विकसित बासमती चावल की नई किस्मों, जैसे पीबी-1847, पीबी-1885 और पीबी-1886 से किसानों को लाभ होने और उन की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है.

पद्म पुरस्कार विजेता किसान सेठपाल सिंह ने किसानों के कल्याण में आईएआरआई के योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने समारोह में सभी किसानों से पर्यावरण संरक्षण के साथसाथ उत्पादन और आय बढ़ाने के लिए लगातार नएनए तरीकों और किस्मों को अपनाने का आह्वान किया.

200 किसानों के साथ, सुखमिंदर सिंह भट्टल (अध्यक्ष, पीएफए), सुखजीत सिंह भंगू (सचिव, पीएफए), दर्शन सिंह नेनेवाल (भारती किसान मोरचा इकाई, पंजाब). जसविंदर सिंह ग्रेवाल, ज्वाइंट डायरेक्टर कृषि विभाग, पंजाब, डा. जगमोहन सिंह, परहत सिंह (यू ट्यूबर), डा. रेनू सिंह, नरेश कुमार पात्रा, डा. दलेर सिंह, गुरमेल सिंह गहिला और हरप्रीत सिंह कमालपुर इस मौके पर मौजूद रहे.