जयपुर: मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना किसानों के लिए केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2015 में गंगानगर जिले के सूरतगढ़ से प्रारंभ की गई.

कृषि आयुक्त कन्हैया लाल स्वामी ने बताया कि सौयल हेल्थ कार्ड योजना का उद्देश्य प्रति इकाई लागत कम कर अधिक उत्पादन प्राप्ति के लिए उर्वरक सिफारिशों को अपनाने हेतु किसानों को प्रोत्साहित करना है.

इस कार्ड के माध्यम से किसानों को उन के खेत की मिट्टी के उर्वरता स्तर की सटीक जानकारी प्राप्त होती है एवं फसलों में संतुलित खाद एवं उर्वरक के उपयोग को बढ़ावा मिलता है, जिस से फसलों के उत्पादन में वृद्धि के साथसाथ अच्छी गुणवत्तायुक्त उत्पाद में वृद्धि होती है और प्रति इकाई लागत में कमी एवं किसानों की आमदनी में इजाफा होता है.

कृषि आयुक्त कन्हैया लाल स्वामी ने बताया कि सौयल हेल्थ कार्ड योजना के प्रथम चरण में सिंचित क्षेत्र में 2.5 हेक्टेयर इकाई क्षेत्र से एक नमूना एवं असिंचित क्षेत्र में 10 हेक्टेयर क्षेत्र से एक नमूना लिया गया.

वर्ष 2019-20 से राज्य की समस्त ग्राम पंचायतों के चयनित गांवों के खेतों से मिट्टी के नमूने लिए जा रहे हैं.
मृदा स्वास्थ्य कार्ड नमूना संग्रहण.

कृषि आयुक्त कन्हैया लाल स्वामी ने बताया कि वर्तमान में मिट्टी के नमूनों का संग्रहण भारत सरकार द्वारा विकसित सौयल हेल्थ कार्ड एप के माध्यम से कृषि पर्यवेक्षकों द्वारा किसानों का पंजीकरण करते हुए औनलाइन किया जा रहा है.

प्रयोगशालाओं द्वारा प्राप्त नमूनों का विश्लेषण कर सौयल हेल्थ कार्ड पोर्टल पर जांच परिणामों की प्रविष्टियां करते हुए कार्ड तैयार किए जाते हैं. यह कार्ड कृषि पर्यवेक्षकों द्वारा किसानों को उपलब्ध कराए जाते हैं.

यदि किसानों को कार्ड प्राप्त नहीं होते हैं, तो किसान भारत सरकार के सौयल हेल्थ कार्ड पोर्टल पर लौगइन कर अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्राप्त कर सकते हैं. इस योजना के तहत विकसित भारत संकल्प यात्रा में 2 लाख, 21 हजार, 299 कार्ड वितरित किए गए हैं.

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