Livestock Farming : किसान-वैज्ञानिक संगोष्ठी का उद्देश्य पशुपालकों को नवीन वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना हैं. इस कार्यक्रम में पशुपालकों (Livestock Farming) को भेड़, बकरी और खरगोश पालन से जुड़ी कम लागत में अधिक उत्पादन, नस्ल चयन, स्वास्थ्य प्रबंधन और विपणन से जुड़ी उपयोगी जानकारियां दी गईं. भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर ने विगत दिनों अपना 65वां स्थापना दिवस मनाया.
बकरी पालन से आय बढ़ाने पर विशेषज्ञों का जोर
मुख्य अतिथि डॉ. एम. के. चेटली ने बकरी पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया और पशुपालकों (Livestock Farming) को मथुरा में आयोजित बकरी मेले में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके अपनाकर पशुपालक अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं.
छोटे पशु पालन: चलता-फिरता एटीएम
डॉ. एम. के. चेटली ने वर्तमान समय मे संस्थानों एवं किसानों के जुड़ाव को मजबूत करने के लिए इस तरह के कार्यक्रम को जरूरी बताया. इसके अलावा विशिष्ट अतिथि डॉ. अनिल पुनिया एवं डॉ. विजयवीर सिंह ने किसानों द्वारा अधिकतम उत्पादन के लिए दोनों संस्थानों की आवश्यक वैज्ञानिक पद्धति अपनाने के लिए पशुपालकों (Livestock Farming) को कहा.
डॉ. अरुण कुमार तोमर ने बताया कि संस्थान राजस्थान के विभिन्न जिलों (टोंक, प्रतापगढ़, सिरोही, दौसा, बीकानेर, उदयपुर, बाड़मेर एवं अन्य जिले) एवं हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों के किसानो के लिए वैज्ञानिक पशुपालन प्रशिक्षण देता रहा है. उन्होंने कहा कि लोगो में अब छोटे पशु भेड़-बकरी एवं खरगोश पालन के प्रति रुझान बढ़ रहा है. छोटा पशु एक चलता फिरता एटीएम तथा किसी भी परिस्थिति मे पालन किया जाने वाले पशु है. उन्होंने संस्थान की अविशान को देश में मांस की मांग को पुरे करने मे अच्छा नस्ल बताया .
उन्नत नस्लों और तकनीकों की प्रदर्शनी
कार्यक्रम में सिरोही बकरी, भेड़ की उन्नत नस्लों और खरगोश पालन की प्रदर्शनी लगाई गई. इससे पशुपालकों को नस्ल सुधार, उत्पादन क्षमता और बाजार मांग की प्रत्यक्ष जानकारी मिली.
पशुपालकों का सम्मान और प्रश्न-उत्तर सत्र
स्थापना दिवस पर चयनित पशुपालकों (Livestock Farming) को सम्मानित किया गया. साथ ही प्रश्न-उत्तर सत्र में पशुपालकों की समस्याओं का समाधान कर उन्हें व्यावहारिक सुझाव दिए गए. अतिथियों द्वारा पशु स्वास्थ्य कैलेंडर, भेड़-बकरी पालन पुस्तिकाएं और संस्थान की तकनीकी उपलब्धियों से जुड़े फोल्डर का विमोचन किया गया, जिससे पशुपालकों को घर बैठे मार्गदर्शन मिलेगा.
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ एम. के. चेटली, निदेशक, केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अनिल पुनिया, निदेशक, राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र, बीकानेर एवं डॉ. विजय वीर सिंह, निदेशक, भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर, उपस्थित रहे.





