Vermicompost. पूरी दुनिया में केंचुए की तकरीबन 45 सौ वैरायटी पाई जाती हैं, लेकिन कंपोस्ट के लिए 2 वैरायटी सब से सही पाई गई हैं. इन्हें लाल केंचुआ और भूरा गुलाबी केंचुआ कहा जाता है.
केंचुआ खाद बनाने की तकनीक
केंचुआ खाद बनाने के लिए विंडोज और मोड्यूलर 2 तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. चूंकि मोड्यूलर विधि ज्यादा खर्चीली है इसलिए विंडोज विधि का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है.
केंचुए धूप सहन नहीं कर सकते इसलिए पहले 5 फुट चौड़ा व 20 फुट लंबा बांस या लकड़ी का छप्पर खड़ा करते हैं. खप्पर या पुआल से छत बना दी जाती है. इस की ऊंचाई इतनी होनी चाहिए कि इस में खड़ा हो कर आदमी आराम से पानी दे सके. इस झोंपड़ी के नीचे वर्मी कंपोस्ट तैयार किया जाता है.
जगह का चुनाव
जगह के चुनाव के लिए यह ध्यान देना चाहिए कि वहां पर बरसात का पानी इकट्ठा न हो. जैविक पदार्थ जैसे गोबर, कूड़ाकरकट, पौधों का कचरा, घासफूस, हरी पत्ती वगैरह से शीशा, पौलिथीन, पत्थर चुन लेने चाहिए. सब्जियों का कचरा, कूड़ाकरकट को गोबर के साथ मिलाने के बाद 10-15 दिन तक अलग जगह पर छोड़ दिया जाता है. गोबर व अन्य चीजों का अनुपात बराबर होना चाहिए.
कैसे करें तैयारी
सब से पहले शेड की नीचे जमीन को समतल बना कर इसे भिगो कर सड़ने वाला पदार्थ रखा जाता है. इस के बाद पहली सतह, धीरेधीरे सड़ने वाले सामान जैसे नारियल के छिलके, केले के पत्ते या छोटे टुकड़ों में कटे बांस से तैयार की जाती है. इस सतह की मोटाई 3-4 इंच होनी चाहिए. इस सतह को बेड कहा जाता है. कठिन समय में केंचुआ इसे घर के रूप में इस्तेमाल करता है.
दूसरी सतह भी 3-4 इंच मोटी होती है जो कि बेडिंग पदार्थ के ऊपर बिछाई जाती है. इस सतह में सड़े हुए गोबर का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि सड़ने के समय पदार्थ में ज्यादा गरमी पैदा न हो. अगर इस पदार्थ में नमी की कमी है, तो हर सतह में पानी का छिड़काव करना चाहिए.
दूसरी सतह के ऊपर केंचुओं को रखा जाता है. एक वर्ग मीटर जगह के लिए 250 केंचुओं की जरूरत होती है. केंचुओं को छोड़ने के बाद जल्दी ही ये दूसरी सतह के नीचे घुस जाते हैं, क्योंकि ये अपने को बाहर खुले में रखना पसंद नहीं करते हैं. छोटे टुकड़ों में कटा हुआ हरा या सूखा जैविक पदार्थ और गोबर को आधाआधा हिस्सों में मिला कर आखिरी सतह में दिया जाता है. यह सतह तकरीबन 4-5 इंच मोटी होती है.
आखिरी सतह को पूरी क्यारी की लंबाई के बराबर जूट के कपड़े से ढक दिया जाता है. पूरे ढेर को ढकना जरूरी है. जूट का फटा हुआ बोरा इस काम में इस्तेमाल किया जा सकता है. बोरे के ऊपर नियमित रूप से पानी का छिड़काव करना चाहिए. नमी 60 फीसदी बनी रहनी चाहिए.
खाद तैयार होने के बाद करें ये काम
जब केंचुआ खाद तैयार हो जाए तो इस में पानी का छिड़काव बंद कर देना चाहिए और उसे सूखने दें. इस के ऊपर से आधा सड़े हुए गोबर की एक पतली परत देनी चाहिए. सारे केंचुए उस परत में आ जाते हैं. बाद में इन केंचुओं को ऊपर की परत समेत इकट्ठा कर लेते हैं.
मोटी छलनी से छान कर केंचुओं को अलग किया जा सकता है. ऊपर के 2 स्तर केंचुआ खाद के रूप में इकट्ठा कर लेते हैं. बेड को सुरक्षित रखा जाता है और पुराने बेड के ऊपर दूसरी खेप की तैयारी फिर पहले चरण से शुरू कर देनी चाहिए. इस खाद को छाया में सुखा कर इस की नमी कम कर दी जाती है. इस से यह रहने योग्य हो जाती है. सूखने के बाद खाद को बोरे में एक साल तक के लिए रखा जा सकता है.
बरतें सावधानियां
केंचुआ खाद का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान में रखना चाहिए कि खेत में किसी तरह की केमिकल खाद या दवा का इस्तेमाल न हो.
केंचुआ खाद का इस्तेमाल करने के लिए खेत की आखिरी जुताई के समय 20-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर में केंचुआ खाद डाल कर जुताई करते हैं. बीज बोने से पहले लाइन में इसे अच्छी तरह डालें और बिचड़ा या पौधा लगाने से पहले भी खाद को अच्छी तरह डालें. मिट्टी चढ़ाने के समय भी इसे डाला जा सकता है.
निकौनी गुड़ाई के साथ केंचुआ खाद पौधों की जड़ों में डाल कर मिट्टी से ढक दी जाती है या पौधों की रोपाई और बीजों की बोआई के समय केंचुआ खाद डाल कर बोआई, रोपाई की जाती है.
बेहतर नतीजे के लिए केंचुआ खाद का इस्तेमाल करने के बाद पुआल व सूखी पत्ती की पलवार का इस्तेमाल किया जाता है.





