Sunflower: भारत में खाद्य तेलों की कमी है इसलिए खाद्य तेलों का आयात किया जाता है. इस के भुगतान के लिए हमें विदेशी पैसा देना पड़ता है.
अगर हम तिलहनी फसल, विशेष रूप से सूरजमुखी को जायद मौसम में बड़े पैमाने पर उगा कर अपने विदेशी पैसों को बचा सकते हैं, साथ ही तिलहन का उत्पादन भी बढ़ा सकते हैं. सूरजमुखी से भरपूर उपज लेने के लिए कुछ सुझाव पर अमल करना जरूरी है:
जलवायु : किसी भी फसल से भरपूर उपज लेने के लिए सब से पहले जलवायु की जरूरत होती है. इस के सफल उत्पादन के लिए शीतोष्ण जलवायु की खास जरूरत होती है.
पौध अवस्था से फूल आने तक गरम, बादलरहित मौसम की जरूरत होती है, जबकि फूल आने से पकने की अवस्था तक धूप की जरूरत होती है. 300-500 मिलीमीटर बारिश वाले इलाके इस के उत्पादन के लिए सही माने गए हैं.
यदि तापमान 38 डिगरी सैंटीग्रेड से ज्यादा होगा तो बीज और उन में तेल की मात्रा कम हो जाती है.
जमीन और उस की तैयारी
वैसे तो सूरजमुखी (Sunflower) को तमाम तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है, पर इस के सफल उत्पादन के लिए हलकी भारी, सही जल निकास वाली, जमीन का पीएच मान 6.5-8.5 हो, अच्छी मानी गई है.
हलकी जमीन में 1 या 2 बार गहरी जुताई करनी चाहिए या 2 बार हैरो चला कर खेत को खरपतवाररहित कर लेना चाहिए, जबकि भारी जमीन पर हैरो चलाएं और फिर पाटा लगाएं. बाद में जमीन को इकसार कर लें. फिर ट्रैक्टर या हल से वांछित दूरी पर मेंड़ व कूंड़ों को बना लेना चाहिए.
बोआई का समय : सूरजमुखी की बोआई फरवरीमार्च महीने में कर देनी चाहिए.
बीज की दर : सूरजमुखी की प्रति हेक्टेयर बीज की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि उस की कौन सी किस्म उगाई जा रही है.
उन्नत किस्में : 12-15 किलोग्राम.
संकर किस्में : 8-10 किलोग्राम.
बोआई की विधि
भलीभांति तैयार खेत में सूरजमुखी (Sunflower) की बोआई 2 विधियों से की जा सकती है:
समतल बोआई : कल्टीवेटर या देशी हल की मदद से कूंड़ खोल कर पीछे हाथ से बीज गिराएं.
ध्यान रखें कि बीज समान रूप से गिरें. बीज डालने के बाद उन्हें पाटा चला कर ढक दें.
समतल बोआई सीड ड्रिल से भी की जा सकती है. पौधे उगने के बाद घने पौधों को निकाल देना चाहिए ताकि पौधों के बीच 25-30 सैंटीमीटर की दूरी रह जाए. इस विधि का इस्तेमाल उन्नत किस्मों के लिए किया जा सकता है. खेत में नमी के मुताबिक 3-5 सैंटीमीटर की गहराई पर ही बीज डालें. पंक्तियों और पौधों की आपसी दूरी इस तरह से रखें:
उन्नत किस्मों में पंक्तियों की दूरी 45 सैंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 सैंटीमीटर. वहीं संकर किस्मों में पंक्तियों की दूरी 50-60 सैंटीमीटर और पौधे की दूरी 25-30 सैंटीमीटर.
गूलों पर बोआई : इस विधि में 60 सैंटीमीटर की दूरी पर गूल (जैसे आलू के लिए तैयार करते हैं) बना कर उन के ऊपर 30 सैंटीमीटर की दूरी पर 2 बीज हिल यानी मेंड़ पर बोए जाते हैं. बीज बोने के तुरंत बाद नालियों में हलका पानी दे देना चाहिए. ऐसा करने से अकसर 7-8 दिन में बीजों का अंकुरण हो जाता है. साथ ही, बीज भी कम मात्रा में लगता है.
बीजोपचार : शीघ्र अंकुरण और पर्याप्त पौधों की तादाद हासिल करने के लिए यही उचित होगा कि बीजों को बोने से पहले 10-12 घंटे पानी में भिगो लें. उस के बाद 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से थायरम या कैप्टान भलीभांति मिला लें. ऐसा करने से फसल फफूंदीजनित रोगों से बच जाती है. नतीजतन, अच्छी फसल मिलती है.
सफल अंकुरण : वैसे तो सूरजमुखी का बीज 4 डिगरी सैंटीग्रेड तापमान पर भी अंकुरित हो जाता है, पर सर्वोत्तम परिणाम वायुमंडल के 18 डिगरी सैंटीग्रेड औसत तापमान पर प्राप्त होता है. कम तापमान होने पर अंकुरण में अधिक समय लगता है.
पंक्तियों की दिशा : जांच से पता चला है कि पूर्वपश्चिम की कतारें सर्वोत्तम होती हैं, क्योंकि पौधे सूर्य की ऊर्जा का अधिक उपयोग कर पाते हैं और सूर्य की किरणें जमीन तक पहुंच कर हानिकारक रोगों व कीटों को पनपने नहीं देती हैं.
पौधों की तादाद : पंक्तियों की आपसी दूरी और पौधों की आपसी दूरी क्रमश: 50-60 सैंटीमीटर और 25-30 सैंटीमीटर रखने पर औसत पौधों की तादाद 55-65 हजार प्रति हेक्टेयर उगनी चाहिए, जो संकर किस्मों व दूसरी उन्नत किस्मों के लिए सही हैं.
सिंचाई : जायद में बोने वाली सूरजमुखी (Sunflower) की फसल में 5-6 सिंचाइयों की जरूरत होती है. अच्छी नमी में बोए गए बीज को फिर से सिंचाई की जरूरत 45 दिन बाद बटन बनने की अवस्था में पड़ती है. इसी अवस्था में नाइट्रोजन की बाकी बची आधी मात्रा डाली जाती है.
दूसरी सिंचाई 20 दिन बाद जब फसल में फूल आ जाएं तब करनी चाहिए. तीसरी सिंचाई बीज बनने के समय करें, जो दूसरी सिंचाई के 15-20 दिन बाद देनी चाहिए. इस अवस्था में नमी की कमी से कम बीज बनते हैं और मधुमक्खियां भी कम आकर्षित होती हैं.





