SRI Technology : भारत में अधिकतर किसान आज भी धान की खेती पारंपरिक तरीकों से करते हैं, जिसमें अधिक पानी, अधिक मेहनत और ज्यादा लागत लगती है, लेकिन पैदावार अपेक्षाकृत कम मिलती है. श्री तकनीक (System of Rice Intensification – SRI) धान की खेती का एक उन्नत और वैज्ञानिक तरीका है, जिससे कम संसाधनों में बेहतर गुणवत्ता का अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
श्री तकनीक (SRI) क्या है?
श्री तकनीक यानी System of Rice Intensification धान की खेती की एक आधुनिक पद्धति है, जिसमें कम उम्र की पौध, कम पानी, कम बीज और जैविक तरीकों से खेती की जाती है. इस तकनीक से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और लंबे समय तक अच्छी पैदावार मिलती है.
श्री तकनीक से धान की खेती के प्रमुख फायदे
• 50% तक पानी की बचत
• बीज की खपत में भारी कमी
• मिट्टी की सेहत में सुधार
• रासायनिक खाद का कम उपयोग
• जैविक खाद से बेहतर उत्पादन
• 20–30% तक अधिक पैदावार
• बेहतर गुणवत्ता का चावल और अधिक मुनाफा
श्री तकनीक में नर्सरी कैसे तैयार करें?
श्री तकनीक में 8–12 दिन की पौध की रोपाई की जाती है, इसलिए नर्सरी की तैयारी पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है.
नर्सरी की तैयारी की विधि
• मिट्टी को भुरभुरा बनाएं
• अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं
• 5–6 इंच ऊँची और 4 फुट चौड़ी क्यारियाँ बनाएं
• क्यारी की लंबाई आवश्यकता अनुसार रखें
नर्सरी का आकार
किसान भाईयों 1 हेक्टेयर खेत के लिए केवल 1000 वर्गफुट नर्सरी पर्याप्त हैं.
नर्सरी की परतें (Layer Method)
नर्सरी की परतें बनाने के लिए 1 इंच – सड़ी गोबर/कंपोस्ट खाद, 1.5 इंच – खेत की मिट्टी,1 इंच – गोबर/कंपोस्ट खाद और 2.5 इंच – खेत की मिट्टी की जरूरत होती है. इससे पौध को बिना टूटे आसानी से निकाला जा सकता है.
खेत की तैयारी और लेजर लैंड लेवलिंग का महत्व
• खेत को अच्छी तरह तैयार करें
• जरूरत हो तो लेजर लैंड लेवलर से समतल करें
• समतल खेत में कम पानी लगता है,सभी पौधों को बराबर नमी मिलती है और फसल एकसाथ तैयार होती है
श्री तकनीक में पौध रोपाई की सही विधि
• पौध की उम्र: 8–12 दिन हो.
• पौध को मिट्टी सहित खुरपी से निकालें.
• रोपाई की गहराई: 2–3 सेमी रखें.
• पौधे से पौधे की दूरी: 25 सेमी हो.
• लाइन से लाइन की दूरी: 25 सेमी हो.
रोपाई के बाद सिंचाई
केवल हल्की सिंचाई करें, खेत में पानी खड़ा न रखें सिर्फ नमी बनाए रखें.
कोनोवीडर से खरपतवार प्रबंधन
श्री तकनीक में शुरुआती दिनों में खरपतवार अधिक उगते हैं.
खरपतवार नियंत्रण की विधि
• रोपाई के 10 दिन बाद कोनोवीडर चलाएं
• हर 10 दिन के अंतराल पर 2 लाइनों के बीच कोनोवीडर चलाते रहें
फायदे
• खरपतवारनाशी दवाओं की जरूरत नहीं
• मिट्टी की सेहत सुरक्षित रहती है
• उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है
श्री तकनीक से धान की खेती अपनाकर किसान कम पानी, कम लागत और कम बीज में 20–30% अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं. यह तकनीक न केवल किसानों की आय बढ़ाती है, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है.





