Oilseeds: अपने देश में खेती को लेकर इतनी उलटबांसी है कि गेहूं व धान की भरपूर पैदावार होने के बावजूद उन्हीं को बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जाता है, जबकि उन्हें रखने के लिए गोदाम तक पूरे नहीं पड़ते. खुले में पड़ा लाखों टन अनाज सड़ जाता है. दूसरी तरफ तिलहनों (Oilseeds) की कमी है, लेकिन उसमें इजाफे के लिए ठोस कोशिश नहीं होती, कारगर कदम नहीं उठाए जाते.

प्रमुख तिलहन उत्पादक राज्य और उनकी भूमिका

गुजरात में मूंगफली, मध्य प्रदेश में सोयाबीन व राजस्थान में सरसों की खेती बहुतायत से होती है. देश में पैदा होने वाले कुल तिलहन (Oilseeds) का 60 फीसदी हिस्सा इन तीनों राज्यों से मिलता है, लेकिन गुजरात व आंध्र प्रदेश को छोड़कर बाकी राज्यों में तिलहन की उपज राष्ट्रीय औसत से भी नीचे है. लिहाजा तिहलन की खेती को बढ़ावा देने व पुरानी तकनीकों में सुधार करने की जरूरत है.

तिलहन उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता क्यों है

खाद्य तेलों की विदेशी कंपनियां सब से बड़े खरीददार देश भारत पर अपनी पैनी नजरें गड़ाए रहती हैं. वे अपना माल खपाने के लिए हर जोड़-तोड़ करती हैं. कई साल पहले सरसों के तेल में कंटकटैया की मिलावट व आरजीमोन का खौफ फैलाया गया था, ताकि लोग सरसों का तेल खाना छोड़कर उनका
तेल अपना लें. हमारे लालची ओहदेदार उनके चंगुल में फंसकर ऐसा स्वांग रचते हैं, जिससे तिलहन (Oilseeds) की खेती व तेल कारोबार का पूरा माहौल हमारे खिलाफ व दूसरे मुल्कों के हक में हो जाता है. लिहाजा किसानों को जागरूक व एकजुट होना पड़ेगा.

तिलहन उत्पादन बढ़ाने के प्रभावी उपाय

तिलहन (Oilseeds) उगाने वाले किसानों को खेती की लागत घटाने, फसल सुधारने, फसल बचाने व पैदावार और क्वालिटी बढ़ाने की नई तकनीकों की ट्रेनिंग दी जानी जरूरी है. यदि किसानों को नए उम्दा बीज, दवा, खाद व मशीनों पर छूट तथा उनकी उपज के वाजिब दाम दिलाए जाएं, तो गेहूं, गन्ना व धान की तरह तिलहनी फसलों की पैदावार भी भरपूर हो सकती है.
सरकार के भरोसे बैठने से बेहतर है कि देश के तमाम किसान खुद आपस में मिलकर एक-दूसरे की मदद के लिए संगठित हो और लगातार नई से नई जानकारियां जुटाएं. अपनी तिलहनी (Oilseeds) उपज को मंडी में ले जाकर औने-पौने दामों पर बेचने की बजाय अकेले या मिलकर तेल निकालने की मशीनें लगाएं और तेल निकालें. तेल को फिल्टर करके पालीथीन या टीन के डब्बों में पैक करें और बेचें. खादी ग्रामोद्योग आयोग व राज्यों के ग्रामोद्योग बोर्ड तेल उद्यमियों की मदद करते हैं.

तेल निकालना फायदे का धंधा

पहले बैल कोल्हू से तेल निकालते थे, अब मशीनों से तेल निकलता व छनता है. वनस्पति तेलों का कुनबा बहुत बड़ा है. दुनियाभर में करीब 221 तरह के तेल निकाले जाते हैं. अब मक्का, बिनौले व धान की भूसी वगैरह के तेल भी खाने में व बाकी तेल दूसरे कामों में इस्तेमाल होते हैं, मसलन जापानी पोदीने से बना मैंथा आयल व चंदन, बादाम, अखरोट, यूकेलिप्टस, इलायची, नीम व लौंग वगैरह के महंगे तेल दवाओं में काम आते हैं.

इन उत्पादों में होता है इस्तेमाल

तारपीन का तेल रंग रोगन में, महुए का तेल साबुन बनाने में, गुलाब, नीबू व संतरे का तेल खुशबू और साजसिंगार का सामान बनाने में, जैट्रोफा का तेल ईंधन में काम आता है. तरबूज के बीजों का तेल अफ्रीका में खाया जाता है. विदेशों में चाय, तंबाकू, टमाटर के बीजों जैसी बहुत सी चीजों का तेल निकाला जाता है. लिहाजा किसान तकनीक सीखकर फायदा उठा सकते हैं.

प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन से कैसे बढ़ेगी आय

बस यह देखें कि आपके पास कच्चे माल के तौर पर कौन सी उपज है, जिसकी प्रोसेसिंग करके आप उसकी कीमत बढ़ा सकते हैं. खुशबूदार पौधों से तेल निकालने की जानकारी निदेशक, सुगंध सुवास विकास केंद्र, मकरंदनगर, कन्नौज, उत्तर प्रदेश से और दवाओं में काम आने वाले तेलों के लिए निदेशक, सुगंध एवं औषधीय पौध संस्थान, सीमैप, लखनऊ से जानकारी हासिल की जा सकती है.

किसानों को इससे ज्यादा कमाई होगी. गुजरात के पशुपालक किसान मिलकर दूध के लिए अमूल को-आपरेटिव चला रहे हैं. तिलहन (Oilseeds) उत्पादक राज्यों के किसान मिलकर अपना सहकारी संघ बना सकते हैं और अपनी तेल मिलें चला सकते हैं.

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