Indian Sweets: भारत में लौंग की गिनती लोकप्रिय मसालों में होती है. इस की लोकप्रियता का ही प्रमाण इस के नाम पर बनने वाली लौंगलता है. लौंगलता की सब से बड़ी खासीयत उस में लौंग का इस्तेमाल है. लौंगलता को लौंग के जरीए बांधा जाता है, ताकि उस के अंदर भरे मेवे और मसाले बाहर न आ सकें. लौंगलता देशी मिठाई (Indian Sweets) है. पहले यह वाराणसी में सब से ज्यादा मशहूर थी. समय के साथसाथ लखनऊ जैसे दूसरे शहरों में भी यह मिलने लगी. अब सारी दुनिया इस की दीवानी है. इस का जायका लोगों को काफी समय तक याद रहता है.

लखनऊ में जब छप्पनभोग नामक मिठाई की दुकान के मालिक रवींद्र गुप्ता ने देशी मिठाइयों को विदेशों में पहचान दिलाने का काम शुरू किया. उन की नजर सब से पहले लौंगलता पर पड़ी. रवींद्र गुप्ता कहते हैं कि लौंगलता ऐसी मिठाई है, जिसे बाहर भेजना आसान होता है. यह आसानी से पैक हो जाती है. इसे कोरियर से बाहर भेजते हैं.

विदेशों में रहने वाले भारतीय मिठाइयों (Indian Sweets) के शौकीन लोग इसे खूब पसंद करते हैं. इसे खाने में मिठाई और मेवे के साथसाथ लौंग का स्वाद भी मिलता है. इसे बनाने में अच्छे किस्म के गेहूं के मैदे का इस्तेमाल किया जाता है. इस में खोया व मेवा भी अच्छी किस्म का इस्तेमाल किया जाता है. वैसे तो विदेशों में बहुत सारी भारतीय मिठायां खाई जाती हैं, पर लौंगलता अपने रसीले बनारसी टेस्ट के कारण लोगों को बहुत लुभाती है.

विदेशों में रहने वाले लोग ऐसी मिठाई पसंद करते हैं, जिस का स्वाद अच्छा हो, पर उस में चीनी का इतना प्रयोग न हुआ हो, जो नुकसान कर सके. ऐसे में लौंगलता उन के लिए सब से ज्यादा मुफीद होती है. लौंगलता की मांग उन देशों में सब से ज्यादा है, जहां पर भारतीय ज्यादा तादाद में रहते हैं. अमेरिका, इंगलैंड, मारीशस और सिंगापुर वगैरह ऐसे ही देश हैं. मुसलिम आबादी वाले देशों में भी इस की मांग खूब है. अरब देशों में भी लौंगलता खूब पसंद की जाती है. तमाम भारतीय विदेश वापस जाते समय अपने साथ लौंगलता जरूर ले जाते हैं.

लौंगलता ज्यादा दिनों तक बिना खराब हुए रखी जा सकती है. विदेशों के अलावा मुंबई, दिल्ली और जयपुर के लोग भी इसे खूब पसंद करते हैं. बाहर भेजने के लिए लौंगलता को ऐसे पैक किया जाता है, जिस से इसे ले जाना आसान हो और देखने वाले पर इस का बेहतर असर पड़ सके.

आजकल ज्यादातर घरों में ओवन होता है. लौंगलता खाने से पहले उसे ओवन में एक बार गरम कर लिया जाए तो उस का स्वाद बढ़ जाता है. लौंगलता गुझिया नस्ल की मिठाई है, जिस का स्वाद अब विदेशों तक पहुंच रहा है.

बनाने की विधि

लौंगलता के कारीगर रमेशपाल कहते हैं कि 1 किलोग्राम मैदे से 100 के करीब लौंगलता बन जाती हैं. इसे बनाने के लिए सब से पहले मैदे को ठीक तरह से गूंधा जाता है. इस के बाद 1 किलोग्राम खोया, 200 ग्राम काजू, 1 ग्राम केसर और 50 ग्राम किशमिश को मिला कर अंदर भरने की सामग्री तैयार की जाती है. फिर 1 किलोग्राम चीनी ले कर चाशनी तैयार की जाती है. मैदे से गोल आकार की पूड़ी बना कर उस के अंदर मेवा भर दिया जाता है. इस के बाद पूड़ी को मोड़ कर सही आकार देते हैं. मोड़ते समय परत दर परत हलका घी लगा देते हैं, जिस से परतें आपस में मिलती नहीं हैं. परतें खुले नहीं, इस के लिए लौंग से उन्हें फंसा दिया जाता है.

तैयार लौंगलताओं को घी में हलका भूरा होने तक तल लेते हैं. इस के बाद उन्हें चीनी की चाशनी में डाल कर निकाल लेते हैं. ऊपर पिस्ता डाल कर लौंगलताओं को सजा देते हैं.

लौंगलता को तलते समय ध्यान रखना चाहिए कि आंच ज्यादा न हो. ज्यादा तेज आंच होने से यह सख्त हो सकती है, जो खाने में सही नहीं लगती है.

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