कृषि विज्ञान केंद्र उजवा : अच्छी उपज और टिकाऊ खेती के लिए जमीन में उर्वरकों का इस्तेमाल जरूरी है और यह तभी संभव है जब हम खेत की मिट्टी और उसकी जरूरत के अनुसार खेती करें. इसी मकसद को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा, नई दिल्ली ने खेती में उर्वरक का संतुलित उपयोग एवं टिकाऊ खेती पर जागरूकता पर एक कार्यक्रम आयोजित किया.

गांव-गांव जाकर किसानों को किया जा रहा जागरूक

कृषि विज्ञान केंद्र, दिल्ली द्वारा उर्वरकों के संतुलित उपयोग एवं टिकाऊ खेती की तकनीकी जानकारी के प्रसार हेतु विशेष जागरूकता अभियानों का आयोजन दिल्ली के गांवों में किया जा रहा है. जागरूकता अभियान का उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा टिकाऊ कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना है.

बढ़ती लागत, घटती पैदावार

कृषि विज्ञान केंद्र, दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. डी. के. राणा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मिट्टी की घटती उर्वरता एक गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने बताया कि यूरिया एवं डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग मिट्टी की उर्वरता क्षमता को एवं फसलों की उत्पादन क्षमता को कम कर रहा है, जिससे उर्वरकों की उपयोग दक्षता में कमी आ रही है एवं खेती की लागत बढ़ती जा रही है.

मिट्टी जांच और सही उर्वरक से बढ़ती पैदावार

-शस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. समर पाल सिंह ने किसानों को अपने खाली खेतों की मिट्टी की जांच कराने एवं मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक उपयोग करने की सलाह दी.

उन्होंने कहा कि फसल की आवश्यकता के अनुसार संतुलित पोषक तत्त्व जैसे एन.पी.के. के अलावा सल्फर, जिंक एवं अन्य सूक्ष्म पोषक तत्त्वों एवं जैव उर्वरकों का प्रयोग करने से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. साथ ही उन्होंने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खाद, कंपोस्ट एवं वर्मी कंपोस्ट के अधिक उपयोग तथा प्राकृतिक खेती को अपनाने की तकनीकों के बारे में बताया.

फसलचक्र अपनाने से मिट्टी में होता सुधार

डॉ. समर पाल सिंह ने बताया कि फसलचक्र अपनाने से, जिसमें दलहनी फसलें जैसे ढैंचा, मूंग, उड़द एवं अरहर आदि की फसलचक्र के अनुसार खेती की जाए तो खेत की मिट्टी में सुधार के साथ उसकी गुणवत्ता बढ़ती है जिससे लंबे समय तक खेती से अच्छा उत्पादन मिलता है.

मिट्टी पानी की जांच, खेती पर नहीं आने दे आंच

मृदा विशेषज्ञ बृजेश कुमार ने किसानों को बताया कि मिट्टी एवं पानी की नियमित जांच के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए. इस अवसर पर वैज्ञानिकों द्वारा खेतों में जाकर मिट्टी के नमूने लेने की वैज्ञानिक विधि का प्रदर्शन भी किया गया तथा मृदा स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से किसानों को जानकारी दी गई.

कृषि विज्ञान केंद्र उजवा, नई दिल्ली में हुए इस आयोजन में किसानों को उन्नत एवं कम लागत की टिकाऊ खेती कैसे की जाए इसके अनेक पहलुओं पर जानकारी दी गई. संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि खेत की मिट्टी की जांच के अनुसार खाद उर्वरकों का सीमित मात्रा में प्रयोग कर खेती से कैसे अच्छी उपज ली जा सकती है, जिसमें लागत भी कम लगेगी और अधिक उपज भी मिलेगी.

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें...