Farming Machines : लेजर लैंड लेवलर से बचाएं भूमिगत जलदोहन

Farming Machines: वक्त के साथसाथ हर काम के तौरतरीके बदल रहे हैं. खेती का काम भी इस से अछूता नहीं है. खेती के लिए एकदम फ्लैट यानी समतल खेत ही मुनासिब होता है, मगर खुरपीफावड़े या हाथों से यह काम बहुत मुश्किल होता . इसी काम को आसान बना देता है लेजर लैंड लेवलर.

जलसंरक्षण को ध्यान में रखते हुए आज यह जरूरी हो गया है कि पानी की हर बूंद का इस्तेमाल किया जाए. आज खेतों में सिंचाई के लिए पुराने तरीके ज्यादा कारगर नहीं हैं, क्योंकि खेतों की जमीन एकसार नहीं है, जिस से पानी ज्यादा बरबाद होता है. इसलिए सब से पहले खेतों की जमीन को समतल करना जरूरी है.

खेतों की जमीन को समतल करने के लिए हमें पुराने तौरतरीके छोड़ कर आधुनिक नई तकनीक (Farming Machines) वाले तरीके अपनाने होंगे.

आजकल किसान लेजर लैंड लेवलर से अपने खेतों को समतल करते हैं. यह लेजर लैंड लेवलर मशीन पूरी तरह से कंप्यूटर पर आधारित है और ट्रैक्टर में पीछे जोड़ कर चलाई जाती है.

लेजर किरणों की तकनीक पर आधारित इस मशीन से ऊबड़खाबड़ जमीन समतल बन जाती है. मशीन में ऊपर लगा लेजर किरण यंत्र इसे नियंत्रित करता है.

इस मशीन (Farming Machines) को ले कर किसानों का रुझान काफी बढ़ा है, क्योंकि इस से कम समय में ही खेत समतल हो जाता है. समतल खेत में पानी लगाते समय पानी की खपत कम होती है और पूरे खेत में एक जैसा पानी फैल जाता है.

नई फसल लगाने या धान लगाने से पहले किसान इस मशीन का खासतौर पर इस्तेमाल करते हैं, नतीजतन वे कम पानी की खपत में अच्छी फसल ले पाते हैं. इस मशीन के प्रयोग से तकरीबन 30 फीसदी पानी की बचत होती है, साथ ही खेत की मिट्टी में जो उर्वरक तत्त्व होते हैं वे भी बने रहते हैं.

आजकल किसानों द्वारा लेवल मास्टर ब्रांड काफी पसंद किया जाता है. आधुनिक तकनीक का लेजर लैंड लेवलर भारत में सब से पहले साल 2002 में स्पैक्ट्रा प्रीसीजन लेजर द्वारा बनाया गया था, जो जल्द ही किसानों का चहेता बन गया और लेवल मास्टर के नाम से मशहूर हुआ.

लेवल मास्टर किसानों के साथसाथ विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषदों, राज्य सरकारों और दूसरे संस्थानों में भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

Farming Machines

लेवल मास्टर के लाभ

*             यह 45 फीसदी तक पानी की बचत करता है.

*             यह बारिश में मिट्टी की ऊपरी परत के कटाव को रोकता है.

*             यह ऊपरी परत के पानी को प्रदूषित होने से रोकता है.

*             यह फसल की उपज को 35 फीसदी तक बढ़ाता है.

*             लेवल मास्टर के इस्तेमाल से खाद की खपत कम होती है और खेती का क्षेत्रफल भी बढ़ जाता है.

*             यह पानी का वितरण समान रूप से करने के साथसाथ खरपतवार की रोकथाम भी करता है.

Agricultural Machinery: किसानों की पहुंच में हमारे कृषि यंत्र

Agricultural Machinery:  अब हलबैल और खुरपीफावड़े वाली खेती का जमाना नहीं रहा. मौजूदा जेट युग में हर चीज की स्पीड में इजाफा होना लाजिम है, लिहाजा खेती का काम भी मशीनों यानी यंत्रों से करने में ही भलाई है. बलविंदर सिंह के यंत्र (Agricultural Machinery) किसानों के लिए उम्दा साबित हो रहे हैं.

भारत में आज भी लाखों किसान ऐसे हैं जिन की पहुंच कृषि यंत्रों (Agricultural Machinery) तक नहीं है. बड़े किसान तो इन मशीनों का फायदा उठा रहे हैं, लेकिन छोटी जोत वाले किसान पुराने तरीके अपनाते हैं या किराए पर मशीनों से अपनी खेती का काम कराते हैं.

ऐसी स्थिति में खेती की मशीनों को छोटे किसानों तक पहुंचाना एक मुश्किल भरा काम है.

आज हरित क्रांति का दौर है. ऐसे समय में किसानों की पहुंच कृषि यंत्रों (Agricultural Machinery) तक होनी चाहिए, जिस से वे कम समय और कम लागत में अपनी फसल से अच्छा मुनाफा ले सकें.

सरकार भी किसानों के लिए कृषि यंत्रों पर सब्सिडी देती है, जिस का फायदा किसान उठा रहे हैं और अनेक छोटेबड़े मशीन निर्माता किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खेती से जुड़ी मशीनें बना रहे हैं.

इसी बाबत हमारी बात बलविंदर सिंह से हुई, जो किसानों की जरूरत को ध्यान में रख कर कई तरह के कृषि यंत्रों को बना रहे हैं, जिन्हें आम किसान भी आसानी से खरीद कर अपनी खेती की पैदावार बढ़ा सकते हैं. इस के साथ ही दूसरे किसानों का खेती का काम कर के भी अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं.

‘मघर सिंह भजन सिंह एंड संस’ के मालिक बलविंदर सिंह ने बताया कि हम 1952 से कृषि की मशीनें (Agricultural Machinery) बना रहे हैं और हमारे नाम से ही मशीनें बिक जाती हैं. मशीनों की कीमत ऐसी कि किसान आसानी से खरीद सकें, हमारी बनाई मशीनों की कीमत 10 हजार रुपए से शुरू होती है.

उन्होंने आगे बताया कि वे लगभग 10-12 तरह की मशीनें बना रहे हैं, जिन में कल्टीवेटर, सीडड्रिल, ट्रौली, ग्रास कटर, डिस्क प्लग, डिस्क हैरो व टैंकर आदि हैं.

कल्टीवेटर है खास :

बलविंदर सिंह का कहना है कि हमारे बनाए कल्टीवेटर की खासी मांग है. हम 2 तरह के कल्टीवेटर बनाते हैं. पहला कल्टीवेटर सिंगल स्प्रिंग वाला है, जिस का वजन 9 से 13 टन तक होता है, जिस में हैवी ड्यूटी पाइपों का इस्तेमाल किया गया है. दूसरा कल्टीवेटर पडलर है. इस के द्वारा खेत तैयार करने पर समय और पानी की बचत होती है.

ट्रैक्टर ट्रौली :

हमारी कंपनी सिंगल जैक व डबल जैक वाली ट्रौली बनाती है. ट्रौली को जैक की मदद से अपनी जरूरत के अनुसार उठाया या झुकाया जा सकता है. सिंगल जैक वाली ट्रौली का साइज 10×13 फुट व डबल जैक वाली ट्रौली का साइज 13×18 फुट है.

ग्रास कटर :

स्टब मास्टर के नाम से मशहूर ग्रास कटर का वजन लगभग 315 किलोग्राम है, जिस की कार्य क्षमता 5 फुट एरिया तक है.

डिस्क हैरो :

इस हैरो का साइज 7×7 से ले कर 11×11 फुट तक है. यह मजबूत एंगलों से बना है और डिस्क का साइज 24 इंच है.

टैंकर :

1500 लीटर से ले कर 4 हजार लीटर तक टैंक भी हमारी कंपनी द्वारा बनाए जाते हैं, जिन्हें पानी के टैंकर या तेल के टैंकर वगैरह के रूप में इस्तेमाल करते हैं.

बलबिंदर सिंह ने बताया कि हमारी मशीन की पहुंच पंजाब के अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, बिहार व राजस्थान

जैसे अनेक राज्यों में है. हम मशीनें उच्च क्वालिटी के मैटीरियल से बनाते हैं. खुद अपनी निगरानी में मशीनों का निर्माण कराते हैं. किसान हमारी मशीनों का इस्तेमाल कर के मुनाफे में ही रहेंगे.

Super Seeder : खेती की लागत करे कम, काम है दम

Super Seeder: आज किसान के सामने बड़ी चुनौती फसल अवशेष, खासकर पराली प्रबंधन की है. धान कटाई के बाद खेत में बची पराली को हटाने में समय, पैसा और मेहनत तीनों ज्यादा लगते हैं. इसी समस्या का आधुनिक समाधान है सुपर सीडर मशीन, जो किसानों को देती है इन सबका समाधान.

क्या है सुपर सीडर यंत्र

सुपर सीडर (Super Seeder) एक आधुनिक ट्रैक्टर (Tractor) चालित कृषि यंत्र है, जो पराली को हटाए बिना ही सीधे खेत में बीज बोने का काम करती है. यह मशीन पराली को काटकर मिट्टी में मिलाती है और उसी समय गेहूं जैसी फसल की बोआई भी कर देती है. इससे खेत में अधिक दिनों तक नमी बनी रहती है, जिससे कम पानी की जरूरत होती है साथ ही खेती में उर्वराशक्ति भी बढ़ती है. सुपर सीडर मशीन को चलाने के लिए आमतौर पर 45 HP से 65 HP क्षमता वाला ट्रैक्टर जरूरी होता है.

सुपर सीडर (Super Seeder) मशीन मुख्य रूप से गेहूं की बोआई के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी मानी जाती है. इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में जौ, चना सरसों की बोआई में भी इसका प्रयोग किया जाता है.

सुपर सीडर यंत्र कैसे करता है काम

    • रोटरी ब्लेड खेत में बची पराली को काटते हैं.
    • कटी हुई पराली मिट्टी में मिल जाती है जो बनती है खाद.
    • सीड ड्रिल बीज को सही गहराई में डालती है जिससे अंकुरण अच्छा होता है.
    • बोआई में समय की बचत.
    • मिट्टी की नमी बनी रहती है.
    • पराली जलाने से मिलता है छुटकारा, जिससे पर्यावरण खराब नहीं होता.
    • मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है.
    • खरपतवार कम उगते हैं.
    • गेहूं की उपज में 10–20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी.

सुपर सीडर यंत्र के इस्तेमाल में बरतें ये सावधानियां

    • सही समय पर करें इस्तेमाल मिलेगा ज्यादा फायदा.
    • धान कटाई के तुरंत बाद करें इस्तेमाल.
    • जब खेत में हल्की नमी हो तब करें बोआई का काम.
    • बहुत गीली या बहुत सूखी मिट्टी में न चलाएं.
    • गेहूं बोआई से पहले सबसे उपयुक्त.
    • सीडर यंत्र को ट्रैक्टर HP से कम क्षमता वाली मशीन न लगाएं. सुपर सीडर मशीन को चलाने के लिए आमतौर पर 45 से 65 HP क्षमता वाला ट्रैक्टर जरूरी होता है.
    • ब्लेड और बेयरिंग की नियमित जांच करें.
    • खेत में एक जैसी स्पीड रखें.

केंद्र और राज्य सरकारें पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए सुपर सीडर मशीन पर 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देती हैं. कुछ वर्ग के लिए यह छूट अधिक भी हो सकती है. इसके लिए अपने नजदीकी कृषि विभाग से जानकारी ले सकते हैं.

Agri Exhibition : पटना में आयोजित होगा ‘एग्रो बिहार-2026’ मेला

Agri Exhibition : बिहार कृषि विभाग 12 से 15 मार्च तक पटना के गांधी मैदान में ‘एग्रो बिहार-2026’ मेला आयोजित करेगा. 4 दिन तक चलने वाला यह किसान मेला (Agri Exhibition) किसानों को अनेक आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी देने का बड़ा मंच बनेगा, जो किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी होगा.

कई राज्यों के कृषि यंत्र निर्माता आएंगे एक मंच पर

कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि मेले में देश के प्रमुख कृषि यंत्र निर्माता अपनी अत्याधुनिक मशीनों और तकनीकों का प्रदर्शन करेंगे. बिहार के अलावा पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के कृषि यंत्र निर्माता भी इसमें भाग लेंगे. इससे किसानों को विभिन्न कंपनियों के आधुनिक उपकरणों को एक ही स्थान पर देखने और समझने का अवसर मिलेगा.

लगेंगे 100 से अधिक स्टॉल

यह मेला करीब 3.25 लाख वर्गफीट क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा, जिसमें 100 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे. इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण, पशु एवं मत्स्य संसाधन, गन्ना उद्योग, उद्योग विभाग, सहकारिता विभाग और कॉम्फेड भी अपनी योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी देंगे. आगंतुकों के लिए बिहारी व्यंजनों से सुसज्जित विशेष फूड कोर्ट की भी व्यवस्था की गई है.

91 प्रकार के कृषि यंत्रों पर अनुदान की मिलेगी जानकारी

कृषि मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषि यांत्रिकरण योजना के तहत 91 प्रकार के कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है, जिसके विस्तार से जानकारी भी मेले (Agri Exhibition) में मिलेगी. इसके अलावा किसान बिहार कृषि मोबाइल ऐप या जिला व प्रखंड कृषि कार्यालय से यंत्रवार अनुदान की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

किसानों को मिलेगा अधिक लाभ

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के किसानों के लिए कृषि यंत्रों पर अधिक अनुदान का विशेष प्रावधान किया गया है. इसके अलावा 20 हजार रुपए या उससे कम अनुदान वाले कृषि यंत्रों पर निबंधित गैर-रैयत कृषक भी योजना का लाभ ले सकते हैं. किसान अपनी पसंद के अनुसार विभाग द्वारा तय कृषि यंत्र खरीद सकते हैं और अनुदान प्राप्त कर सकते हैं.

Tractor Sales 2025: खेती में ट्रैक्टर क्यों है किसानों का सबसे भरोसेमंद साथी

Tractor Sales: खेती में काम आने वाला किसानों का सबसे खास दोस्त, जो खेती में निभाता है सबसे महत्वपूर्ण भूमिका, जिसके बगैर खेती है अधूरी और कृषि यंत्र हैं लाचार. जी हां, हम यहां उसी बेताज बादशाह ट्रैक्टर की बात करने जा रहे हैं, जिसके बगैर अनेकों कृषि यंत्रों को खेती में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और किसान भी उसके बगैर अधूरा है. वह कौन सा दमदार ट्रैक्टर है, जो किसानों की कसौटी पर उतरा है खरा. किसने बनाया ट्रैक्टर की बिक्री (Tractor Sales) का रिकॉर्ड और किसकी बादशाहत रही कायम? जानने के लिए पढ़े यह लेख-

ट्रैक्टर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा से क्या बदलेगा खेल

ट्रैक्टर ने सालों से किसानों के बीच भरोसा बनाया है. चाहे छोटे खेत हों या बड़े, हल्की जुताई हो या भारी काम, कंपनी के ट्रैक्टर हर परिस्थिति में उच्च प्रदर्शन देते हैं. किसानों के लिए यह केवल मशीन नहीं, बल्कि खेती में उनका सबसे भरोसेमंद साथी बन चुका है.

भारतीय ट्रैक्टर बाजार में पिछले कुछ सालों में कंपनी ने छोटे और बड़े किसानों की जरूरतों के अनुसार अलग-अलग मॉडल पेश किए हैं. जो तकनीकी नवाचार, ईंधन की खपत में कमी और ताकतवर इंजन वाले ट्रैक्टर साबित हुए. कंपनियों का मानना है कि हमारा फोकस किसानों की बदलती जरूरतों के अनुसार ट्रैक्टर विकसित करने पर रहता है. हर मॉडल को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह न केवल प्रदर्शन में उत्कृष्ट हो, बल्कि लंबे समय तक टिकाऊ और भरोसेमंद भी रहे.

दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर बिक्री ने तोड़ा पिछला रिकॉर्ड

उत्तर भारत में एस्कॉर्ट, सोनालीका, महिंद्रा, जॉन डियर आदि ट्रैक्टरों को खासा पसंद किया जाता है और ट्रैक्टर की बिक्री (Tractor Sales) यह रिकॉर्ड किसानों के समर्थन को पुख्ता करता है. जहां कई प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों ने मजबूत बिक्री हासिल की और बाजार हिस्सेदारी में इजाफा दर्ज किया, वहीं कुछ ब्रांड्स को मामूली गिरावट का सामना करना पड़ा. यह स्थिति ट्रैक्टर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलाव को दिखाती है.

दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर बिक्री के आंकड़े

खेती का बादशाह है ट्रैक्टर. यदि ट्रैक्टर के ब्रांड की बात करें तो आज ट्रैक्टर के सैकड़ों ब्रांड बाजार में मौजूद हैं. सभी की अपनी खासियतें हैं. कोई अधिक पावरफुल है, तो किसी में ईंधन की खपत कम है, जिनमें से किसान अपनी जमीन और जरूरत के अनुसार ट्रैक्टर खरीद सकता है. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) रिसर्च डेटा के अनुसार कैलेंडर वर्ष 2025 में ट्रैक्टरों की रिटेल बिक्री (Tractor Sales)  996,633 वाहन रही. यह वर्ष 2024 में हुई 893,706 ट्रैक्टरों की बिक्री से ज्यादा है और सालाना आधार पर 11 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी है.ट्रैक्टर मार्केट में किस ट्रैक्टर की कितनी रही हिस्सेदारी, किसकी रही बादशाहत जानिएं –

ट्रैक्टरों में किसने की बादशाहत कायम

प्रमुख मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) के लिए मांग की मजबूती साफ दिखी. इसमें भी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) ने अपना दबदबा और बढ़ाया.बीते साल दिसंबर, 2025 में महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड (ट्रैक्टर डिवीजन) ने 237,980 ट्रैक्टर की बिक्री (Tractor Sales)  के साथ पहला स्थान हासिल किया. दिसंबर 2024 की तुलना में 23.36 फीसदी के मुकाबले अपनी बाजार भागीदारी बढ़ाकर 23.88 फीसदी की.

महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड (स्वराज डिवीजन) ने 186,529 वाहनों की खुदरा बिक्री दर्ज की, बाजार हिस्सेदारी 18.60 फीसदी से बढ़कर 18.72 फीसदी हो गई. इन दोनों ब्रांडों का साल के दौरान कुल उद्योग की बिक्री में 42 प्रतिशत से ज्यादा योगदान रहा.

एमऐंडएम के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के अध्यक्ष विजय नाकरा ने कहा, ‘हमने दिसंबर 2025 में घरेलू बाजार में 30,210 ट्रैक्टर बेचे हैं जो पिछले साल के मुकाबले 37 प्रतिशत ज्यादा हैं.’

सोनालीका ट्रैक्टर बिक्री में ऐतिहासिक उछाल

हाल ही में दिसंबर, 2025 में किसानों ने सोनालीका ब्रांड की जमकर खरीदारी की. सोनालीका ट्रैक्टर्स ने दिसंबर 2025 में 12,392 यूनिट्स की बंपर बिक्री की. इंटरनैशनल ट्रैक्टर्स (सोनालिका) ने दिसंबर 2025 में 126,741 ट्रैक्टरों की बंपर बिक्री की. यह तीसरे स्थान पर रही. सोनालीका के इस प्रदर्शन से भारतीय ट्रैक्टर बाजार में कंपनी को मजबूती मिली और कंपनी ने किसानों के बीच कहीं अधिक ताकतवर ब्रांड बनाकर अपनी जगह मजबूत की है.

लक्ष्य ट्रैक्टर बेचना नहीं, किसानों के भरोसे को जीतना है

ट्रैक्टर की रिकॉर्ड बिक्री होने पर सोनालीका ट्रैक्टर के संयुक्त प्रबंध निदेशक, रमण मित्तल का कहना है कि, हमारे हर ट्रैक्टर की बिक्री (Tractor Sales) किसानों के विश्वास को दिखाती है. हम किसानों की जरूरतों और फीडबैक को समझकर ऐसे ट्रैक्टर बनाते है, जो भरोसेमंद और उच्च प्रदर्शन वाले हों. उन्होंने यह भी बताया कि, कंपनी का लक्ष्य सिर्फ ट्रैक्टर बेचना नहीं, बल्कि ऐसे ट्रैक्टर बनाते रहना है जो किसानों का लंबे समय तक खेती में साथ निभाए और उनकी कसौटी पर खरा उतरे.

एस्कॉर्ट्स कुबोटा की रिकॉर्ड ग्रोथ ने चौंकाया बाजार

एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड (एग्री मशीनरी ग्रुप) का काफी अच्छा प्रदर्शन रहा. उन्होंने 106,482 यूनिट की बिक्री दर्ज की, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 9.78 प्रतिशत था. अब 10.68 प्रतिशत रहा.

टैफे लिमिटेड ट्रैक्टर की बाजार हिस्सेदारी

टैफे लिमिटेड ने दिसंबर, 2025 में 111,947 ट्रैक्टर की बिक्री की, उसकी बाजार भागीदारी 11.23 प्रतिशत रही जो दिसंबर, 2024 की 11.54 प्रतिशत से कम है. हालांकि यह मामूली फर्क है, लेकिन इसके लिए कंपनी को मंथन करना होगा कि वह आने वाले समय में किसानों का अपने प्रोडक्ट के प्रति भरोसा बनाए रखे.

जॉन डियर ट्रैक्टर की बढ़ती लोकप्रियता

जॉन डियर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (ट्रैक्टर डिवीजन) ने 76,563 ट्रैक्टर बेचे जो पिछले साल की 6,321 यूनिट से 33.68 फीसदी अधिक है. इसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 7.68 फीसदी हो गई है.

किन ट्रैक्टर कंपनियों को झेलनी पड़ी मामूली गिरावट

आयशर ट्रैक्टर्स ने दिसंबर, 2025 में 61,768 यूनिट बेचीं, उसकी बाजार भागीदारी 6.20 प्रतिशत रही. फिर भी कंपनी को किसानों की नब्ज टटोलनी होगी, जिससे वह अपना मुकाम हासिल कर सके.

ट्रैक्टर बाजार के रुख का कुल-मिलाकर एक औसत एवरेज देखा जाए तो दिसंबर, 2025 में ट्रैक्टर रिटेल बाजार ने पिछले साल की तुलना में अच्छी बढ़त हासिल की है.

Farm Machinery: सुपर सीडर से करें सीधी बोआई

Farm Machinery :सुपर सीडर एक आधुनिक कृषि यंत्र है जो एक-साथ कई खेती के काम करता है. इस यंत्र की मदद से खेत को बिना जोते, बिना खेत तैयार करे ही गेहूं की सीधी बोआई की जाती है और साथ ही खाद भी बोआई के साथ साथ खेत में लग जाता है. फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सीडर मशीन खेत में मौजूद फसल अवशेषों (पराली) को कुचलकर खेत में मिलाने का भी काम करता है, जो आगे चलकर खेत में ही खाद भी बन जाती है. ऐसे ही अनेक फायदेमंद जानकारी के लिए पढ़िए पूरा लेख-

सुपर सीडर के हैं फायदे अनेक

• जमीन में बनी रहती है नमी

धान की पिछली फसल कटने के बाद खेत को बिना जोते ही यह सीडर यंत्र गेहूं बोआई और खाद लगाने का काम करता है, जिससे खेत की मिट्टी में नमी बनी रहती है.

• पराली प्रबंधन आसान

फसल कटाई के बाद खेत में बची पराली को यह मिट्टी में मिलाकर मिट्टी की पैदावार क्षमता बढ़ाती है. फसल अवशेष को खाद बनाने में भी मदद करती है, जिससे खेत में खाद पर अलग से किए जाना वाला खर्च में कमी आती है.

• कम समय में कई काम

एक बार में 3 से 4 काम करता है. सबसे पहला काम जुताई, फिर उर्वरक के साथ बीज बोना, बीज को मिट्टी से ढकना और पराली को मिट्टी में दबाने का काम करता है. कम समय में अधिक क्षेत्र में बोआई होने से डीजल, मजदूरी और समय कम लगता है. साथ ही वैज्ञानिक तरीके से खेत में बोआई होने पर फसल से पैदावार अच्छी मिलती है.

• फसल अवशेष प्रबंधन

यह यंत्र कई तरह की फसलों के बीज जैसे सोयाबीन, गेहूं, धान, चना, दलहनी फसल आदि के बीज बोन का अच्छा काम करता है. इसके अलावा फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कपास, केला, धान, गन्ना, मक्का, ज्वारबाजरा आदि की जड़ों और ठूंठ को हटाने का काम करता है.

उठाएं सब्सिडी का लाभ

किसान खेती में अधिक से अधिक कृषि यंत्रों (Farm Machinery) का इस्तेमाल करें, इसके लिए कृषि यंत्र खरीद पर सरकार द्वारा भी सब्सिडी दी जाती है. सुपर सीडर पर 40 से 50 फीसदी तक सब्सिडी का लाभ दिया जाता है, जबकि छोटे और सीमांत किसानों के लिए अधिकतम 50–60 फीसदी तक सब्सिडी मिलती है. सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसान कृषि यांत्रिकीकरण पोर्टल या जिला कृषि कार्यालय के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए खेती से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखें.

आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किसानों के लिए अनेक लाभकारी योजनाएं चलती हैं और सुपर सीडर जैसे कृषि यंत्र (Farm Machinery) का इस्तेमाल किसानों के लिए कहीं अधिक लाभकारी है. यह यंत्र बोआई के अलावा भी खेती के कई काम करता है, जिससे किसान की लागत कम आती है और मुनाफा अच्छा मिलता है.

Mini Rotavater : छोटा रोटावेटर करे बड़े काम

Mini Rotavater : खेती के काम के लिए आज अनेक तरह के छोटे – बड़े कृषि यंत्र मौजूद हैं. जिनका इस्तेमाल किसान अपनी पहुंच के अनुसार कर सकता है.यहां हम बात कर रहे हैं एक ऐसे कृषि यंत्र मिनी रोटावेटर (Mini Rotavater ) के बारे में, जिसका इस्तेमाल सबसे अधिक होता है. और यह कृषि यंत्र खेती के कई प्रकार के काम कर सकता है. तो आइए जानते हैं इस यंत्र के बारे में कुछ खास जानकारियां.

मिनी रोटावेटर में क्या है खास

रोटावेटर खेत तैयार करने में अपनी भूमिका निभाने वाला खास कृषि यंत्र है. जो कई साइज में आता है. इस यंत्र को ट्रैक्टर से जोड़कर चलाया जाता है. यहां छोटे साइज़ के रोटावेटर की जानकारी दे रहे हैं. बड़े रोटावेटर को चलाने के लिए अधिक हॉर्स पावर के ट्रैक्टर की जरूरत होगा. जबकि मिनी रोटावेटर (Mini Rotavater ) के लिए मिनी साइज अर्थात छोटे साइज वाले ट्रैक्टर ही काफी हैं. इसलिए जरूरी नहीं कि हर किसान बड़ा यंत्र ही खरीदे, अपनी जोत और जेब के हिसाब से मिनी रोटावेटर खरीदकर इस्तेमाल किया जा सकता हैं. मिनी रोटावेटर भी खेती के वही काम करता है जो बड़ा रोटावेटर कर सकता है.

फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोगी

जुताई के अलावा मिट्टी में फसल अवशेषों को मिलाने के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है. खेत में हरी खाद तैयार करते समय खड़ी फसल ढैचा या अन्य दलहनी फसल को मिट्टी में मिलाने का काम करता है.

बागवानी फसलों के लिए उपयोग

छटे रोटावेटर (Mini Rotavater ) पहाड़ी क्षेत्रों , बागवानी, छोटे साइज के खेतों, सब्जी फसल , लाइन में लगाई गई फसलों के लिए अत्यंत उपयोगी है. इसमें टिलेज की गहराई लगभग 5 इंच तक होती है. ये कम जगह में भी आसानी से काम करते हैं.

क्या हैं इस यंत्र की खासियतें

यह चलने में आसान और लंबे समय तक साथ निभाते हैं.

इस यंत्र में ब्लेड सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले बोरान स्टील से बने होते हैं.जो विशेष रूप से डिजाइन किए जाते हैं.

मिनी सीरीज़ में यह सिंगल और मल्टी गियर बॉक्स में आता है.

इसके सभी पुर्जे मजबूत और सीएनसी मशीनों, लेज़र कटिंग और रोबोटिक वेल्डिंग द्वारा विकसित किए जाते हैं.

रोटावेटर को ऊपर नीचे करने के लिए एडजस्ट करने की सुविधा .

नमी और कीचड़ से सुरक्षित, अच्छी क्वालिटी का पेंट जिससे यह यंत्र लंबे समय तक साथ निभाए .

ईंधन की बचत और कम समय में ज्यादा काम.

कितने HP ट्रैक्टर की होगी जरुरत

छोटे साइज के रोटावेटर  (Mini Rotavater)को खासतौर पर भार और ईंधन की खपत कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसलिए इसे इस्तेमाल करने के लिए छोटे ट्रैक्टर द्वारा चलाया जाता है. जैसे 11 से 18 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर के साथ आसानी से चलाया जा सकता है.

मिनी साइज़ ट्रैक्टर छोटे खेतों, बागवानी और विशेष कृषि कार्यों के लिए बनाए गए हैं, जो कम HP (11-36 HP) तक होते हैं. जिनमें महिंद्रा, स्वराज, वीटीएस, सोनालीका जैसे ब्रांड प्रमुख हैं, जो छोटे भूखंडों पर छोटे साइज यंत्रों के साथ सुगमता से काम करते हैं. इनकी कीमत बड़े ट्रैक्टरों की तुलना में कम होती है, जिससे छोटे किसानों के लिए ये सुलभ हो जाते हैं.

इसलिए किसान के लिए जरुरी है कि, खेती में सबसे अधिक काम आने वाले यंत्र रोटावेटर का चुनाव किसान अपनी जमीन, जेब और जरुरत के अनुसार करे. ये यंत्र आपके खेती के अनेक काम कम लागत और कम समय में निपटाएगा.

Agriculture Job : कृषि क्षेत्र में मौके हजार, है आपका इंतजार

देश की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का बड़ा योगदान है और लगभग 70 फीसदी आबादी कृषि क्षेत्र से जुड़ी है. यही वजह है कि देश के इस क्षेत्र में बहुत सारे रोजगार भी मौजूद हैं लेकिन अनेक लोगों को ध्यान इस तरफ आता ही नहीं है, इसलिए जरूरी है कि इधर-उधर हवा में हाथ-पैर मारने के बजाय कृषि सेक्टर में रोजगार के अवसर तलाश किए जाएं. नौजवान छात्र पढ़ाई में कृषि जैसे विषयों को शामिल करें, जो आपके लिए रोजगार की राह आसान करेंगे.

कृषि क्षेत्र में अनेक मौके

कृषि क्षेत्र बहुत बड़ा है इसलिए इसमें रोजगार के अनेक रास्ते भी खुलते हैं, जो अनेक युवा छात्र-छात्राओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. आज इस क्षेत्र में अनेक नौकरियों में लाखों रुपए की सैलरी है, जिससे आने वाला कल भी सुरक्षित है. दिनों – दिन आबादी बढ़ रही है. ऐसे में कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उत्पाद करना होता है, तो रोजगार के मौके भी बढ़ने हैं, इसलिए आज ही तय करें कि हम कृषि क्षेत्र में अपना भी योगदान देंगे.

एग्रीकल्चर इंजीनियर की बढ़ती मांग

आजकल खेती करने के तरीके बदल गए हैं. खेती में बड़े पैमाने पर कृषि यंत्रों का उपयोग किया जाने लगा है. ऐसे में कृषि अभियंता बनने की राह आप चुन सकते हैं. इस क्षेत्र में जाने के लिए आप एग्री-इंजीनियरिंग में बीटेक कर सकते हैं. इस विधा की पढाई कर आप कृषि कौशल में एक्सपर्ट बन सकते हैं और मशीनों का निर्माण कर सकते हैं. आप एग्रीकल्चर इंजीनियर बन कर अत्याधुनिक कृषि मशीनों का निर्माण, उसकी डिजाइनिंग आदि कर सकते हैं. अनेक कृषि यंत्र निर्माताओं को आप जैसे लोगों की तलाश रहती है. इसके अलावा आप सरकारी नौकरी में भी जा सकते हैं.

बनें कृषि फार्म मैनेजर, करें कमाई

खेती से उत्पादन मिलने के बाद जरूरत होती है फार्म मैनेजर की, जिसका काम आपके फार्म को मैनेज करना होता है. कृषि उत्पाद को स्टॉक करना, उसका सही रख-रखाव करना और उसे सही समय पर सही रेट में बेचना. कृषि फार्म मालिक को अच्छा मुनाफा कमा कर देना भी एक फार्म मैनेजर की जिम्मेदारी होती है. इस क्षेत्र में जाने के लिए आपको बिजनेस या कृषि क्षेत्र से ग्रेजुएट होना जरूरी है. अगर आप बीबीए और एमबीए हैं और कृषि क्षेत्र से आपका लगाव है तो आप इस फील्ड में आप फार्म मैनेजर बन सकते हैं.

गुणवत्ता के लिए बनें फूड साइंटिस्ट 

फूड साइंटिस्ट का रिश्ता उपभोक्ता से जुड़ा है. इसके लिए खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता में सुधार करना, उसमें मौजूद पोषण तत्वों की जांच करना और लैब टेस्ट के जरिए उपभोक्ताओं तक गुणवत्ता युक्त खाद्य पहुंचाना फूड साइंटिस्ट का काम होता है. इस में नौकरी पाने के लिए फूड साइंस, केमिस्ट्री या माइक्रोबायोलॉजी जैसे विषयों से ग्रेजुएट होना जरूरी है.

बनें कृषि सलाहकार, बनें मददगार

अनेक नए किसान ऐसे होते हैं जो खेती तो करते हैं लेकिन उन्हें कृषि से जुड़ी कुछ चीजें पता नहीं होती हैं, तो वे कृषि सलाहकार की मदद लेते हैं. राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार समय-समय पर कृषि सलाहकार पद के लिए नियुक्ति करती रहती है. इन पदों को लिए कृषि विज्ञान से ग्रेजुएट होना जरूरी है. कृषि सलाहकार का काम होता है किसानों को क्रॉप मैनेजमेंट, खाद बीज, कीटनाशक, खाद उर्वरक आदि के बारे में देना.

देश की तरक्की में दें योगदान, बनें कृषि वैज्ञानिक

कृषि क्षेत्र और देश की तरक्की में कृषि वैज्ञानिकों का बहुत बड़ा हाथ है. यह कृषि की उत्पादकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक तकनीकियों के जरिए किसानों की राह आसान करते हैं. कृषि वैज्ञानिक बनने के लिए अनेक क्षेत्र हैं, जिनमें पादप प्रजनन, मृदा विज्ञान और कीट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में शोध करते हैं और नई फसल किस्मों को विकसित करने, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करने और प्रभावी खेती के तरीकों का सुझाव देने के लिए किसानों के साथ काम करते हैं. इसके लिए आपको एमएससी के बाद पीएचडी करनी होगी.

 

Farm Machinary: कृषि यंत्रों के साथ उड़ान भर रही हैं महिला किसान

कभी खेती का एक दौर था, जब किसान और उसके परिवार के लोग दिन-रात खेती में लगे रहते थे और जब छमाही फसल की रकम हाथ आती तो उससे पहले ही बनिए, काश्तकारों और पिछले लेन-देन में ही रकम बराबर हो जाती थी और किसान फिर खाली हाथ. बस, बचता था तो गुजारा करने लायक कुछ अनाज और भूसा जो उनके परिवार और पशुओं का पेट भरने के काम आता था. अब कृषि क्षेत्र में महिला किसान भी कृषि यंत्रों को धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही हैं और खेती में अपनाअलग मुकाम बना रही हैं. जानिए, उन कृषि यंत्रों के बारे में जो बन रहे हैं उनके मददगार-

महिला किसानों की बड़ी जिम्मेदारी 

जी हां, यह कुछ सालों पहले की हकीकत है, जब महिला किसान खुरपी और दरांती या फावड़ा लेकर दिन-रात खेतों में मेहनत करती थीं और किसान मुंह-अंधेरे ही बेलों की जोड़ी लेकर खेतों में जुताई करने या सिंचाई या अन्य कोई भी काम हो, करने चला जाता था और चढ़ती दोपहरी में महिलाएं फिर उनके लिए खाना लेकर खेतों में पहुंचती थीं. दोपहर बाद फिर पशुओं के लिए चारा-पानी करना, यह सब भी महिला किसानों के जिम्मे था.

कृषि यंत्रों ने कैसे बदली महिलाओं की जिंदगी

लेकिन अब किसानों के हालात बदल रहे हैं. किसान महिलाओं के लिए भी अनेक तरह के कृषि यंत्र मौजूद हैं जो उनके खेती के कामों को आसान और लाभकारी बना रहे हैं. किसान को कृषि यंत्र आत्मनिर्भर बना रहे हैं. महिलाएं भी पारंपरिक तरीके छोड़कर आधुनिक यंत्रों की सहायता से कम समय, कम मेहनत और कम लागत में अधिक उपज और लाभ कमा रही हैं. अब अनेक कृषि यंत्र भी महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं.

महिलाओं के लिए ये हैं खास कृषि यंत्र 

अब महिला किसान साइकिल वीडर, रोटरी डिबलर, मक्का सेलर, पावर वीडर और सोलर ड्रायर जैसे यंत्रों को बड़ी आसानी से इस्तेमाल कर रही हैं. साइकिल वीडर जैसे यंत्र विशेष रूप से सब्जी उत्पादन में सहायक होते हैं, जिससे खरपतवार का नियंत्रण आसान हो जाता है. ये यंत्र न केवल श्रम को घटाते हैं, बल्कि उत्पादकता को भी बढ़ाते हैं. इसी तरह रोटरी डिबलर सिर्फ मक्का ही नहीं, बल्कि राजमा, चना, मटर जैसी फसलों की बोआई में भी उपयोगी है. यह यंत्र बीजों को उचित दूरी और गहराई पर बोता है, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और पैदावार में इजाफा होता है. अब किसान महिलाएं इन तकनीकों को अपनाकर समय की भी बचत कर खुद खेती कर रही हैं.

हैंड रिजर कृषि यंत्र 

यह हाथ से चलने वाला किसान महिलाओं द्वारा खेत में नाली बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लाइन में मेंड़ पर लगाई जाने वाली सब्जियों की खेती के लिए यह एक सस्ता और आसानी से चलने वाला उपकरण है. मेंड़ बनाने के लिए इसे 2 महिलाओं द्वारा चलाया जाता है.

सीड ड्रिल यंत्र

यह भी हाथ से चलने वाला बीज बुआई यंत्र है. इस यंत्र का उपयोग गेहूं, सोयाबीन, मक्का, चना, अरहर में बोआई के लिए किया जाता है. एक इसे खींचता है तथा दूसरा इसे सही दिशा व गति से धकेलता है. इस उपकरण से एक कतार में बोआई की जा सकती है, इसलिए इसमें निराई-गुड़ाई की लागत कम की जा सकती है.

निराई यंत्र कोनो वीडर 

इस यंत्र से लाइन में बोई गई फसल की निराई बड़ी आसानी से की जाती है. धान की फसल से भी यह खरपतवार को उखाड़कर उसे मिट्‌टी में मिलाने का काम करता है. कोनो निराई यंत्र से मिट्‌टी की ऊपरी सतह को पलटा जा सकता है, जिससे मिट्‌टी में हवा का आवागमन बना है. इस यंत्र को सीधे खड़े होकर चलाया जाता है.

द्विपहिया निराई यंत्र (हो) 

लाइन में बोई गई फसल से खरपतवार उखाड़ने व निराई-गुड़ाई के लिए यह एक हस्तचालित उन्नत ‘हो’ निराई यंत्र है. इस द्विपहिया यंत्र ‘हो’ को आगे-पीछे धकेलकर चलाया जाता है. यह यंत्र हर जगह आसानी से उपलब्ध होता है.

मूंगफली फली तुड़ाई यंत्र 

मूंगफली की फलियों को पौधों से अलग करने के लिए इस यंत्र का इस्तेमाल किया जाता है. इस फली तुड़ाई यंत्र (स्ट्रिपर) में क्षैतिज दिशा में कंघी के आकार की धातु की पटि्‌टयां लगाई गई हैं. मूंगफली के तुड़ाई के लिए मूंगफली के पौधों को कंघीनुमा पटि्‌टयों में फंसाकर खींचा जाता है. इस प्रकार पौधे से मूंगफलियां अलग हो जाती हैं. इस मूंगफली अलग करने वाले यंत्र पर एक-साथ 4 महिलाएं कार्य कर सकती हैं और कम समय में अधिक काम किया जा सकता है.

मूंगफली फोड़क यंत्र

यह यंत्र मूंगफली फोड़ने के लिए खासकर ग्रामीण महिलाओं के लिए बनाया गया है. यह भी एक हस्तचालित उपकरण है. यह फली को फोड़कर दाने को अलग करता है. इस उपकरण को खड़े होकर आसानी से महिलाओं द्वारा चलाया जाता है. इस यंत्र से एक बार में लगभग 2 किलो मूंगफली फोड़ने के लिए डाली जा सकती हैं. इस यंत्र की कार्य-क्षमता 40 किलो प्रति घंटा है और एक महिला द्वारा ही इस यंत्र को चलाया जाता है.

सीड प्लांटर (डिबलर) 

बीज बोने वाले इस यंत्र से कई प्रकार के बीजों की बोआई की जा सकती है. यह यंत्र छोटे खेतों और पहाड़ी क्षेत्रों में सोयाबीन, ज्वार, चना तथा मक्के की बोआई के लिये उपयुक्त हैं. इस यंत्र से लाइन में बोआई की जाती है, जिससे खरपतवार के नियंत्रण की लागत में कमी आती है.

मक्का शेलर यंत्र 

महिलाओं के लिए यह हाथ से चलाया जाने वाला यह यंत्र है जो छीले गए भुट्‌टों से मक्के के दाने अलग करता है. इस यंत्र में भुट्टे को डालकर घुमाया जाता है, जिससे दाने अलग हो जाते हैं. इस यंत्र की कार्यक्षमता 20-25 किलो प्रति घंटा है. इसे केवल एक महिला द्वारा ही चलाया जा सकता है.

रोटरी मक्का शेलर यंत्र

यह यंत्र भी छीले गए मक्के के भुट्‌टों से दाने अलग करने के लिए उपयोगी यंत्र है. इस यंत्र को चलाने के लिए एक हाथ से भुट्‌टे को मशीन में डाला जाता है तथा दूसरे हाथ से उपकरण को चलाया जाता है. छीले गए भुट्‌टे की गुल्ली दूसरी ओर सिरे से बाहर निकल आती है और मक्का के दाने अलग हो जाते हैं.

पैडलचालित धान थ्रेशर

यह महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाला धान थ्रेसर यंत्र है. इस थ्रेशर में एक सिलेंडर लकड़ी या एल्यूमीनियम स्ट्रिप्स के साथ होता है. इस थ्रेशर में वायर लूप बनाकर उन्हें इन पट्‌टियों पर वेल्ड करके जोड़ा गया है. पैर के पैडल से पॉवर ट्रांसमिशन सिस्टम के माध्यम से एक रोटरी गति दी जाती है. धान के बंडलों को इस घूमते हुए सिलेंडर पर पकड़कर रखा जाता है, जिससे धान की थ्रेशिंग होती है. इसकी यंत्र की कार्यक्षमता 35 किलो प्रति घंटा है. इससे धान की थ्रेशिंग के दौरान झुककर कार्य करने की आवश्यकता नहीं होती. धान की झड़ाई आसानी से हो जाती है, जबकि पारंपरिक तरीके से धान के बंडल को बार-बार पटका जाता है जब पुआल से धान अलग होता है.

अनाज सफाई यंत्र 

महिलाओं द्वारा हाथ से चलने वाले इस द्विछलनी अनाज सफाई यंत्र से अनाज की सफाई की जाती है. यह थ्रेशिंग के बाद अनाज में मौजूद ठूंठ, भूसी और मिट्‌टी आदि को साफ करने का काम करता है. इस अनाज सफाई यंत्र से गेहूं, चना, सोयाबीन तथा अन्य अनाजों और दलहनी फसलों से अलग करता है. इस यंत्र में सफाई के लिए अनाज को तय मात्रा में डाला जाता है.

पैडलचालित अनाज सफाई यंत्र 

इस मशीन का उपयोग अनाजों की सफाई व श्रेणीकरण के लिए किया जाता है. इसकी कार्यक्षमता 330 से 880 किलोग्राम प्रति घंटा है. इसमें 0.5 अश्वशक्ति की सिंगल फेज बिजली मोटर लगी होती है.

कृषि यंत्र बैंक शुरू कर सकती हैं महिलाएं 

महिला किसान चाहें तो वे गांव स्तर पर छोटे कृषि यंत्रों का ‘कृषि यंत्र बैंक’ शुरू कर सकती हैं, जिससे अन्य महिलाएं भी लाभ उठा सकती हैं. इससे समूह आधारित आय को भी बढ़ावा मिलेगा. इन यंत्रों की मदद से महिलाएं खेती को सिर्फ जीविका का साधन नहीं, बल्कि किसान उद्यमी बन सकती हैं.

देखा जाए तो अब महिला किसान भी कृषि यंत्रों का उपयोग कर खेती को कहीं अधिक लाभकारी बना रही हैं और अनेक महिलाएं तो फल ,अनाज, सब्जी की प्रोसेसिंग कर अपना रोजगार भी कर रही हैं.

 

Agricultural Machinery : निराई – गुड़ाई के लिए उपयोगी यंत्रों की जानकारी

पुराने समय में हमारे देश की खेती ज्यादातर पशुओं पर निर्भर रही है, लेकिन अब खेती में अनेक बदलाव हो रहे हैं और जो काम कभी मजदूरों द्वारा कराए जाते थे, वे काम अब कृषि यंत्रों द्वारा होने लगे हैं. समय के साथ होने वाले ये बदलाव खेती की राह आसान बना रहे हैं. पहले निराई – गुड़ाई जैसे काम के लिए काफी मजदूर लगाने पड़ते थे, जिसमें काफी समय भी लगता था, लेकिन अब कुछ ही घंटों में इन कामों को निबटाया जाता है.

किसानों तक पहुंच बनाते कृषि यंत्र

आजकल अनेक कृषि यंत्र निर्माता हर छोटे – बड़े किसान की जरूरत को समझते हुए उनके अनुसार ही कृषि यंत्रों का निर्माण करते हैं, जो यंत्र किसानों की पहुंच में भी हों और उनकी कसौटी पर भी खरे उतरें. खेती में निराई – गुड़ाई करने वाले आज अनेक तरह के कृषि यंत्र मौजूद हैं, जिनमें हाथ से चलने वाले यंत्रों के अलावा शक्तिचालित कृषि यंत्र भी हैं. जानिएं कौन-से यंत्र आपके लिए है उपयोगी-

‘पूसा’ पहिए वाला हो वीडर: कम दाम, काम करे तमाम

यह बहुत ही सरल और साधारण कम कीमत वाला निराई – गुड़ाई करने वाला यंत्र है. इस यंत्र में खड़े हो कर निराई – गुड़ाई की जाती है. इस यंत्र को खड़े हो कर आगे की ओर धकेल कर चलाया जाता है. इस में निराई – गुड़ाई के लिए लगे ब्लेड को गहराई के अनुसार ऊपर – नीचे किया जा सकता है और यंत्र को चलाते समय हैंडल को अपने हिसाब से एडजस्ट किया जा सकता हैं. यह कम खर्चीला यंत्र है. इस का वजन लगभग 8 किलोग्राम है. इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है.

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‘पूसा’ चार पहिए वाला वीडर

एकसार खेत से कतार में बोई गई उस फसल से खरपतवार निकालने के लिए यह अच्छा यंत्र है, जिन पौधों की कतारों के बीच की दूरी 40 सैंटीमीटर से अधिक है, क्योंकि इस मशीन का फाल 30 सैंटीमीटर चौड़ा है. इस मशीन को पकड़ कर चलाने वाले हैंडल को भी अपनी सुविधा के हिसाब में एडजस्ट कर सकते हैं.
इस यंत्र का वजन लगभग 11-12 किलोग्राम है. इसे फोल्ड कर के आसानी से उठा कर कहीं भी ले जाया जा सकता है. उपरोक्त दोनों यंत्र कृषि अभियांत्रिकी संभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा, नई दिल्ली द्वारा बनाए गए हैं. इनके लिए आप इस संस्थान से संपर्क कर सकते हैं.इसके अलावा अनेक कृषि यंत्र बनाने वाले भी इस यंत्र को बना रहे हैं, इसलिए आप अपने नजदीक से भी इस यंत्र को खरीद सकते हैं. यह यंत्र बहुत ही कम कीमत में उपलब्ध होगा.

लाइन में बोई गई फसलों के लिए शक्तिचालित पावर टिलर यंत्र

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पावर टिलर निराई – गुड़ाई करने वाला शक्तिचालित टिलर है. यह लाइन में बोई गई फसलों सोयाबीन, चना, अरहर, ज्वार, मक्का, मूंग आदि फसलों में निराई – गुड़ाई के लिए उपयोगी है. इस यंत्र को 8-10 हौर्सपावर के पावर टिलर में जोड़ कर चलाया जाता है.

पावर वीडर निराई – गुड़ाई यंत्र

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पेट्रोल से चलने वाला यह छोटा पावर वीडर निराई – गुड़ाई के लिए अच्छा यंत्र है. इस में 2 स्ट्रोक इंजन लगा होता है. इस से 3 से 4 इंच गहराई तक निराई – गुड़ाई होती है. इस के लिए जमीन में लगभग 25 फीसदी नमी होना जरूरी है.

खेती में निराई – गुड़ाई के लिए कृषि यंत्रों का इस्तेमाल दिनों – दिन बढ़ रहा हैं, इसलिए आप भी इस तरह के कृषि यंत्रों का इस्तेमाल कर खेती की लगने वाली लागत और समय की बचत कर अच्छी उपज ले सकते हैं.