Nematode: यदि पौधों की वृद्धि रुक जाए, पत्तियां पीली पड़ने लगें अथवा जड़ों में गांठें दिखाई दें तो यह सूत्रकृमि (Nematode) प्रकोप का संकेत हो सकता है. आइए जानते हैं विशेषज्ञों से खास बातें.

महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर में 23 फरवरी, 2026 को जनजाति किसानों हेतु एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, बांसवाड़ा में हुआ.

कार्यक्रम का उद्देश्य जनजाति क्षेत्रों के किसानों को सूत्रकृमि (निमेटोड) जनित रोगों की पहचान, रोकथाम एवं समेकित प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना था, जिससे वे अपनी फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि कर सकें.

क्या होते हैं सूत्रकृमि

डॉ. हेमेंद्र शर्मा ने बताया कि सूत्रकृमि (Nematode) सूक्ष्म जीव होते हैं जो मृदा एवं पौधों की जड़ों में रहकर फसलों को गंभीर क्षति पहुंचाते हैं. इनके प्रकोप से पौधों की जड़ें गांठदार हो जाती हैं, पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित होता है तथा उत्पादन में खासी कमी आती है.

डॉ. हेमंत शर्मा ने समेकित प्रबंधन (आईपीएम) तकनीक पर जोर देते हुए जैविक, यांत्रिक एवं रासायनिक उपायों के संतुलित उपयोग की सलाह दी. उन्होंने विशेष रूप से पॉलीहाउस में उगाई जाने वाली सब्जी फसलों में सूत्रकृमियों की समस्या पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संरक्षित खेती में निरंतर एक ही फसल लेने से इनका प्रकोप बढ़ सकता है.

इसके समाधान हेतु उन्होंने फसलचक्र अपनाने, सौर्यकरण (सोलराइजेशन), जैव-नियंत्रण एजेंट्स के उपयोग तथा स्वस्थ बीजों का उपयोग करना चाहिए.

कैसे करें सूत्रकृमि की रोकथाम

सूत्रकृमि विशेषज्ञ डॉ. चंद्र प्रकाश नामा ने फलदार वृक्षों में सूत्रकृमियों के प्रभावी प्रबंधन पर बताया कि अनार, अमरूद, साइट्रस एवं अन्य फल वृक्षों में सूत्रकृमि (Nematode) जड़ों को प्रभावित कर वृक्षों की वृद्धि एवं फलन क्षमता को कम कर देते हैं.

उन्होंने मृदा परीक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि नियमित परीक्षण से समस्या की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उचित उपचार संभव है. किसानों को जैविक खाद, नीम खली, ट्राइकोडर्मा एवं अन्य जैव-एजेंट्स के प्रयोग के लाभ बताए तथा रासायनिक नियंत्रण उपायों को अंतिम विकल्प के रूप में अपनाना चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

सूत्रकृमियों की क्या है पहचान

कृषि विज्ञान केंद्र, बांसवाड़ा के प्रभारी डॉ. बी. एस. भाटी ने किसानों को सूत्रकृमियों के प्रमुख लक्षणों की पहचान के बारे बताया कि यदि पौधों की वृद्धि रुक जाए, पत्तियां पीली पड़ने लगें अथवा जड़ों में गांठें दिखाई दें तो यह सूत्रकृमि (Nematode) प्रकोप का संकेत हो सकता है.

किसनों को मिले निःशुल्क स्प्रेयर एवं उन्नत सब्जी बीज

प्रशिक्षण के उपरांत सभी प्रतिभागी किसानों को ऑटोमेटिक स्प्रेयर एवं उन्नत सब्जी बीजों का निःशुल्क वितरण किया गया, ताकि वे प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को अपने खेतों में व्यावहारिक रूप से लागू कर सकें.

किसानों के लिए इस प्रकार के वैज्ञानिक प्रशिक्षण अत्यंत लाभकारी होते हैं. खासकर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जनजाति क्षेत्र के किसानों की आय वृद्धि, सतत कृषि विकास एवं आधुनिक तकनीकों के प्रसार में खासा मददगार साबित होगा.

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