Makar Sankranti: देश के ज्यादातर त्यौहार खेती-किसानी से जुड़े हैं और ऐसा ही एक त्यौहार है मकर संक्रांति (Makar Sankranti) , जिसे भारत के अनेक प्रदेशों में अपने-अपने ढंग से लोग मनाते हैं. यह त्यौहार नई फसल के स्वागत करने का भी तरीका है. हर साल यह 14-15 जनवरी को मनाया जाता है. इस दिन लोग खुशियां मनाते हैं और स्वादिष्ट खाना, खिचड़ी आदि बनाते हैं. इसके अलावा मकर संक्रांति हर साल यह संकेत देता है कि अब आने वाले दिन बड़े होने शुरू हो जाएंगे. भारत के अलग-अलग प्रदेशों में मकर संक्रांति का अंदाज अलग होता है. आइए जानते हैं कुछ खास राज्यों में यह त्यौहार कैसे मनाया जाता है.

किसानों का उत्सव है मकर संक्रांति

जनवरी के मध्य में आने वाला यह त्यौहार मूल रूप से एक फसल उत्सव, मकर संक्रांति (Makar Sankranti) कृतज्ञता, आनंद और किसान की खुशहाली का प्रतीक है, जिसे अनेक समुदायों के लोग अपने-अपने ढंग से मनाते हैं. मकर संक्रांति का महत्त्व किसान और खेती के लिए खास है. यह पर्व किसान को शीत ऋतु की फसल कटाई के अंत और अगली फसल की तैयारियों की शुरुआत का संकेत देता है. यह त्यौहार भारतीय कृषि जीवन के तौर-तरीकों से गहराई से जुड़ा हुआ है, जहां किसान इसे उत्सव के रूप में मनाते हैं. इस त्यौहार की सबसे प्रमुख तिल और गुड़ से बनी पारंपरिक मिठाइयां हैं, जो सर्दियों में शरीर को गर्म रखती हैं और सेहत के लिए भी लाभकारी होती हैं.

 

पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी

Makar Sankranti

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का त्यौहार पूरे भारत में अनेक तरीकों के साथ मनाया जाता है, जो देश के अलग-अलग राज्य के लोगों के रहन-सहन की विविधता को दर्शाता है. हरियाणा और पंजाब देश के कृषि प्रधान राज्य हैं और दोनों ही राज्यों के किसान और खेती समृद्ध हैं. पंजाब और हरियाणा के लोग लोहड़ी पर्व के रूप में मनाते हैं. हर गली-मोहल्ले में एक जगह पर अलाव जलाकर, लोकगीतों और भांगड़ा जैसे पारंपरिक नृत्यों पर महिलाएं और पुरुष सज-धज कर नृत्य कर आनंद के साथ इसको मनाते हैं.

तमिलनाडु में पोंगल

देश के दक्षिण राज्यों में इसको पोंगल के नाम से मनाते हैं. खासकर तमिलनाडु प्रदेश में इस त्यौहार को बड़े जोर-शोर से मनाया जाता है, जो 4 दिनों चलता है. इस मौके पर चावल, गुड़ और दूध से बना पोंगल नामक एक विशेष व्यंजन तैयार किया जाता है.

पशुओं का सम्मान है पोंगल

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) को पोंगल कहा जाता है. यह त्यौहार किसानों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता दिखाने का अवसर है. चार दिन तक चलने वाले इस त्यौहार के समय घरों को सजाया जाता है और स्वादिष्ट पकवान बनते हैं. लोग अपने परिवार और पड़ोसियों के साथ मिलकर खुशियां मनाते हैं. इस दिन पशुओं का सम्मान करना भी खास होता है.

Makar Sankranti

पतंगों का पर्व है यह

Makar Sankranti

गुजरात और राजस्थान में यह पतंगों का उत्सव है, जहां रंग-बिरंगी पतंगें आकाश को चूमती नजर आती हैं. पतंग उड़ाना यहां का खास आकर्षण हैं, जहां आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से पटा रहता है, जो स्वतंत्रता और आनंद का प्रतीक हैं. इस समय पतंग महोत्सव में देश-विदेश के अनेक लोग हिस्सा लेते हैं और पतंग उड़ाने व काटने की प्रतियोगिताएं भी होती हैं.

महाराष्ट्र में मेलजोल बढ़ाता पर्व

तिल और गुड़ इस त्यौहार की जान है और इन दिनों बाजार में तिल और गुड़ की बनी अनेक तरह की मिठाइयां, लड्डू आदि उपलब्ध होते हैं. महाराष्ट्र में लोग ‘तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला’ कहकर तिलगुल (तिल और गुड़ से बनी मिठाई) का आदान-प्रदान करते हैं, जिससे सद्भाव और मेलजोल को बढ़ावा मिलता है.

रिश्तों को मजबूत बनाता है

भारत के कुछ इलाकों में इसे खिचड़ी का त्यौहार भी कहा जाता है और इस दिन खिचड़ी के नाम पर अनेक तरह की तिल की बनाई गई मिठाइयां, मक्का के फुले, मूंगफली, अनेक दालें, चावल और अनेक तरह के खाद्य पदार्थ बेटी के घर भेजे जाते हैं, जो रिश्तों को मजबूती देते हैं. मकर संक्रांति (Makar Sankranti) हमें नई शुरुआत, खुशियां और किसानों का सम्मान करना सिखाती है.

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