Cattle Breeders : लैंगिक वीर्य के मूल्यों में कमी से पशुपालकों को मुनाफा

Cattle Breeders : मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग  (डीएएचडी) ने पिछले दिनों सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पशुपालकों के लिए वर्चुअल माध्यम से एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया.

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के  राज्य मंत्री प्रो.एसपी सिंह बघेल ने की. पशुपालन व डेयरी विभाग की सचिव अलका उपाध्याय भी इस  कार्यक्रम में उपस्थित थीं.

राज्य मंत्री, प्रो एसपी सिंह बघेल ने इस कार्यक्रम को पशुपालकों के साथ सीधे संपर्क का एक बहुमूल्य अवसर बताया. उन्होंने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में विभाग के प्रयासों की प्रशंसा की और लैंगिक-वर्गीकृत वीर्य (एसएसएस) जैसी पहलों के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि लैंगिकवर्गीकृत वीर्य के मूल्यों में भारी कमी आई है, जिस से यह देश भर के किसानों के लिए काफी सुलभ और सस्ता हो गया है.

प्रो. एसपी सिंह बघेल ने किसानों से इस सत्र में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया क्योंकि इस से उन्हें पशुपालन में व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए ज्ञान को “प्रयोगशाला से खेत तक” पहुंचाने में सहायता मिलेगी. उन्होंने विभिन्न राज्यों के किसानों से बातचीत भी की और उन के पशुधन, पशु चिकित्सा सेवाओं तक उन की पहुंच और विभागीय योजनाओं के बारे में उन की  जागरूकता के बारे में जानकारी प्राप्त की.

पशुपालन एवं डेयरी विभाग की सचिव अलका उपाध्याय ने पशुधन स्वास्थ्य की सुरक्षा और बीमारियों केप्रसार को रोकने के लिए समय पर टीकाकरण के महत्व पर बल दिया. उन्होंने जूनोटिक रोगों की  अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की, जो पशुओं से मनुष्य में फैल सकते हैं. उन्होंने रोग नियंत्रण उपायों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला.

इस के साथ ही, उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने में उन्नत नस्ल सुधार तकनीकों की भूमिका पर भी  बल दिया. उन्होंने किसानों को कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान को अपनी प्रथाओं में लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिस से पशुपालन क्षेत्र के विकास में योगदान मिल सके.

देश के पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 2,000 क्षेत्रों से पशुपालकों ने इस जागरूकता कार्यक्रम में भाग लिया. गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, दमण और दीव, दादरा और नगर हवेली, गोआ, महाराष्ट्र, पुद्दुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से किसान इस कार्यक्रम में शामिल हुए.

इस सत्र में 1 लाख से अधिक पशुपालकों ने भाग लिया. इस कार्यक्रम का  उद्देश्य नस्ल सुधार, टीकाकर, जूनोटिक रोग नियंत्रण और स्वच्छता प्रथाओं सहित पशुपालन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर किसानों को  जागरूक करना था. इस कार्यक्रम में एसएसएस और टीकाकरण पर विशेषज्ञ सत्र और शैक्षिक  वीडियो का प्रदर्शन भी शामिल था.

क्या होता है लैंगिक वर्गीकृत वीर्य

लैंगिक वर्गीकृत वीर्य एक ऐसा वीर्य है जिस में शुक्राणुओं को लिंग के आधार पर अलग किया जाता है, ताकि वांछित लिंग के बच्चे पैदा करने की संभावना बढ़ाई जा सके. इस का प्रमुख फायदा यह है कि पशुधन (जैसे गाय, भेड़) में, किसान अपनी जरूरत के अनुसार नर या मादा संतान ले सकता है. यदि किसान को अपना दूध उत्पादन बढ़ाना है तो वह पशु की मादा संतान अधिक ले सकता है.

पशुपालन और जूनोटिक रोग : जोखिम और जिम्मेदारी

भोपाल : जूनोटिक बीमारियां वे बीमारियां होती हैं जो पशुओं और इनसानों के बीच फैल सकती हैं. ये बीमारियां पशुओं और इंसानों दोनों को प्रभावित कर सकती हैं और कभीकभी गंभीर रूप से ये जानलेवा भी हो सकती हैं. इन से पशुपालकों को अधिक खतरा होता है. पशुओं के साथ ज्यादा समय बिताने से संपर्क बढ़ता है, जिस से जोखिम भी बढ़ता है.

जूनोटिक बीमारियां वास्तव में तब फैलती हैं जब इंसान किसी संक्रमित पशु या उस से जुड़ी वस्तुओं के संपर्क में आता है. कुछ आम जूनोटिक बीमारियों में रेबीज शामिल है, जो पशु के काटने से फैलती है और समय पर टीका न लगवाने पर जानलेवा हो सकती है. ब्रुसेलोसिस संक्रमित पशुओं के दूध या सीधे संपर्क में रहने से फैलती है, जिस से बुखार, जोड़ों में दर्द और गर्भपात हो सकता है.

टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) संक्रमित पशुओं के संपर्क, दूध या मांस के सेवन से फैल सकती है. एंथ्रेक्स संक्रमित जीवित या मृत पशुओं और उन के उत्पादों से फैलता है. बर्ड फ्लू बीमार पक्षियों या उन की बीट के संपर्क से फैलता है, जब कि साल्मोनेला कच्चे मांस, दूध या अंडों के जरीए इंसानों में संक्रमण फैला सकता है. इन जूनोटिक बीमारियों से बचाव के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. बीमार या मरे हुए पशुओं से दूरी बनाए रखें और उन्हें बिना सुरक्षा उपकरणों के न छुएं.

पशुओं के शवों का निबटान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार करें. बच्चों को बीमार पशुओं से दूर रखें. हमेशा दूध को उबाल कर और मांस व अंडों को अच्छी तरह पकाकर ही सेवन करें. पशुओं का नियमित टीकाकरण कराएं, विशेषकर रेबीज और ब्रुसेलोसिस जैसी बीमारियों के टीके जरूर  लगवाएं. पशुओं की देखभाल करते समय दस्ताने, मास्क और अन्य सुरक्षात्मक उपकरणों का उपयोग करें. साफसफाई का ध्यान रखें, पशु बाड़ों और उपकरणों को नियमित रूप से कीटाणुनाशक से साफ करें, और संदिग्ध मामलों में तुरंत पशु चिकित्सक या स्वास्थ्य अधिकारी से संपर्क करें.

जुलाई महीने की 6 तारीख को विश्व जूनोटिक दिवस मनाने का उद्देश्य है लोगों को इन बीमारियों के बारे में जागरूक करना और एक स्वस्थ, सुरक्षित समाज की दिशा में कदम बढ़ाना. पशुपालन से जुड़े सभी लोगों की जिम्मेदारी है कि वे स्वयं सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रखने में योगदान दें.

दुग्ध संग्रहण और मत्स्य उत्पादन दो गुना करें

ग्वालियर : कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक वर्णवाल ने पशुपालन ,डेयरी व मत्स्य उत्पादन को आय की प्रमुख आर्थिक गतिविधि बनाने पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि दुग्ध संग्रहण व मत्स्य उत्पादन को दो गुना करें. उन्होंने बताया कि वर्तमान में 10 लाख लिटर दूध का प्रति दिन संग्रहण हो रहा है. इसे 20 लाख लिटर प्रति दिन किया जाए. उन्होंने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशु नस्ल में सुधार व दुग्ध संग्रहण के लिए प्रभावी कार्य योजना बना कर उस पर अमल करने के निर्देश दिए.

इसी तरह उन्होंने केज कल्चर जैसी विधियां अपना कर मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए भी कहा. उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि मत्स्य व्यवसाइयों के लिए ‘मछुआ समृद्धि योजना’ के तहत स्मार्ट फिश पार्लर बनाने के काम को अधिक महत्त्व दिया जाए. अशोक वर्णवाल ने यह भी कहा कि सांची पार्लर में सांची दूध की बिक्री अवश्य हो, ऐसा न करने वाले पार्लर निरस्त किए जाएं.

दुग्ध संग्रहण बढ़ाने के लिए पशुपालकों को बनाएं कलेक्शन एजेंट

अतिरिक्त मुख्य सचिव पशुपालन उमाकांत उमराव ने सभी जिला कलेक्टरों से कहा कि दुग्ध संग्रहण बढ़ाने के लिए पशुपालकों को कलेक्शन एजेंट बनाएं. इस के लिए उन्हें कमीशन भी दिया जाए. 5 साल तक हर साल 1,000 कलेक्शन एजेंट बनाएं. उन्होंने आगे कहा कि दूध की इकौनोमिक वैल्यू गेहूं व धान से ज्यादा है. दूध उत्पादन को बढ़ावा दे कर हम किसानों की आय में बड़ा इजाफा कर सकते हैं.

सचिव पशुपालन एवं डेयरी सत्येंद्र सिंह ने कहा कि डा. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना और  आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना सहित अन्य योजनाओं की लक्ष्य पूर्ति कर गौ वंश का प्रबंधन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए किया जा रहा है.

अधिक आय वाली फसलें उगाएं और डेयरी व मत्स्य को बनाए कमाई का जरीया

ग्वालियर : मध्य प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक वर्णवाल ने कहा है कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए परंपरागत कृषि को हाई वेल्यू क्रौप (अधिक आय वाली फसल) में शिफ्ट किया जाए. उन्होंने कहा कि किसानों को इस प्रकार की फसलें अपनाने के लिए प्रेरित करें. उन्होंने कहा कि पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्यपालन को आय का अतिरिक्त जरीया न समझे, बल्कि उसे पूर्ण आर्थिक गतिविधि के रूप में लें, जिस से किसानों की आय में अधिक इजाफा हो.

कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक वर्णवाल ने सभी जिला कलेक्टरों से कहा कि वे अपनेअपने जिले में किसानों को परंपरागत खेती के स्थान पर ऐसी फसलें लेने के लिए प्रेरित करें जिस का बाजार में अधिक मूल्य मिल रहा है. इस से किसानों कि आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और किसानों को बेहतर बाजार भी उपलब्ध होगा. उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को आधुनिक तकनीक के साथसाथ कृषि के क्षेत्र में उपयोग में लाई जा रही मशीनरी के लाभों से भी अवगत कराया जाए.

कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक वर्णवाल ने कहा कि वर्तमान समय सूचना का समय है. सोशल मीडिया के माध्यम से भी किसानों के हित में केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाए. आधुनिक तरीके से कृषि कर रहे सफल किसानों की जानकारी अन्य किसानों को मिले इस के लिए भी सोशल मीडिया का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए.

अपर मुख्य सचिव हौर्टिकल्चर अनुपम राजन ने कहा कि उद्यानिकी के क्षेत्र में किसानों को प्रेरित किया जाना चाहिए. इस क्षेत्र के विकास की अपार संभावनाएं हैं. हमारा प्रयास होना चाहिए कि उद्यानिकी का क्षेत्र और बढ़े. किसान उद्यानिकी के क्षेत्र में भी ऐसी फसलों को चुने जिस के बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हों. उन्होंने आगे कहा कि उद्यानिकी के क्षेत्र में कार्य कर रहे किसानों का भी शतप्रतिशत पंजीकरण हो यह पक्का किया जाए. सैंटर फौर एक्सीलैंस के प्रस्ताव जिला कलेक्टर शासन को भेजे, ताकि शासन स्तर पर स्वीकृति प्रदान की जा सके.

कृषि संचालक अजय गुप्ता ने बैठक में उर्वरक के उपयोग व उस की उपलब्धता के संबंध में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि प्रदेश में डीएपी के वैकल्पिक उर्वरकों के बारे में किसानों को विस्तार से बताया जाए. सोशल मीडिया के माध्यम से भी किसानों को यह जानकारी दी जाए. उन्होंने कहा कि डबल लौक सैंटर पर जहां किसान खादबीज लेने आते हैं वहां पर एक बेहतर सैंटर स्थापित किया जाए. केंद्र पर किसानों के बैठने, छाया, प्रकाश व पेयजल की व्यवस्था हो, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो.

आयुक्त सहकारिता मनोज पुष्प ने भी सहकारिता के क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी. उन्होंने जिला कलेक्टरों से अपेक्षा की वे सहकारिता के क्षेत्र में भी निरंतर मोनिटरिंग कर विभागीय कार्यों का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित कराएं.

संभागीय आयुक्त मनोज खत्री ने शुरुआत में ग्वालियर चंबल संभाग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी. सभी जिला कलेक्टरों व मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा अपने अपने जिले के संबंध में इन सभी विभागों से संबंधित लक्ष्य की पूर्ति और गौशालाओं की स्थापना के बारे में जानकारी दी गई.

मध्य प्रदेश के 50 फीसदी गांवों को दुग्ध नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी

Milk Network : बड़वानी 08 जुलाई 2025 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ा कर किसानों और पशुपालकों की आर्थिक उन्नति के लिए प्रतिबद्ध है. इस के लिए प्रदेश के 50 फीसदी गांवों को दूध नेटवर्क में लाने की रणनीति पर कार्य किया जा रहा है. नई 381 दुग्ध सहकारी समितियों का गठन कर 9,500 दूध उत्पादकों को सहकारी डेयरी प्रणाली से जोड़ा गया है.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव रविवार को मुख्यमंत्री निवास में पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे. इस से पहले केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश के लिए डेयरी विकास योजना को क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक संशोधन कर अधिक लाभकारी बनाने के निर्देश दिए थे. अब राज्य में दूध उत्पादन की 72 फीसदी संभावित क्षमता को कवर करने और बाजार पहुंच को 15 फीसदी बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने दूध संग्रहण बढ़ाने, दुधारू पशुओं की नस्ल सुधार, राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से देशी नस्ल के पशुओं के लिए मौडल फार्म विकसित करने, सांची ब्रांड की लोकप्रियता बढ़ाने, भोपाल दुग्ध संघ के अंतर्गत हीफर रियरिंग सैंटर की स्थापना, दूध उत्पादक किसानों को खरीदे गए दूध की कीमत का समय पर भुगतान, डिजीटाइजेशन वर्क की प्रगति की जानकारी प्राप्त कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए.

दुग्ध संघों ने जब ढाई से छह रुपए प्रति लिटर राशि बढ़ाई तब इस मौके पर बताया गया कि प्रदेश के दुग्ध संघों में न सिर्फ दूध का संग्रहण बढ़ रहा है, बल्कि किसानों और दूध उत्पादकों का हित भी सुनिश्चित हो रहा है. दुग्ध संघों में दूध के मूल्यों में ढाई रुपए से ले कर छह रुपए तक प्रति लिटर वृद्धि का कार्य किया है. प्रदेश में दो दुग्ध संघों जबलपुर और ग्वालियर में दूध के संग्रहण में महत्त्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है. जबलपुर और ग्वालियर दुग्ध संघ को दूध उत्पादकों के लंबित भुगतान के लिए 2-2 करोड़ रुपए की कार्यशील पूंजी भी दी गई है.

Mobile veterinary Unit :चलित पशु चिकित्सा इकाई वाहन से पशु के उपचार

Mobile veterinary Unit : शहरों से ले कर दूरदराज में बसे गांवो के निवासियों को अपने पशुओं का इलाज कराने में राज्य सरकार द्वारा संचालित “चलित पशु चिकित्सा इकाई” से बड़ी सुविधा मिल रही है. एक फोन कौल पर चलित पशु चिकित्सा इकाई का वाहन, पशु के उपचार के लिए मौके पर पहुंच जाता है. ग्वालियर चंबल संभाग में वर्ष 2024-25 में चलित पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से ग्वालियर जिले के 9,607 पशुओं सहित दोनो संभागों में कुल 83 हजार 29 पशुओं का उपचार किया गया है.

ग्वालियर व चंबल संभाग में वर्तमान में 56 चलित पशु चिकित्सा इकाई चलाई जा रही हैं. इन में से ग्वालियर जिले में 6, दतिया में 4, शिवपुरी में 9, गुना में 8, अशोकनगर में 5, भिंड में 8, मुरैना में 9 व श्योपुर जिले में 7 इकाई चल रही है.

पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) के दौरान ग्वालियर संभाग के अंतर्गत चलित पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से ग्वालियर जिले में 9,607, दतिया में 6,256, शिवपुरी में 16,756, गुना में 10,178 व अशोकनगर जिले में 9,573 पशुओं का उपचार किया गया.

इसी तरह चंबल संभाग के अंतर्गत भिंड जिले में 9,568, मुरैना में 13,758 व श्योपुर जिले में 7, 333 पशुओं का उपचार चलित पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से बीते वित्तीय वर्ष के दौरान किया गया.

इस चलित पशु चिकित्सा इकाई के माध्यम से कुत्ता व बिल्ली का इलाज कराने के लिए 300 रूपए व अन्य पशुओं के इलाज के लिए 150 रूपए प्रति पशु शुल्क निर्धारित है. कोई भी व्यक्ति टोल फ्री नं.1962 पर कौल कर इस सुविधा का लाभ उठा सकता है.

Milk Plant : जम्मू में बना 50 हजार टन क्षमता वाला दूध संयंत्र

Milk Plant : केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने पिछले दिनों कश्मीर के शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शालीमार कन्वेंशन सैंटर में आयोजित एक समारोह में कहा कि नीली क्रांति, मत्स्यपालन व जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसी प्रमुख योजनाओं ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मूकश्मीर में मत्स्यपालन प्रणाली को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो बड़ी उपलब्धि है.

इस अवसर पर जम्मूकश्मीर के कृषि उत्पादन और पंचायती राज मंत्री जाविद अहमद डार, पशुपालन और डेयरी विभाग की सचिव अलका उपाध्याय व केंद्र और जम्‍मूकश्‍मीर प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथसाथ कश्मीर घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसान भी मौजूद थे.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने ग्रामीण आय और पोषण सुरक्षा के इंजन के रूप में जम्मूकश्मीर के पशुधन और मत्स्यपालन क्षेत्रों के विकास के लिए भारत सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि देश भर में 10 करोड़ से अधिक किसान अपनी आजीविका के लिए पशुधन पर निर्भर हैं, जिन में से 90 फीसदी से अधिक डेयरी पशु छोटे और सीमांत किसानों के पास है और यह क्षेत्र ग्रामीण घरेलू आय में 12-26 फीसदी का योगदान देता है, जिस में डेयरी क्षेत्र की भागीदारी में 70 फीसदी से अधिक है. उन्‍होंने बताया कि डेयरी सहकारी सदस्यता में 32 फीसदी महिलाओं की हिस्सेदारी है, जो समावेशी विकास में डेयरी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि जम्मूकश्मीर में दूध उत्पादन में 47 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है, जहां 2014-15 में दूध उत्पादन 19.50 लाख टन था वह 2023-24 में बढ़ कर 28.74 लाख टन हो गया है. जबकि केंद्र शासित प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 413 ग्राम प्रतिदिन है.

मछलियों के गुणवत्तापूर्ण बीज सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने जम्मूकश्मीर सरकार के लिए डेनमार्क से रेनबो और ब्राउन ट्राउट म‍छलियों के 13.40 लाख आनुवंशिक रूप से उन्नत अंडे (ओवा) के आयात की सुविधा प्रदान की है. इस से ट्राउट मछलीपालकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज की उपलब्धता में काफी सुधार हुआ है. इस का उत्पादन 2020-21 में 650 मीट्रिक टन से बढ़ कर 2023-24 में 2,380 मीट्रिक टन हो गया है, जो की 266 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है.

Milk Plant

इस से पहले श्रीनगर में सिविल सचिवालय में एक बैठक में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और जम्मूकश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने संयुक्त रूप से जम्मूकश्मीर के पशुपालन और मत्स्यपालन क्षेत्रों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. उन्‍होंने सतवारी जम्मू में 50 हजार टन प्रतिदिन क्षमता वाले अल्ट्रा हाई टैंमपरेचर (यूएचटी) दूध प्रसंस्करण संयंत्र का उद्घाटन किया.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि हम आज यहां आप की चुनौतियों को सुनने, समझने और साथ मिल कर काम करने के लिए आए हैं. जहां गुंजाइश है, वहां काम होना चाहिए. उन्होंने केंद्र और जम्मूकश्मीर सरकार के बीच संयुक्त प्रयासों का आह्वान किया, ताकि संभावनाओं को परिणामों में बदला जा सके. उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास तभी हासिल किया जा सकता है जब आर्थिक विकास टिकाऊ आजीविका के माध्यम से जमीनी स्तर तक पहुंचे.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंग ने आगे कहा कि आज युवाओं को सूक्ष्म और लघु स्तर के पशुधन व मत्स्यपालन उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने से रोजगार निर्माण व समावेशी विकास किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण और किसानों को बाजारों से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड जैसे प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों को शामिल करते हुए एक विस्तृत योजना तैयार की जा रही है.

उन्होंने लोगों को यह भी बताया कि भारत सरकार ने हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए पीएमएमएसवाई के अंतर्गत 852 करोड़ रुपए देने की प्रतिबद्धता जताई है, जिस में विशेष रूप से जम्मूकश्मीर के लिए 300 करोड़ रुपए शामिल हैं. इस से उत्पादन, उत्पादकता, बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जा सकेगा.

उन्होंने आगे यह भी कहा कि जम्मूकश्मीर का सालाना मछली उत्पादन 2013-14 में 20,000 मीट्रिक टन से बढ़ कर 2024-25 में 29,000 मीट्रिक टन हो गया है, जबकि ट्राउट मछली उत्पादन 262 मीट्रिक टन से बढ़ कर 2,380 मीट्रिक टन हो गया है, जो 800 फीसदी से भी अधिक की बढ़ोतरी है. उन्होंने कहा कि ट्राउट मछली बीज का उत्पादन 9 मिलियन से बढ़ कर 15.2 मिलियन हो गया है, जबकि कार्प मछली बीज उत्पादन 40 मिलियन से बढ़ कर 63.5 मिलियन हो गया है.

केन्‍द्रीय मंत्री ने बताया कि मत्स्यपालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि के माध्यम से शीत जल मत्स्यपालन में 120 करोड़ रुपए से अधिक के निजी निवेश का समर्थन किया गया है. साथ ही, जम्मूकश्मीर की शीत जल मत्स्यपालन की अपार संभावनाओं को देखते हुए मंत्रालय ने अनंतनाग को शीत जल मत्स्यपालन क्लस्टर के रूप में औपचारिक रूप से नामित किया है, जिस में कुलगाम और शोपियां साझेदार जिले हैं, जो स्थायी आजीविका उत्पन्न करने के लिए एकीकृत मूल्यश्रृंखला विकास पर ध्यान केंद्रित करेंगे.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना चरण-II के तहत जम्मूकश्मीर में एक एकीकृत एक्वा पार्क के लिए 100 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जो समग्र शीत जलीय कृषि विकास के लिए एक मौडल के रूप में काम करेगा.

Seminar : लुवास में “पशु चिकित्सा विज्ञान” विषय पर संगोष्ठी

Seminar : 24 जून, 2025 को लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार द्वारा वैश्विक शिक्षा और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस संगोष्ठी का विषय “पशु चिकित्सा विज्ञान का भविष्य: प्रवृत्तियां, नवाचार और उत्तर अमेरिका का दृष्टिकोण” था.

यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के परामर्श एवं प्लेसमैंट प्रकोष्ठ द्वारा कुलपति प्रोफैसर डा. नरेश कुमार जिंदल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों को पशु चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे अंतर्राष्ट्रीय स्तर के नवीन अनुसंधानों, तकनीकों और कैरियर के अवसरों से अवगत कराना था.

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रोफैसर डा. पवनीश मदान थे, जो कनाडा स्थित औन्टेरियो वेटेरिनरी कालेज (गुएल्फ विश्वविद्यालय) के बायो मेडिकल साइंस विभाग से हैं. वे पशु प्रजनन जीव विज्ञान और ट्रांसलेशनल रिसर्च में अग्रणी माने जाते हैं.

डा. पवनीश मदान ने अपने ने पशु चिकित्सा विज्ञान के भविष्य को आकार देने वाली उभरती तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि आने वाले सालों में यह क्षेत्र अनेक क्रांतिकारी परिवर्तनों से गुजरेगा, जिन में प्रमुख हैं पुनरुत्पादक उपचार (जैसे स्टेम सेल थैरेपी), जो क्षतिग्रस्त ऊतकों के पुनर्निर्माण में सहायक है; सटीक पशु चिकित्सा देखभाल, जिस में प्रत्येक पशु की जैविक विशेषताओं के अनुसार व्यक्तिगत इलाज सुनिश्चित किया जाता है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जो निदान से ले कर उपचार निर्णयों तक की प्रक्रिया को अधिक तेज, सटीक और प्रभावी बनाती है. उन्होंने इन तकनीकों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट करते हुए यह संदेश दिया कि पशु चिकित्सा क्षेत्र एक नई वैज्ञानिक दिशा की ओर बढ़ है.

उन्होंने छात्रों को उत्तर अमेरिका में उच्च शिक्षा, रिसर्च फैलोशिप, इंटर्नशिप और कैरियर के विकल्पों की जानकारी भी दी और उन्हें बताया कि एक वैश्विक दृष्टिकोण अपना कर वे अपने कैरियर को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं.

इस कार्यक्रम का आयोजन छात्र कल्याण निदेशक डा. सज्जन सिहाग के पर्यवेक्षण में किया गया, जबकि संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी डा. तरुण कुमार (संयोजक, परामर्श एवं प्लेसमैंट प्रकोष्ठ) ने निभाई. पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. गुलशन नारंग भी कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने छात्रों को इस तरह के कार्यक्रमों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया.

इस संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के इंटर्नशिप कर रहे छात्र, स्नातकोत्तर छात्र, रिसर्च स्कौलर्स और फैकल्टी मेंबर्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. कार्यक्रम के अंत में एक सवालजवाब और संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिस में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने अंतर्राष्ट्रीय शोध सहयोग, नई तकनीकों का अनुप्रयोग और विदेशों में उच्च अध्ययन के अवसरों को ले कर अपने सवाल रखे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया.

पशुओं का संतुलित आहार (Balanced Diet) और कुल मिश्रित राशन

Balanced Diet : वह आहार जिस में  पशुओं के लिए जरूरी सभी पोषक तत्त्व सही मात्रा में मौजूद हों, उसे पशुओं का संतुलित आहार कहते हैं. किसानों को पशु आहार के जरूरी तत्त्वों के बारे में खास जानकारी नहीं होती. उन्हें शिक्षा व प्रशिक्षण के जरीए यह जानकारी देने की जरूरत है.

खानपान की अहमियत

* संतुलित खानपान अच्छे दूध उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है.

* संतुलित खानपान के द्वारा पशुओं में होने वाले तमाम रोगों को रोका जा सकता है.

* यह पशुओं की सेहत सही रखता है और रोग प्रतिरोधी कूवत को बनाए रखता है.

* ज्यादा दूध उत्पादन के कारण पशु में पैदा हुए तनाव को भी संतुलित आहार खिला कर दूर किया जा सकता है.

* संतुलित आहार के जरीए पशु को सभी जरूरी पोषक तत्त्व जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज तत्त्व, विटामिन वगैरह प्राप्त होते हैं.

* संतुलित आहार हरे व सूखे चारे और दानों से तैयार होता है, लिहाजा यह बहुत ही स्वादिष्ठ व सेहत के लिए कारगर होता है.

कुल मिश्रित राशन

चारों और दानों को मिला कर जो राशन तैयार किया जाता है, उसे कुल मिश्रित राशन कहते हैं. इस राशन में आहार की जरूरी चीजों को इस अनुपात में मिलाया जाता है कि उस के द्वारा प्राप्त होने वाले पोषक तत्त्वों से पशु की मांग पूरी की जा सके.

राशन के फायदे

* कुल मिश्रित राशन खिलाने से पशु के उत्पादन में 5-8 फीसदी का इजाफा होता है.

* इसे खिलाने से भोजन का पाचन सही रहता है.

* दाने व चारे को अलगअलग  खिलाए जाने के बजाय मिश्रित राशन खिलाने से आहार इस्तेमाल दर 4 फीसदी तक बढ़ जाती है.

* पशुओं के विभिन्न वर्गों के लिए आहार में ज्यादा तत्त्वों को इस्तेमाल करने का मौका मिलता है.

* कम चीजों द्वारा तैयार पशु आहार खिलाने के मुकाबले संपूर्ण मिश्रण खिलाने से पाचन की गड़बड़ी को भी सही रखा जा सकता है.

* खनिज तत्त्वों व विटामिनों को अलग से देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि संपूर्ण मिश्रित आहार में ये पहले से ही मौजूद होते हैं.

*  बेस्वाद चीजों को भी इस के साथ मिला कर पशुओं को खिलाया जा सकता है.

* आहार के भंडारण व परिवहन की लागत को भी कम किया जा सकता है.

*  इसे खिलाने से कम लागत पर अच्छी आमदनी मिलती है.

कुछ खास बातें

* आहार नांद साफसुथरी और बारिश से बचाने वाली जगह पर होनी चाहिए.

* पशु के रहने की जगह आरामदेह होनी चाहिए, ताकि उसे गरमी व हवा के तनाव से बचाया जा सके.

* राशन में जरूरी प्रोटीन व नमक के स्तर की जांच करा लेनी चाहिए.

* पानी की जरूरत (200 लीटर प्रति गाय) और उस की क्वालिटी का खयाल रखना चाहिए.

* ज्यादा उत्पादन वाली गायों के लिए पंखों व फव्वारों का इंतजाम होना चाहिए.

* राशन के रेशों के स्तर की जांच करा लेनी चाहिए.

* चारे की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए.

* पशुओं के तमाम वर्गों के लिए अलगअलग संपूर्ण मिश्रित राशन होना चाहिए.

संपूर्ण मिश्रित राशन में दुधारू गायों के लिए तय प्रोटीन स्तर तालिका में दिया है.

पशुपालन व कृषि में उन्नत तकनीकों (Advanced Techniques) को अपनाए

Advanced Techniques : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के संस्थान केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर तहसील मालपुरा, जिला टोंक (राजस्थान) की अनुसूचित जनजाति उपयोजना (टीएसपी) के माध्यम से सिकराय तहसील के ग्राम पंचायत घूमना की कड़ी की कोठी चौराहे पर किसान वैज्ञानिक संगोष्ठी एवं खरीफ की फसलों के गुणवत्ता बीज वितरण कार्यक्रम का आयोजन 9 जून, 2025 को किया गया.

‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के अंतर्गत इस कार्यक्रम में अविकानगर संस्थान एवं कृषि विज्ञान केंद्र दौसा के वैज्ञानिक एवं कर्मचारीयों ने भी किसानों को उन्नत और नवीन कृषि तकनीक सहित पशुपालन की खास तकनीकियों के बारे में भी जानकारी दी.

केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा तहसील में स्थित है, जो साल 1962 से राजस्थान राज्य के किसानों के साथ देश के किसानों को भेड़बकरी व खरगोश पालन पर प्रशिक्षण, उन्नत नस्ल के पशुओं का वितरण, उन का वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ विभिन्न सेवाएं प्रदान कर रहा है. इस 9 जून के किसान वैज्ञानिक संगोष्ठी कार्यक्रम में केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान के निदेशक व स्टेट कोऔर्डिनेटर विकसित कृषि संकल्प अभियान, डा. अरुण कुमार तोमर मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम मे शामिल हुए.

इस कार्यक्रम में उन के साथ कृषि विज्ञान केंद्र दौसा के प्रभारी डा. बनवारी लाल जाट एवं उन की टीम के सदस्य डा. अक्षय चितोड़ा, डा. देवेंद्र मीना अविकानगर के पशु कार्यिकी, जैव रसायन विभाग के अध्यक्ष डा. सत्यवीर सिंह डांगी, अविकानगर संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक टीएसपी नोडल अधिकारी डा. अमरसिंह मीना, डा. चंदन गुप्ता, पंचायत समिति सिकराय के सरपंच संघ के अध्यक्ष विपिन मीना, घूमना के साथ आसपास की पंचायतो के सरपंचों ने भी विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया.

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. अरुण कुमार तोमर ने उपस्थित किसानों को वर्तमान मौसम की चुनौतियां व भविष्य की संभावनाओं के लिए कृषि एवं पशुपालन की नवीनतम तकनीकियों को अपनाने के लिए विस्तार से चर्चा की. साथ ही, रूरल इंडिया को रियल इंडिया बनाने के लिए विकसित कृषि की ओर लोगों को बढ़ने का आह्वान किया. इस के साथ ही, अपने संस्थान के पशु भेड़ एवं बकरी को वर्तमान समय के लिए सब से उपयुक्त पशु बताते हुए ऐसे पशुओं को किसानों का एटीएम बताया. जिस से किसी भी समय मांस एवं दूध बेच कर पैसा कमाया जा सकता है.

इस कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को वैज्ञानिक भेड़बकरी पालन प्रशिक्षण ले कर पशुओं के विभिन्न पालन तकनीकियों को अपने उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया. अविकानगर के निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर ने उपस्थित किसानों को बताया कि संस्थान की टीएसपी उपयोजना में जनजाति भेड़पालक किसानों को प्राथमिकता देते हुए हमने आप के क्षेत्र के जनजाति भेड़पालकों को संस्थान की गतिविधियों के बारे में बताया है, और आगे भी हम जनजाति भेड़पालक किसानों को प्राथमिकता के आधार पर संस्थान से जोड़ रहे हैं, जो भी जनजाति किसान भेड़पालन से जुड़े हैं, वो मेरे संस्थान के अधिकारियों से संपर्क कर इस टीएसपी उपयोजना का लाभ उठा सकते हैं.

अंत में निदेशक द्वारा उपस्थित किसानों को भारत सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के बारे में बताया गया. साथ ही, इस को प्रोत्साहन के रूप में लेते हुए अपने छोटे पशुओं के पालन को उद्यमिता विकास की ओर ले जाने के लिए किसानों को जरूरी सुझाव दिए गए. इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डा. बनवारी लाल जाट द्वारा भी वर्तमान खेती की समस्या पर किसानो के सवाल का जवाब दिया गया.

Advanced Techniquesकेवीके की वैज्ञानिक टीम द्वारा नकली खाद बीज एवं दवाइयों के बारे में किसानों को जागरुक करते हुए कार्यक्रम के बाद वितरित की जाने वाली विभिन्न बारिश फसलों (मुंग, ज्वार, तिल, ग्वार एवं किचन गार्डन के लिए सब्जियों की किट) की किस्म के बारे अधिक उत्पादन के लिए के लिए आवश्यक सुझाव दिए.

इस कार्यक्रम में उपस्थित वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसानों द्वारा कृषि एवं पशुपालन योजनाओं के बारे में मौजूद किसानों को जानकारी दी गई. अविकानगर संस्थान की टीएसपी उपयोजना के नोडल अधिकारी डा. अमर सिंह मीना ने बताया कि आज के कार्यक्रम में राष्ट्रीय बीज निगम लिमिटेड, नई दिल्ली की बारिश के मौसम की विभिन्न फसलों जैसे तिल (किस्म- GT-6 1.5 क्विंटल बीज), मूंग (किस्म MH-1142 15 क्विंटल बीज), ज्वार (किस्म CSV-41 4 क्विंटल बीज), ग्वार (किस्म HG-2-20 10 क्विंटल बीज) और बेहतर पोषण के लिए किचन गार्डन सब्जियों किट आदि का भी वितरण मौजूद अतिथियों द्वारा किया गया.

इस प्रकार कुल 30.5 क्विंटल (800 बीज पैकेट) गुणवत्ता युक्त बीज का प्रथम लाइन प्रदर्शन मौजूद किसानों के खेत पर लगेंगे. अविकानगर संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में दौसा जिले की विभिन्न तहसील सिकराय, बहरावड़ा, बैजूपाड़ा, सिकंदरा आदि के विभिन्न गांवो (घूमना, जयसिंहपुरा, पाटन, बुजेट, गीजगढ़, गढ़ी, बनेपुरा, जयसिंहपुरा, नामनेर, सिकराय, कैलाई, गनीपुर, पिलोड़ी, खेड़ी रामला, निकटपुरी, दंड खेड़ा, मानपुर, लोटवाड़ा, नांदरी, गिरधारीपुरा, नाहरखोरा, लाखनपुरा, बसेड़ी, भावगढ़, गेरोटा, चांदपुर, आगवली, गेरोज, मोहलई, गडोरा आदि गांव ) के 600 से ज्यादा जनजाति किसानों ने कार्यक्रम मे पहुंच कर दी गई जानकारी से लाभान्वित हुए और  उन को गुणवत्ता बीज का वितरण भी किया गया.

इस कार्यक्रम के समापन पर सरपंच घूमना एवं सिकराय सरपंच संघ के अध्यक्ष श्रीमान विपिन मीना ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों एवं गांव वासियों को धन्यवाद दिया और आगे भी इस तरह के कार्यक्रम किसानों के लिए उपयोगी बताते हुए आयोजित करने का निवेदन निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर से किया गया.

इस किसान वैज्ञानिक संगोष्ठी कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए अविकानगर संस्थान के वैज्ञानिक डा. चंदन गुप्ता, सहायक कर्मचारी छुट्टन लाल मीना, नरेश बिश्नोई, विष्णु भटनागर समेत  घूमना गांववासियों ने अपना पूरा सहयोग दिया.